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दिल्लीवासियों को सांस लेना पड़ रहा भारी! अक्टूबर में टूटा 5 साल का प्रदूषण रिकॉर्ड

Delhi Pollution 2025: दिल्लीवासी इन दिनों प्रदूषण की भारी मार झेल रहें है. अक्टूबर महीना दूसरा सबसे प्रदूषित महीना रहा है. साथ ही इसने 5 साल का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है.

Written By: shristi S
Last Updated: 2025-10-31 08:36:41

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Delhi AQI October 2025: दिल्ली (Delhi) के लिए अक्टूबर का महीना इस साल कई मायनों में चुनौती भरा साबित हुआ.राजधानी की हवा जहां सांस लेना मुश्किल बना रही थी, वहीं बारिश और तापमान में गिरावट ने मौसम को अप्रत्याशित मोड़ दे दिया. सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि साल 2025 का अक्टूबर पिछले पांच वर्षों में दूसरा सबसे प्रदूषित महीना रहा, जिसका औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 224 दर्ज किया गया यह स्तर “खराब” (Poor) श्रेणी में आता है.

 प्रदूषण ने तोड़े कई रिकॉर्ड

दिल्ली की हवा में मौजूद प्रदूषक तत्वों ने इस बार भी कोई राहत नहीं दी. हालांकि यह औसत पिछले साल 2024 के अक्टूबर (234) से थोड़ा बेहतर रहा, लेकिन 2023 (218), 2022 (210) और 2021 (173) की तुलना में कहीं ज़्यादा प्रदूषित रहा. दिल्ली में अक्टूबर के शुरुआती दिनों में हल्की बारिश होने से कुछ दिन राहत जरूर मिली, पर 12 अक्टूबर के बाद जब बारिश थमी, तो हवा की गुणवत्ता तेजी से गिरने लगी. दिवाली तक प्रदूषण का स्तर “खराब” से “बहुत खराब” श्रेणी तक पहुंच गया.
दिल्ली में अक्टूबर 2025 के दौरान कुल 90 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य 15.1 मिमी से लगभग 492% अधिक रही. यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगर इतनी बारिश नहीं हुई होती तो दिल्ली की हवा की स्थिति और भी भयावह हो सकती थी. बारिश ने प्रदूषक कणों को कुछ हद तक नीचे बैठा दिया और AQI को “बहुत गंभीर” स्तर तक पहुंचने से रोक लिया.

 बारिश के कारण दिल्ली में जल्द आई ठंड

बारिश की वजह से इस बार अक्टूबर में दिल्ली का औसत अधिकतम तापमान 31.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग 1.5 डिग्री कम है. दिल्ली में इतना कम तापमान आखिरी बार अक्टूबर 2022 में दर्ज किया गया था, जब औसत तापमान 31.4 डिग्री रहा था. इस तरह, यह महीना पिछले तीन सालों की तुलना में सबसे ठंडा अक्टूबर साबित हुआ.

क्या है प्रदूषण का असली कारण?

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की निदेशक अनुमिता रॉयचौधरी के अनुसार, दिल्ली के प्रदूषण में इस बार पराली जलाने का योगदान सिर्फ 1–2% रहा. उन्होंने स्पष्ट कहा कि दिल्ली का प्रदूषण मुख्य रूप से स्थानीय कारणों से है जैसे गाड़ियों से निकलता धुआं, निर्माण स्थलों की धूल, और औद्योगिक उत्सर्जन. इसलिए, सरकार और नागरिकों दोनों को स्थानीय स्तर पर उत्सर्जन कम करने के उपायों पर ध्यान देना होगा.

कम हवा की गति ने बढ़ाई मुश्किलें

सीपीसीबी के पूर्व वायु गुणवत्ता प्रमुख दिपांकर साहा ने बताया कि अक्टूबर के दौरान हवा की गति काफी कम रही, जिससे प्रदूषक तत्व वायुमंडल में ऊपर नहीं जा सके और निचली सतह पर ही जमा रहे. उनके अनुसार कि यह मौसम के लिहाज से सामान्य स्थिति है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम निष्क्रिय रहें. अगर हम उत्सर्जन के स्रोतों को नियंत्रित करें तो हवा में मौजूद जहरीले रसायनों की मात्रा घटाई जा सकती है.

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