भू-आधार समाचार: दिल्ली में जमीन के झगड़े को खत्म करने के लिए दिल्ली की बीजेपी सरकार ने नई पहल शुरू की है. जिसके अनुसार हर जमीन के टुकड़े को एक खास 14 अंकों का पहचान नंबर मिलेगा. आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है?
दिल्ली में हर जमीन के टुकड़े को एक खास 14 अंकों का पहचान नंबर मिलेगा.
Delhi Bhu-Aadhaar News: दिल्ली सरकार ने ‘भू-आधार’ कार्ड जारी करने की पहल शुरू की है, जिससे शहर में हर जमीन के टुकड़े को एक खास 14 अंकों का पहचान नंबर मिलेगा. इसका मकसद जमीन की सीमा से जुड़े झगड़ों को खत्म करना है. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि ड्रोन सर्वे और हाई-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग का इस्तेमाल करके दिल्ली का एक नया डिजिटल लैंड मैप तैयार किया जाएगा. उन्होंने कहा कि भू-आधार प्रधानमंत्री के ‘डिजिटल इंडिया’ के सपने को पूरा करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है.
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यूनिक लैंड पार्सल आइडेंटिफिकेशन नंबर, जिसे भू-आधार कहा जाता है. इसको 2021 में केंद्र के डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइज़ेशन प्रोग्राम के हिस्से के तौर पर लॉन्च किया गया था.
इस पूरे मामले पर दिल्ली सीएमओ का बयान सामने आया है. जिसमें कहा गया है कि यह कदम दिल्ली के जमीन के रिकॉर्ड को मॉडर्न बनाने और नागरिकों को लंबे समय से चले आ रहे ज़मीन के झगड़ों से आज़ादी दिलाने की सरकार की कोशिश का हिस्सा है. ULPIN को लागू करने का काम रेवेन्यू डिपार्टमेंट की IT ब्रांच को सौंपा गया है, जिसे सर्वे ऑफ़ इंडिया भी सपोर्ट करेगा. इसके अलावा, बयान में कहा गया है कि दिल्ली के सभी इलाकों के लिए सटीक ULPIN बनाने के लिए सर्वे ऑफ़ इंडिया से लगभग 2 TB हाई-क्वालिटी जियोस्पेशियल डेटा और ड्रोन-बेस्ड ऑर्थो रेक्टिफाइड इमेज ली जा रही हैं, जिसमें SVAMITVA स्कीम के तहत पहले से कवर किए गए 48 गांव शामिल हैं.
इससे पहले इस प्रोजेक्ट के लिए ₹1.32 करोड़ दिए गए थे, जिसका फाइनेंशियल मैनेजमेंट IT ब्रांच देखेगी. सरकार अब एक तय टाइमलाइन के साथ एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के तहत धीरे-धीरे पूरे दिल्ली में इस सिस्टम को बढ़ाएगी. वेस्ट दिल्ली जिले के तिलंगपुर कोटला गांव में एक पायलट प्रोजेक्ट पहले ही पूरा हो चुका है, जहां 274 ULPIN रिकॉर्ड सफलतापूर्वक बनाए गए हैं.
इसके अलावा, सीएमओ ने कहा कि भू-आधार सिस्टम से ज़मीन के मालिकाना हक में पूरी ट्रांसपेरेंसी पक्की होगी। 14-डिजिट का कोड जियो-रेफरेंस्ड होगा, जिससे ज़मीन की सीमाओं पर झगड़े कम होंगे. बयान में कहा गया है कि इससे अलग-अलग सरकारी डिपार्टमेंट के बीच जमीन के डेटा को कोऑर्डिनेट करने में आसानी होगी और धोखाधड़ी वाले ट्रांज़ैक्शन और कई रजिस्ट्रेशन पर असरदार तरीके से रोक लगेगी. नागरिकों के लिए इस कदम से आसानी और सुविधा होने की उम्मीद है. बयान में कहा गया है कि जमीन का मालिकाना हक साबित करने के लिए कई डॉक्यूमेंट्स देखने के बजाय एक ही नंबर से प्रॉपर्टी की पूरी जानकारी मिल जाएगी.
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