DTC Bus Strike: दिल्ली में DTC चालकों और परिचालकों की हड़ताल से तीसरे दिन भी आम जनता परेशान है. 12000 कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से सड़कें सूनी हैं और मेट्रो में भारी भीड़ बढ़ गई है. कर्मचारी वेतन वृद्धि और बकाया DA की मांग पर अड़े हैं, लेकिन परिवहन मंत्री के दावे और यूनियन के बयान के बीच एक बड़ा विरोधाभास सामने आया है... जानिए क्या है पूरी वजह.
दिल्ली थमी, मेट्रो फुल: DTC कर्मचारियों की हड़ताल से चरमराई राजधानी! जानें क्यों सड़कों पर उतरे 12 हजार बस ड्राइवर
दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के चालकों और परिचालकों की हड़ताल गुरुवार को लगातार तीसरे दिन भी जारी रहने की संभावना है. वेतन बढ़ाने, बेहतर कार्य परिस्थितियों और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे हैं. सड़कों से बसें नदारद रहने के कारण राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
बसों की अनुपलब्धता के कारण यात्रियों को दिल्ली मेट्रो और अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है. पीक आवर्स के दौरान मेट्रो स्टेशनों और ट्रेनों के भीतर भारी भीड़ देखी जा रही है.
यात्रियों की सहूलियत के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने अतिरिक्त व्यवस्था की है. DMRC ने नेटवर्क पर 20 अतिरिक्त फेरे बढ़ाए हैं और आवश्यकतानुसार 8 अतिरिक्त ट्रेनें चलाई हैं. DMRC ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि यह व्यवस्था गुरुवार को भी जारी रहेगी.
हड़ताल का असर स्कूली परिवहन पर भी पड़ा है. कई अभिभावक बसों की उपलब्धता को लेकर असमंजस में रहे. सरदार पटेल विद्यालय ने अभिभावकों को सूचित किया कि कुछ क्षेत्रों में बस सेवाएं अनिश्चित हैं, हालांकि वापसी के सफर के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है.
उल्लेखनीय है कि डीटीसी ने 2023 के शैक्षणिक सत्र से ही स्कूलों को बसें देना बंद कर दिया था. इससे पहले डीटीसी करीब 350 से अधिक बसें स्कूली बच्चों के परिवहन के लिए उपलब्ध कराती थी.
डीटीसी कर्मचारी एकता यूनियन के अनुसार, वर्तमान में चालकों और परिचालकों को 862 रुपये प्रतिदिन का न्यूनतम वेतन मिल रहा है. यूनियन के अध्यक्ष ललित चौधरी ने इसे अपर्याप्त बताया. उन्होंने कहा कि हर छह महीने में बढ़ने वाला महंगाई भत्ता (DA) पिछले डेढ़ साल से नहीं बढ़ा है. इसके अलावा 2024 से लंबित वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) भी लागू नहीं की गई है.
कर्मचारियों की मुख्य मांगें
यूनियन के अनुसार, बुधवार को लगभग 12,000 चालक और परिचालक इस हड़ताल में शामिल हुए, जिनमें इलेक्ट्रिक बसों के परिचालन से जुड़े कर्मचारी भी शामिल हैं.
दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने कर्मचारियों से हड़ताल समाप्त करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि सरकार ने इलेक्ट्रिक बसें चलाने वाली निजी कंपनियों को चालकों की समस्याओं का तुरंत समाधान करने के निर्देश दिए हैं.
दूसरी ओर, यूनियन अध्यक्ष ललित चौधरी ने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से अभी तक किसी प्रतिनिधि ने उनसे संपर्क नहीं किया है. जब तक मांगों पर बातचीत नहीं होती, तब तक शांतिपूर्ण हड़ताल जारी रहेगी.
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