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Home > राज्य > दिल्ली > दिल्ली का ग्राउंड वाटर हुआ टॉक्सिक! जानिए पानी‌ में यूरेनियम, लेड, नाइट्रेट की बढ़ी मात्रा आपकी सेहत के लिए कितनी खतरनाक?

दिल्ली का ग्राउंड वाटर हुआ टॉक्सिक! जानिए पानी‌ में यूरेनियम, लेड, नाइट्रेट की बढ़ी मात्रा आपकी सेहत के लिए कितनी खतरनाक?

Uranium in Delhi Groundwater: दिल्ली के ग्राउंडवाटर में जहरीले मेटल मिले है, जिसमें यूरेनियम, लेड, नाइट्रेट मौजूद है. इस रिपोर्ट के अनुसार कई कंटैमिनेंट पीने के पानी के राष्ट्रीय स्टैंडर्ड से ज़्यादा हैं. इसका असर सेहत पर क्या पड़ेगा. आइए जानें.

Written By: shristi S
Last Updated: November 29, 2025 20:52:44 IST

Uranium in Delhi Water: सेंट्र्ल ग्राउंड बोर्ड की इस महीने की रिपोर्ट में चिंताजनक खुलासा हुआ है, दरअसल दिल्ली के ग्राउंडवाटर में जहरीले मेटल मिले है, जिसमें यूरेनियम, लेड, नाइट्रेट मौजूद है. इस रिपोर्ट के अनुसार  कई कंटैमिनेंट पीने के पानी के राष्ट्रीय स्टैंडर्ड से ज़्यादा हैं. दिल्ली के ग्राउंडवाटर में भारी मेटल की मिलावट देश में सबसे गंभीर है, सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की सालाना रिपोर्ट में कहा गया है कि राजधानी में भारत के कुछ सबसे ज़्यादा यूरेनियम, लेड, नाइट्रेट, फ्लोराइड और खारेपन से जुड़े इंडिकेटर हैं, जो बोरवेल और हैंड पंप के पानी पर निर्भर लोगों के लिए लंबे समय तक सेहत के लिए खतरा पैदा करते हैं.  शहर से लिए गए सैंपल के एनालिसिस के बाद “बड़ी चिंताएं सामने आई हैं”, जबकि यह भी बताया गया है कि इनमें से कई कंटैमिनेंट पीने के पानी के राष्ट्रीय स्टैंडर्ड से ज़्यादा हैं.

इससे सेहत पर क्या असर पड़ेगा?

दिल्ली के एक्वीफ़र्स में पाए गए सबसे खतरनाक टॉक्सिन्स में से एक, लेड, एक न्यूरोटॉक्सिन है जो बच्चों के कॉग्निटिव डेवलपमेंट को कम करता है, ब्लड प्रेशर बढ़ाता है, किडनी के काम पर असर डालता है और इसे संभावित ह्यूमन कार्सिनोजेन माना जाता है, जिससे कम कंसंट्रेशन भी असुरक्षित हो जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, प्री-मॉनसून सीज़न में भारत में लेड-कंटैमिनेटेड ग्राउंडवॉटर सैंपल्स का सबसे ज़्यादा हिस्सा दिल्ली में था 9.3% सैंपल्स ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) की लिमिट्स से ज़्यादा थे, जो असम (3.23%) और राजस्थान (2.04%) से कहीं ज़्यादा था.

किडनी डैमेज का रिस्क हाई हो जाता है

रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब और हरियाणा के बाद देश में यूरेनियम के कंटैमिनेटेड सैंपल्स का तीसरा सबसे ज़्यादा हिस्सा दिल्ली में है. यूरेनियम का किडनी डैमेज और कार्सिनोजेनिक रिस्क से अच्छी तरह से जुड़ा होना साबित हो चुका है. दिल्ली में 13-15% सैंपल्स में यूरेनियम का लेवल तय लिमिट्स से ज़्यादा था. रिपोर्ट में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान के कुछ हिस्सों और उत्तर प्रदेश समेत नॉर्थ-वेस्ट बेल्ट को मुख्य यूरेनियम हॉटस्पॉट बताया गया है. दिल्ली के ग्राउंडवाटर में पाए जाने वाले नाइट्रेट लेवल जैसे दूसरे कंटैमिनेंट्स भी हेल्थ के लिए खतरा पैदा करते हैं.

रिपोर्ट में बताया गया है कि नाइट्रेट का ज़्यादा होना ज़्यादातर इंसानों की वजह से, खासकर खेती के तरीकों और गलत तरीके से कचरा फेंकने की वजह से था, जबकि फ्लोराइड का ज़्यादा कंसंट्रेशन ज़्यादातर जियोजेनिक (कुदरती तौर पर होने वाला) था, जो ग्रेनाइट और नीसिक फॉर्मेशन जैसे क्रिस्टलाइन और हार्ड रॉक एक्विफर में पानी-चट्टान के इंटरेक्शन से जुड़ा था.

