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जेएनयू स्टूडेंट प्रोटेस्ट: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के सैकड़ों छात्रों ने बीती रात यानी रविवार देर रात परिसर में मार्च निकाला, जिससे कुलपति शांतिश्री धूलिपुडी पंडित के हालिया पॉडकास्ट साक्षात्कार में की गई टिप्पणियों और जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के निर्वाचित छात्रों के निष्कासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और तेज हो गया है.
इनका मार्च साबरमती टी प्वाइंट से शुरू हुआ और कुलपति के आवास के पास पूर्वी गेट तक हुआ, जहां छात्र नेताओं ने भीड़ को संबोधित किया. प्रदर्शन करने वालों ने कहा कि यह उपस्थिति “पूरे जेएनयू” का प्रतिनिधित्व करती है, और इसे हाल के महीनों में परिसर में हुए सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक बताया है.
पदाधिकारियों के निष्कासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन
आगे कहा गया कि, हम कुलपति की जातिवादी टिप्पणियों और जेएनयूएसयू पदाधिकारियों के निष्कासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जेएनयूएसयू के पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार ने कहा , जिन्हें पिछले साल विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय में चेहरे की पहचान प्रणाली लगाने के विरोध में प्रदर्शन में भाग लेने के कारण निष्कासित कर दिया गया था. उन्होंने कहा, जेएनयू जैसे परिसर में ऐसे कुलपति का कोई जगह नहीं है.
हम लॉकडाउन करेंगे
उन्होंने कहा कि बाद में मार्च को परिसर में स्थित कई शैक्षणिक संस्थानों की ओर मोड़ दिया जाएगा – जिनमें सामाजिक विज्ञान, भाषा, अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन, कला और सौंदर्यशास्त्र के स्कूल और कानून और शासन अध्ययन केंद्र शामिल हैं. हम लॉकडाउन करेंगे जिसके तहत हम जुलूस को इन स्कूलों की ओर मोड़ देंगे और उन्हें बंद कर देंगे.
लेफ्ट और ABVP छात्रों में हुई मारपीट
देर रात करीब 01.30 के आसपास मारपीट हुई है. कुलपति के इस्तीफे की मांग को लेकर निकाले गए समता जुलूस के दौरान ABVP और LEFT संगठन के समर्थक छात्र आपस मे भीड़ गए. यह वीडियो ABVP की तरफ से जारी किया गया है.
विरोध प्रदर्शन क्यों हो रहा है
यह विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को जेएनयूएसयू द्वारा जारी एक बयान के बाद किया गया, जिसमें कुलपति के इस्तीफे की मांग की गई. कुलपति ने पिछले सप्ताह प्रकाशित मीडिया इटरव्यू में दिए गए अपने बयानों को स्पष्ट रूप से जातिवादी बयान बताया था. संघ ने विशेष रूप से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए समानता नियमों की कुलपति द्वारा की गई आलोचना पर आपत्ति जताई, जिसे उन्होंने पूरी तरह से अनावश्यक, अतार्किक और जागरूकतावाद का उदाहरण बताया था.