JNU कैंपस में गुरुवार को उस समय तनाव फैल गया जब दिल्ली पुलिस ने लेफ्ट समर्थक स्टूडेंट्स के मार्च को मेन गेट पर रोक दिया. पुलिस की इस कार्रवाई से गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए और गेट का ताला तोड़ दिया। हालात को कंट्रोल करने के लिए कैंपस के बाहर और पुलिस फोर्स तैनात की गई. घटना के दौरान स्टूडेंट यूनियन प्रेसिडेंट अदिति मिश्रा समेत कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया. चश्मदीदों के मुताबिक, मौके पर दो से तीन हजार लोगों की भीड़ जमा हो गई, जिससे कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बन गई. JNU के चार अधिकारियों और स्टूडेंट यूनियन के पूर्व प्रेसिडेंट नीतीश कुमार को भी पुलिस ने हिरासत में लिया. फिलहाल, कैंपस में सिक्योरिटी बढ़ा दी गई है और हालात पर कड़ी नज़र रखी जा रही है.
रविवार को भी हुई थी झड़प
इससे पहले रविवार रात करीब 1:30 बजे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और लेफ्ट स्टूडेंट संगठनों से जुड़े स्टूडेंट्स के बीच झड़प हो गई थी. स्टूडेंट्स ने एक-दूसरे पर लाठी-डंडों से हमला करने और पत्थरबाजी करने का आरोप लगाया था। इस घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं. हिंसा में कई स्टूडेंट्स घायल हुए हैं. हिंसा से बचने के लिए स्टूडेंट्स कैंपस में छिपते भी दिखे.
आखिर क्या है पूरा मामला
यह पूरी घटना JNU में समता मार्च के दौरान हुई हिंसा और उसके बाद लेफ्ट-विंग स्टूडेंट यूनियन (JNUSU) के ‘स्कूल लॉकडाउन’ के विरोध से उपजी है। यह घटना तब और बढ़ गई जब ABVP के सदस्यों ने लॉकडाउन लागू करने के लिए स्कूलों में घुसने की कोशिश की, जिससे दोनों ग्रुप के बीच हिंसक झड़पें, पत्थरबाजी और रॉड से हमला हुआ। ABVP का आरोप है कि 400 लोगों की भीड़ ने उन पर हमला किया, जिससे स्टूडेंट्स को टॉयलेट में छिपना पड़ा, जबकि लेफ्ट-समर्थित स्टूडेंट यूनियन का दावा है कि वाइस चांसलर के कहने पर नकाबपोश हमलावरों ने शांति से विरोध कर रहे स्टूडेंट्स को निशाना बनाया. पुलिस ने अनजान लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है, और एडमिनिस्ट्रेशन ने इंडियन पीनल कोड (IPC) के तहत सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है. बढ़ते तनाव के बीच कैंपस में सिक्योरिटी बढ़ा दी गई है.