आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा की झकझोर देने वाली 17 वर्षीय लड़की के साथ हुए बलात्कार और हत्या मामले में 18 साल से ज्यादा समय के बाद, शुक्रवार को लंबी कानूनी लड़ाई, लड़की के परिवार को न्याय दिलाए बिना ही खत्म हो गई, क्योंकि विजयवाड़ा की एक अदालत में उसके माता-पिता को उनकी बेटी के कंकाल अवशेषों से भरा एक बैग सौंप दिया.
अवशेषों से भरा थैला सौंपा
सीबीआई की विशेष अदालत में पीड़िता लड़की के माता-पिता जिनका उम्र 60 और 62 साल थी वो चुपचाप तब खड़े रहे, जब अदालत के अधिकारियों ने उनकी बेटी के पार्थिव अवशेषों से भरा थैला उन्हें सौंप दिया. अदालत के बाहर, पीड़िता के माता ने पत्रकारों से कहा कि न्याय व्यवस्था पर उनका विश्वास पूरी तरह से टूट गया है.
शरीर के कुछ हिस्से वापस लेने के लिए भी लड़ना पड़ा
आगे उन्होंने कहा. 18 साल के लंबे संघर्ष के बाद, हमें यही मिला है. हमारी सारी उम्मीदें खत्म हो सी गई हैं. न्याय मिलने की आखिरी उम्मीद भी अब खत्म हो गई है. हमें अपनी बेटी के शरीर के कुछ अंग वापस लेने के लिए भी अदालत में लड़ना पड़ा.
मामला क्या था
पीड़िता, जो बी.फार्मा की प्रथम वर्ष की छात्रा थी, 27 दिसंबर 2007 को विजयवाड़ा स्थित अपने छात्रावास के कमरे में मृत पाई गई थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बाद में पुष्टि की कि उसके साथ बलात्कार किया गया था. 2008 में, पुलिस ने पिडाथला सत्यम बाबू को बलात्कार और हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया और बाद में 2010 में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई.
पीड़िता के शव को कब्र से निकाला
लेकिन सात साल बाद, आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने उसे बरी कर दिया और पुलिस को एक तरह से नए सिरे से जांच शुरू करने का आदेश दिया. इसके बाद हाई कार्ट ने नवंबर 2018 में मामला सीबीआई को सौंप दी. साल भर बाद, एजेंसी ने पीड़िता के शव को कब्र से वापस निकालकर दोबारा पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया.
क्लोजर रिपोर्ट पेश की
इस महीने की शुरुआत में, सीबीआई ने मामले में सबूतों की कमी और आगे की कार्यवाही के लिए कोई आधार न होने के बारे में बताते हुए क्लोजर रिपोर्ट पेश की थी. मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, 21 फरवरी को अन्नपूर्णा न्यायाधीश की अदालत ने अंतिम रिपोर्ट की जांच के बाद मामले को बंद करने का आदेश जारी कर दी. कल यानी बीते शुक्रवार को अपनी बेटी का शव मिलने के बाद, माता-पिता ने उसके अवशेषों को चेनचुपेट कब्रिस्तान में दफन कर दिया.