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Delhi NCR Air Pollution Case: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली-NCR में एयर पॉल्यूशन से जुड़े एक मामले की सुनवाई की. सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने दिल्ली की सीमा के 300 किलोमीटर के अंदर कोयले से चलने वाले थर्मल पावर प्लांट लगाने का सवाल उठाया. एक प्रस्ताव रखा गया कि दिल्ली के 300 किलोमीटर के अंदर ऐसे कोई भी प्लांट नहीं होने चाहिए. बेंच ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा. इसके अलावा, कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान को कोयले से चलने वाली इंडस्ट्रीज़ के बारे में पब्लिक नोटिस जारी करने का आदेश दिया. इसने यह भी सुझाव दिया कि कोयले से चलने वाली इंडस्ट्रीज़ को दिल्ली-NCR से दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय मंत्रालयों से मांगा जवाब
बेंच ने केंद्रीय मंत्रालयों से जवाब मांगा और पूछा कि इन इंडस्ट्रीज़ को कैसे दूसरी जगह शिफ्ट किया जा सकता है, और क्या यह मुमकिन भी है? दिल्ली-NCR में गाड़ियों के ट्रैफिक से बढ़ते पॉल्यूशन का मुद्दा भी उठा. बेंच ने कहा कि इस मुद्दे की जांच करने की ज़रूरत है. कोर्ट ने अब इस मामले पर सुनवाई के लिए 12 मार्च की तारीख तय की है. सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित सरकारों से यह भी विचार करने को कहा कि NCR में एयर पॉल्यूशन को कैसे कम किया जा सकता है. धूल, खासकर कंस्ट्रक्शन और तोड़-फोड़ से, को कम किया जा सकता है. कोर्ट से इस बारे में भी पूछा गया.
कोयला आधारित इंडस्ट्रीज़ पर राज्यों को नोटिस जारी
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सरकारों को कोयला आधारित इंडस्ट्रीज़ से होने वाले प्रदूषण के बारे में एक पब्लिक नोटिस जारी करने का निर्देश दिया. बेंच ने कहा कि इस मामले पर विचार करने की ज़रूरत है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और विपुल पंचोली की बेंच ने कहा कि वे 12 मार्च को गाड़ियों से होने वाले एयर पॉल्यूशन की हद पर चर्चा करेंगे. CAQM (कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट) ने इस मामले पर एक रिपोर्ट पेश की थी. बेंच ने इस रिपोर्ट पर कई राज्य सरकारों से जवाब मांगा.
बेंच ने कहा कि वह चाहेगी कि राज्य सरकारें 12 मार्च तक उसे बताएं कि क्या एक्शन लिए जा सकते हैं. इसके अलावा, उसे इन सुझावों पर अपने विचार भी देने चाहिए. गौरतलब है कि दिल्ली में एयर पॉल्यूशन पर हर साल बहस शुरू होती है. दिवाली के आसपास पॉल्यूशन पीक पर होता है और फिर धीरे-धीरे कम होता है, और पिछले कई सालों से सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर हर साल सुनवाई कर रहा है, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला है.