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Eknath Shinde: महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने मलंगगढ़ का दौरा किया, जहां उन्होंने मुस्लिम समुदाय की दरगाह और हिंदू मंदिर दोनों में दर्शन किए. ऐसे समय में उन्होंने पहले दरगाह पर मत्था टेका, उसके बाद फिर मंदिर में आरती पूजन की. आरती-पूजन के बाद उन्होंने भगवा झंडा लहराया, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा हो रही है.
मंदिर और दरगाह के विवादों के बीच फंसी
ठाणे के कल्याण स्थित मलंगगढ़ दोनों मुस्लिम और हिंदू दोनों के आस्था का जगह है. मलंगगढ़ मलंग बाबा की पहाड़ी. यह एक पुरानी जगह है जो कई सालों से मंदिर और दरगाह के विवादों के बीच फंसी हुई थी.
मुस्लिम समुदाय इसे 12वीं शताब्दी के सूफी संत हाजी अब्दुल रहमान (हाजी मलंग बाबा) की दरगाह मानता है तो वहीं हिन्दू इसे नाथ संप्रदाय के अनुयासी इस मच्छिंद्रनाथ मंदिर यानी मच्छिंद्रनाथ की समाधि स्थल मानते हैं.
18वीं शताब्दी में भी हुआ था विवाद
इस दरगाह को लेकर पहली बार 18वीं शताब्दी में विवाद हो गया था. लेकिन तब ये संघर्ष ऐसा नहीं था कि यह मंदिर है या दरगाह, बल्कि ऐसा था बल्कि इसलिए था कि इसकी देखरेख ब्राह्मण कर रहे हैं. तब के समय दरगाह के वंशानुगत संरक्षक कुछ स्थानीय मुसलमानों ने इसकी देखरेख एक ब्राह्मण द्वारा किए जाने पर आपत्ति जताई थी. स्थानीय प्रशासक ने साल, 1817 में निर्णय लिया कि दरगाह पर नियंत्रण तय करने के लिए लॉटरी की जाएगी. इसमें तीन बार लॉटरी के विजेता काशीनाथ पंत के प्रतिनिधि केतकर रहे हैं, जिन्हें संरक्षक घोषित किया गया. तब के दौरान केतकर हाजी मलंग दरगाह ट्रस्ट के वंशानुगत ट्रस्टी हैं.
दरगाह की देखरेख में ब्राह्मण परिवार
ट्रस्टी चंद्रहास केतकर के मुताबिक, ट्रस्ट बोर्ड में पारसी, मुस्लिम और हिंदू समुदायों के साथ आस-पास के किसान भी शामिल हैं. 2008 के बाद से ट्रस्ट में कोई नई नियुक्ति नहीं हुई है. और वर्तमान समय में ट्रस्ट में तीन सदस्य हैं, क्योंकि बाकी या तो रिटायर हो गए हैं या उनकी मृत्यु हो चुकी है. फिलहाल दरगाह की देखरेख ब्राह्मण का परिवार करता है.
हाजी मलंग बाबा से फेमस
यह दरगाह मुंबई में स्थित है. जो यमन के 12वीं शताब्दी के सूफी संत हाजी अब्द-उल-रहमान की है. यह हाजी मलंग बाबा के नाम से फेमस है. 20 फरवरी को हाजी मलंग की जयंती सेलिब्रेट की जाती है.