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दिल्ली का ग्राउंड वाटर हुआ टॉक्सिक! जानिए पानी‌ में यूरेनियम, लेड, नाइट्रेट की बढ़ी मात्रा आपकी सेहत के लिए कितनी खतरनाक?

Uranium in Delhi Groundwater: दिल्ली के ग्राउंडवाटर में जहरीले मेटल मिले है, जिसमें यूरेनियम, लेड, नाइट्रेट मौजूद है. इस रिपोर्ट के अनुसार कई कंटैमिनेंट पीने के पानी के राष्ट्रीय स्टैंडर्ड से ज़्यादा हैं. इसका असर सेहत पर क्या पड़ेगा. आइए जानें.

Written By: shristi S
Last Updated: November 29, 2025 20:52:44 IST

Uranium in Delhi Water: सेंट्र्ल ग्राउंड बोर्ड की इस महीने की रिपोर्ट में चिंताजनक खुलासा हुआ है, दरअसल दिल्ली के ग्राउंडवाटर में जहरीले मेटल मिले है, जिसमें यूरेनियम, लेड, नाइट्रेट मौजूद है. इस रिपोर्ट के अनुसार  कई कंटैमिनेंट पीने के पानी के राष्ट्रीय स्टैंडर्ड से ज़्यादा हैं. दिल्ली के ग्राउंडवाटर में भारी मेटल की मिलावट देश में सबसे गंभीर है, सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की सालाना रिपोर्ट में कहा गया है कि राजधानी में भारत के कुछ सबसे ज़्यादा यूरेनियम, लेड, नाइट्रेट, फ्लोराइड और खारेपन से जुड़े इंडिकेटर हैं, जो बोरवेल और हैंड पंप के पानी पर निर्भर लोगों के लिए लंबे समय तक सेहत के लिए खतरा पैदा करते हैं.  शहर से लिए गए सैंपल के एनालिसिस के बाद “बड़ी चिंताएं सामने आई हैं”, जबकि यह भी बताया गया है कि इनमें से कई कंटैमिनेंट पीने के पानी के राष्ट्रीय स्टैंडर्ड से ज़्यादा हैं.

इससे सेहत पर क्या असर पड़ेगा?

दिल्ली के एक्वीफ़र्स में पाए गए सबसे खतरनाक टॉक्सिन्स में से एक, लेड, एक न्यूरोटॉक्सिन है जो बच्चों के कॉग्निटिव डेवलपमेंट को कम करता है, ब्लड प्रेशर बढ़ाता है, किडनी के काम पर असर डालता है और इसे संभावित ह्यूमन कार्सिनोजेन माना जाता है, जिससे कम कंसंट्रेशन भी असुरक्षित हो जाता है. रिपोर्ट के मुताबिक, प्री-मॉनसून सीज़न में भारत में लेड-कंटैमिनेटेड ग्राउंडवॉटर सैंपल्स का सबसे ज़्यादा हिस्सा दिल्ली में था 9.3% सैंपल्स ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) की लिमिट्स से ज़्यादा थे, जो असम (3.23%) और राजस्थान (2.04%) से कहीं ज़्यादा था.

किडनी डैमेज का रिस्क हाई हो जाता है

रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब और हरियाणा के बाद देश में यूरेनियम के कंटैमिनेटेड सैंपल्स का तीसरा सबसे ज़्यादा हिस्सा दिल्ली में है. यूरेनियम का किडनी डैमेज और कार्सिनोजेनिक रिस्क से अच्छी तरह से जुड़ा होना साबित हो चुका है. दिल्ली में 13-15% सैंपल्स में यूरेनियम का लेवल तय लिमिट्स से ज़्यादा था. रिपोर्ट में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान के कुछ हिस्सों और उत्तर प्रदेश समेत नॉर्थ-वेस्ट बेल्ट को मुख्य यूरेनियम हॉटस्पॉट बताया गया है. दिल्ली के ग्राउंडवाटर में पाए जाने वाले नाइट्रेट लेवल जैसे दूसरे कंटैमिनेंट्स भी हेल्थ के लिए खतरा पैदा करते हैं.

रिपोर्ट में बताया गया है कि नाइट्रेट का ज़्यादा होना ज़्यादातर इंसानों की वजह से, खासकर खेती के तरीकों और गलत तरीके से कचरा फेंकने की वजह से था, जबकि फ्लोराइड का ज़्यादा कंसंट्रेशन ज़्यादातर जियोजेनिक (कुदरती तौर पर होने वाला) था, जो ग्रेनाइट और नीसिक फॉर्मेशन जैसे क्रिस्टलाइन और हार्ड रॉक एक्विफर में पानी-चट्टान के इंटरेक्शन से जुड़ा था.

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