New Delhi: हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक अजीबोगरीब दुष्कर्म मामले की सुनवाई की. जहां आरोपी ने महिला से शादी का वादा करके उसके साथ संबंध बनाया, फिर कुंडली ना मिलने का बहाना देकर शादी से इनकार कर दिया. इस वजह से कोर्ट ने उस व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया है. जानिए पूरा मामला.
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता का आरोप है कि आरोपी ने कई बार शादी का वादा किया और उसी भरोसे पर उससे लंबे समय तक संबंध बनाए. महिला का कहना है कि उसकी सहमति सिर्फ इसलिए थी क्योंकि उसे विश्वास दिलाया गया था कि दोनों की शादी तय है. इसी आधार पर आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और बीएनएस की धारा 69 के तहत मामला दर्ज किया गया. अदालत में पेश दस्तावेजों में व्हाट्सएप संदेश भी शामिल थे. इन संदेशों में आरोपी ने लिखा था कि उनकी कुंडली मिल चुकी है और शादी में कोई रुकावट नहीं है. उसने यह तक कहा था, “कल ही शादी कर रहे हैं हम,” जिससे यह संकेत मिलता था कि विवाह जल्द होने वाला है.
महिला ने एक बार नवंबर 2025 में भी शिकायत दर्ज कराई थी. जब आरोपी और उसके परिवार ने शादी का भरोसा दिया, तो उसने अपनी पहले की शिकायत वापस ले ली थी. लेकिन बाद में आरोपी ने यह कहकर शादी से इनकार कर दिया कि कुंडली नहीं मिल रही है. फिर महिला ने दोबार शिकायत की, जिसे आधार बनाकर कोर्ट ने सुनवाई की.
कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने मामले की सुनवाई की. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जब पहले यह भरोसा दिलाया गया था कि कुंडली मिल चुकी है और शादी में कोई रुकावट नहीं है, तो बाद में कुंडली न मिलने का बहाना बनाकर शादी से इनकार करना इस बात पर सवाल खड़ा करता है कि क्या शुरू से दिया गया वादा सच था या नहीं. पहली नजर में ऐसा व्यवहार बीएनएस की धारा 69 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है, क्योंकि यह झूठे विवाह के वादे पर बनाए गए शारीरिक संबंध से जुड़ा मामला है. अदालत ने यह भी कहा कि यदि कुंडली मिलान आरोपी और उसके परिवार के लिए इतना महत्वपूर्ण था, तो शारीरिक संबंध बनाने से पहले ही इस बात को साफ कर लेना चाहिए था. इस आधार पर कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका रद्द कर दी है.