Delhi EV Policy 2.0: दिल्ली की हवा में अब सिर्फ़ सर्दियों की ठंडक ही नहीं बल्कि एक साफ बेचैनी भी घुली हुई है. सुबह का आसमान अक्सर कोहरे से नहीं, बल्कि धुएं की चादर से ढका रहता है. सड़कों पर तेजी से दौड़ते पुराने वाहन सिर्फ़ अपना रास्ता ही तय नहीं कर रहे हैं; वे शहर की साँसों पर भी भारी पड़ रहे हैं. इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने एक रणनीतिक कदम उठाया है जिसे EV पॉलिसी 2.0 नाम दिया गया है. सिर्फ़ सीधी सब्सिडी देने पर ध्यान देने के बजाय, अब जोर पुराने धुआं उगलने वाले वाहनों को धीरे-धीरे हटाने पर दिया जा रहा है. संदेश साफ है: वाहन जितना पुराना होगा, उस पर नियम उतने ही सख़्त होंगे. इसके विपरीत जो लोग इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाएंगे उनके लिए राह उतनी ही आसान होगी.
पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को 2020 की इलेक्ट्रिक वाहन (EV) पॉलिसी की समीक्षा करने और उसे अपडेट करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने पाया कि पिछले पांच सालों में टेक्नोलॉजी और पॉलिसी के ढांचे, दोनों में काफ़ी प्रगति हुई है, इसलिए एक नई और ताज़ा पॉलिसी बनाने की जरूरत है. सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार अभी PM E-DRIVE योजना के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों (स्कूटर और बाइक) और तिपहिया वाहनों (ऑटो और ई-रिक्शा) के लिए मिलने वाली सब्सिडी को मौजूदा समय सीमा 31 मार्च, 2026 से आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है.
हुई थी समीक्षा बैठक
रिपोर्टों से पता चलता है कि इस हफ्ते की शुरुआत में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने इस मामले की समीक्षा की थी. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) द्वारा शुरू किया गया यह प्रस्ताव अब वित्त मंत्रालय को भेज दिया गया है. सोमवार को PMO में हुई एक समीक्षा बैठक के बाद इस मामले पर आगे की कार्रवाई की गई. इस बैठक में फंड के इस्तेमाल और अलग-अलग तरह के वाहनों में EV को अपनाने की रफ़्तार पर चर्चा हुई.
इस बीच, दिल्ली बजट 2026 के दायरे में, रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य की नई इलेक्ट्रिक वाहन पॉलिसी (EV पॉलिसी 2.0) का खाका पेश किया है. यह पॉलिसी कई नए नियमों का प्रस्ताव करती है, जिनमें वित्तीय प्रोत्साहन से लेकर टैक्स में छूट तक सब कुछ शामिल है. तो आइए, जानते हैं कि दिल्ली की नई EV पॉलिसी आख़िर है क्या.
दिल्ली की नई EV पॉलिसी क्या है?
दिल्ली सरकार द्वारा लाई गई नई EV पॉलिसी 2.0 में, राजधानी में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के मकसद से अब सिर्फ़ सीधी सब्सिडी देने के बजाय पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करने पर ज़्यादा ज़ोर दिया गया है. दिल्ली सरकार ने इस नई पॉलिसी का फ़ोकस पुरानी और ज़्यादा प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों को धीरे-धीरे सड़कों से हटाने पर रखा है. 2026 के बजट में इस मकसद के लिए 200 करोड़ का बजट तय किया गया है. इस नई पॉलिसी का मकसद दिल्ली की सड़कों से पुरानी गाड़ियों को हटाकर प्रदूषण कम करना और इलेक्ट्रिक गाड़ियों को अपनाने के लिए लोगों को बढ़ावा देना है.
इस नई पॉलिसी में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब सबसे ज़्यादा फ़ायदा उन लोगों को मिलेगा जो अपनी पुरानी गाड़ियों को स्क्रैप करवाने का फ़ैसला करेंगे. इस फ़ायदे को पाने के लिए खरीदार को यह सबूत देना होगा कि उसने अपनी कोई पेट्रोल या डीज़ल गाड़ी खास तौर पर BS-IV मॉडल या उससे पुरानी जो दिल्ली में रजिस्टर्ड थी, उसे स्क्रैप करवा दिया है. ऐसा सबूत देने पर ही वे ज़्यादा इंसेंटिव पाने के हकदार होंगे.
