Arvind Kejriwal in Delhi Excise Case: केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई की. इस दौरान उन्होंने एक तेज-तर्रार वकील की तरह अपनी दलीलें रखीं. उन्होंने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से कथित शराब घोटाले से जुड़े मामले से अलग होने की मांग की. साथ ही उनके सामने कई दलीलें भी पेश कीं. उन्होंने अदालत में सुनवाई के दौरान सेवा, इज्जत और धन्यवाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया. इसके बाद वे केजरीवाल बेहद तीखे नज़र आए. उन्होंने कहा कि उन्हें जज को लेकर मन में आशंकाएं हैं.
जस्टिस को कहा शुक्रिया
दरअसल अरविंद केजरीवाल ने अपने मामले में खुद ही दलील देने की मांग की. इस पर कोर्ट ने उन्हें बहस के लिए इजाज़त दी. इस पर अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को धन्यवाद कहा. अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘मैं इसके लिए आपका धन्यवाद करना चाहता हूं और निजी तौर पर आपकी इज्जत करता हूं.’ इस पर बेंच ने कहा कि हम आपकी सेवा के लिए ही हैं और ये सम्मान म्यूचुअल है. हमारा कुछ व्यक्तिगत नहीं है और आप अपनी दलीलें शुरू कर सकते हैं.
एक पक्ष के बावजूद सुनवाई कैसे हुई
अरविंद केजरीवाल ने दलीलें देते हुए कहा, ‘मैं आज एक आरोपी की तरह नहीं खड़ा हूं क्योंकि मुझे आरोपमक्त किया जा चुका है. 9 मार्च को जब इस मामले में सुनवाई की गई थी, तो सीबीआई के अलावा कोर्ट में कोई मौजूद नहीं था. कोर्ट ने 40 हजार पन्ने देखे, सबूत देखे और बिना किसी दूसरी पार्टी की मौजूदगी के इस कोर्ट ने ऑर्डर दे दिया कि ट्रायल कोर्ट का ऑर्डर कुछ मुद्दों पर सही नहीं है.’
‘मेरा दिल बैठ गया’
उन्होंने कहा कि ट्राल कोर्ट ने लगातार इसकी सुनवाई की और हाईकोर्ट ने उनके आदेश को 15 मिनट में खारिज कर दिया. ये ऑर्डर देखकर मेरा दिल बैठ गया. इसके कारण 11 मार्च को मैंने दिल्ली HC के चीफ जस्टिस को बेंच बदलने के लिए पत्र लिखा, जिसे खारिज कर दिया गया. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए कहा, ‘सुप्रीम कोर्च के जजमेंट रणजीत ठाकुर में ये लिखा है कि अगर किसी पार्टी के मन में शंका है कि वो जज बायस है, तो बेंच चेंज की जा सकती है. इस मामले में सीबीआई को पार्टी नहीं बनानी चाहिए.’
अरविंद केजरीवाल ने की मांग
इसके बाद अरविंद केजरीवाल ने सत्येंद्र जैन बनाम ईडी के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि इस मामले में जमानत की सुनवाई चल रही है. 6 दिन की सुनवाई के बाद आखिरी तारीख पर ईडी को आशंका हुई. जिला जज ने उसे स्वीकार किया और मामला इस अदालत में आ गया. हाईकोर्ट ने सुनवाई के लिए अनुमति दी. इस मामले में और मेरे मामले में काफी समानताएं हैं. मैं बस ये चाहता हूं कि ईडी की तरह मेरी बात भी मानी जाए और जज की बेंच बदली जाए.