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Naravane Book Controversy: पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा ‘Four Stars of Destiny’ को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है. पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे के इस किताब में 2020 के भारत-चीन गलवान घाटी संघर्ष की घटनाओं का विस्तार से वर्णन किया गया है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस मामले में एफआईआर तक दर्ज कर ली है और प्रारंभिक जांच में यह पाया गया है कि इस किताब को बिना रक्षा मंत्रालय की मंजूरी, जानबूझकर लीक किया गया था.
ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी और अमेरिका में भी किताब
जांच में पता चला है कि नरवणे की इस पुस्तक को न केवल भारत में बल्कि ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी और अमेरिका जैसे देशों में भी बांटी गई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, यह किताब अन्य देशों में आधिकारिक रूप से जारी होने से पहले ही इन देशों में ऑनलाइन बिक्री के लिए उपलब्ध हो गई थी.
पुलिस की स्पेशल सेल ने आपराधिक साजिशों के तहत संबंधित धाराओं में FIR दर्ज कर ली है. इंटरनेशनल लेवल पर जांच शुरु कर दिया गया है.
पेंगुइन इंडिया को जारी किया गया नोटिस
दिल्ली पुलिस की विशेष प्रकोष्ठ ने बीते कल यानी बुधवार को पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया को नरवणे के संस्मरण ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के आधिकारिक प्रकाशन से पहले कथित रूप से लीक होने के संबंध में नोटिस जारी कर दिया है. प्रकाशन गृह से कई तरह के सवालों के जवाब देने का अनुरोध किया गया है. साथ ही प्रतिनिधियों को चल रही जांच में सहयोग करने के लिए तलब किया गया है.
किताब को लेकर छिड़ा विवाद
लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी भी संसद में इस पुस्तक की एक प्रति लेकर आए थे. फरवरी के पहले सप्ताह से ही लोकसभा में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है, जब अध्यक्ष ने राहुल गांधी को नरवणे के ‘अप्रकाशित संस्मरण’ के अंशों पर आधारित एक लेख का उद्धरण देने से रोक दिया था, जिसमें उन्होंने साल 2020 के भारत-चीन लड़ाई की बात की गई है.