नई पॉलिसी के तहत कितनी सब्सिडी मिलेगी?
सरकार ने हर खास तरह की गाड़ी के लिए एक नया सब्सिडी ढांचा तैयार किया है. पहले साल के लिए सरकार ने इंसेंटिव स्कीम को आसान बना दिया है. 15 लाख तक की कीमत वाली प्राइवेट इलेक्ट्रिक गाड़ियों को 1 लाख तक की सब्सिडी मिलेगी. हालांकि, यह फायदा सिर्फ़ पहले 100,000 ग्राहकों तक ही सीमित रहेगा. इलेक्ट्रिक दोपहिया गाड़ियों के लिए अब बैटरी की क्षमता चाहे जो भी हो 10,000 की सीधी छूट दी जाएगी. पहले, दोपहिया गाड़ियों के लिए सब्सिडी बैटरी की अलग-अलग क्षमताओं के आधार पर तय की जाती थी, हालांकि उस सिस्टम में भी सब्सिडी की रकम पर एक ऊपरी सीमा तय थी. वहीं, इलेक्ट्रिक तिपहिया गाड़ियों (L5M कैटेगरी) को 25,000 रुपए का फ़ायदा मिलेगा. इसके अलावा सरकार ने इस पॉलिसी में एक नया नियम भी जोड़ा है. अगर कोई व्यक्ति अपनी मौजूदा पेट्रोल या डीज़ल कार को इलेक्ट्रिक गाड़ी में बदलवाता है, तो उसे 50,000 रुपए की आर्थिक मदद दी जाएगी.
रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन
दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस पर 100% की छूट मार्च 2030 तक जारी रहेगी. हालांकि, अब इस दायरे में एक खास सीमा तय कर दी गई है. 30 लाख रुपए तक की कीमत वाले इलेक्ट्रिक वाहन पूरी तरह से टैक्स-फ्री रहेंगे, जबकि इस कीमत से ज़्यादा वाले वाहनों पर सामान्य टैक्स दरें लागू होंगी.
सार्वजनिक परिवहन पर ज़ोर
निजी वाहनों के अलावा सरकार ने सार्वजनिक परिवहन को भी इलेक्ट्रिक बनाने पर ज़ोर दिया है. नई नीति के अनुसार, साल 2026–27 के दौरान सड़कों पर 6,130 नई इलेक्ट्रिक बसें उतारी जाएंगी. मार्च 2027 तक कुल 7,500 बसों का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से 5,800 बसें इलेक्ट्रिक होंगी. इसके अलावा 12,000 इलेक्ट्रिक बसों का एक बड़ा लक्ष्य भी तय किया गया है. सरकार का कहना है कि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का भी तेज़ी से विस्तार किया जाएगा. दिल्ली में हर वाहन डीलरशिप के लिए कम से कम एक पब्लिक चार्जिंग पॉइंट लगाना ज़रूरी होगा. सरकार का लक्ष्य 2026 के आखिर तक 18,000 चार्जिंग स्टेशन बनाना है. इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, बैटरी रीसाइक्लिंग (दोबारा इस्तेमाल के लिए) के लिए भी एक सिस्टम बनाया जा रहा है.
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति इस पहल की देखरेख करेगी. बस डिपो को इलेक्ट्रिक बनाने और दूसरी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए 320 करोड़ रुपए खर्च करने की योजना है. इसके अलावा DTC डिपो में 50 करोड़ रुपए की लागत से पांच नए ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन बनाए जाएंगे. यह नई EV पॉलिसी एक बड़ी परिवहन योजना का हिस्सा है. नई पॉलिसी में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और आधार-आधारित e-KYC शामिल हैं, जिससे सब्सिडी मिलने में लगने वाला समय 40 दिन से घटकर एक हफ़्ते से भी कम हो जाएगा. इससे यह पक्का होगा कि लोगों को फ़ायदे ज़्यादा तेज़ी से मिलें और पूरी प्रक्रिया भी आसान हो जाएगी. इस तरह दिल्ली की EV पॉलिसी 2.0 न सिर्फ़ इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देगी बल्कि प्रदूषण कम करने और शहर को ज़्यादा साफ़ बनाने की दिशा में भी एक अहम कदम साबित हो सकती है.