सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में रेलवे विभाग के टॉक्सिक वर्क कल्चर को दिखाया गया है. वीडियो में एक लोको पायलट है, जो अपने अफसर से अपनी स्वास्थ्य समस्या के बारे में बताता है.
लोको पायलट ने बताया कि उसका पाइल्स (बवासीर) का ऑपरेशन हुआ है, जिस वजह से उसको काम करने में असहजता होती है. लोको पायलट के अफसर जब समस्या बताने के बाद भी नहीं समझते तो उसने ऐसी हरकत की कि वहां मौजूद हर इंसान हक्का बक्का रह गया.
वायरल वीडियो की कहानी
वीडियो में दिखाया गया है कि एक लोको पायलट, जिन्होंने हाल ही में पाइल्स का ऑपरेशन करवाया था, उन्हें ड्यूटी पर लौटना पड़ता है. वो अपने अफसर से बताते हैं कि उन्हें बैठने में असुविधा होती है और डॉक्टर ने अभी आराम करने को कहा है, लेकिन उनके अफसर उनकी बात भी सुनते. इसके बाद जो होता है, उसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी.
वीडियो में दिखता है कि लोको पायलट अपनी पैंट खोलकर अपने अधिकारी को दिखाते हैं, कि उनका हाल ही में ऑपरेशन हुआ है. उनके इस कदम के बाद वहां मौजूद हर कोई हक्का-बक्का रह जाता है. दरअसल, लोको पायलट्स को लंबे समय तक बैठे रहना पड़ता है, जो पाइल्स जैसी बीमारियों को न्योता देता है. रेलवे के सख्त नियमों के कारण वे अक्सर स्वास्थ्य की अनदेखी करते हैं. यह वीडियो उसी कड़वी सच्चाई को उजागर करता है. ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन (AILRSA) के नेताओं ने कहा कि अनुसूचित जनजाति समुदाय से संबंध रखने वाले लोको पायलट राजेश मीना द्वारा उठाया गया हताशा भरा कदम शुरू में मुख्य क्रू कंट्रोलर (CCC) रतन कुमार को उन्हें आराम की छुट्टी देने के लिए राजी नहीं कर पाया.
तानाशाही अफसर!
ऐसे लोग कुर्सी के लायक नहीं होते।पाइल्स की सर्जरी के बाद मरीज को 10-15 दिन का आराम जरूरी है, लम्बा समय बैठना वर्जित है। नहीं तो घाव नहीं भरेगा।
लोको pilot का काम ही बैठने का है और बहुत ज़िम्मेदारी वाला काम है ट्रेन चलाना।@RailMinIndia
pic.twitter.com/8uVGW9rTiJ— Dr. B L Bairwa MS, FACS (@Lap_surgeon) March 4, 2026
ऑल इंडिया लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन ने किया सहयोग
यूनियन के अनुसार, मीना ने बाद में एक सामुदायिक यूनियन नेता से संपर्क किया, जिन्होंने हस्तक्षेप किया और डिवीजन के वरिष्ठ अधिकारियों से बात की. इसके बाद, मीना को अंततः स्वास्थ्य लाभ के लिए छुट्टी दे दी गई. AILRSA के महासचिव केसी जेम्स ने इस स्थिति की निंदा करते हुए कहा कि यह शर्मनाक है कि एक लोको पायलट को अपनी मेडिकल स्थिति साबित करने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी के सामने अपनी पैंट उतारनी पड़ी, और फिर भी उसे छुट्टी देने से इनकार कर दिया गया.
उन्होंने आगे कहा, “हम लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए दिन-रात काम करते हैं ताकि वे अपने रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों के साथ त्योहार मना सकें. क्या रेलवे प्रशासन से हमें इसी तरह के व्यवहार की उम्मीद करनी चाहिए?”
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
इस वीडियो ने एक्स (ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर तहलका मचा दिया. एक यूजर ने कहा, “लोको पायलट्स की जिंदगी खतरे से भरी है, ऊपर से ये बीमारियां.” दूसरे ने रेल मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की. कईयों ने इसे प्राइवेसी का उल्लंघन बताते हुए वीडियो हटाने की बात कही. नेटिजन्स ने कमेंट्स में लिखा, “ट्रेन चलाने वाले को आराम कौन देगा?” और “रेलवे कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर ध्यान दो.”
रेलवे ने गठित की जांच कमेटी
मामले के तूल पकड़ने के बाद उत्तर रेलवे प्रशासन ने तीन अधिकारियों की एक जांच कमेटी गठित कर दी है. बताया जा रहा है कि लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन ने इस घटना का वीडियो डीआरएम सुनील कुमार वर्मा को भी भेजा था. प्रारंभिक स्तर पर कार्रवाई न होने के बाद यह वीडियो देशभर में साझा किया गया. रेलवे अधिकारियों के अनुसार, जांच कमेटी पूरे मामले की पड़ताल कर रिपोर्ट देगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.
पाइल्स एक आम समस्या है, लेकिन लोको पायलट्स जैसे प्रोफेशन में यह जानलेवा साबित हो सकती है. लंबे ड्यूटी शेड्यूल में ब्रेक और स्वास्थ्य जांच जरूरी हैं. चिकित्सकों का भी ये मानना है कि पाइल्स की सर्जरी के बाद मरीज को 10-15 दिन का आराम जरूरी है, लम्बा समय बैठना वर्जित है. नहीं तो घाव नहीं भरेगा.