Faridabad Latest News: हरियाणा के फरीदाबाद से एक बेहद ही अनोखी खबर सामने आई है, जिसने समाज में इंसानियत और ईमानदारी की जड़ों को पहले के मुताबिक और भी ज्यादा मजबूत कर दिया है. दरअसल, ज्यादातर लोग कबाड़ को बेकार और मूल्यहीन समझकर बेच देते हैं, लेकिन कभी-कभी अनजाने में कीमती चीजें भी कचरे के साथ चली जाती हैं. लेकिन, ऐसा ही कुछ हरियाणा के फरीदाबाद के एक परिवार के साथ हुआ, जिनके पुरखों की निशानियां और मेहनत की कमाई यानी करीब 100 ग्राम सोने के गहने गलती से कबाड़ के साथ बाहर चले गए थे.
तो वहीं, दूसरी तरफ जब परिवार को अपनी इस बड़ी चूक का अहसास हुआ, तो उनकी उम्मीदें लगभग टूट चुकी थीं. यहां तक की उन्हें लगा कि अब वो गहने कभी वापस नहीं मिलेंगे. लेकिन उनकी किस्मत अच्छी थी कि वह कबाड़ ‘खान साहब’ नाम के एक ईमानदार व्यापारी के पास पहुंचा था. जैसे ही खान साहब ने जब कबाड़ की छंटनी शुरू की, तो उन्हें वह गहनों का डिब्बा मिला. इतने सोने को देखकर किसी के भी मन में लालच आ सकता था, लेकिन खान साहब ने ईमानदारी का रास्ता चुना और तुरंत उस परिवार से संपर्क करने की कोशिश की.
लालच पर भारी पड़ी इंसानियत
खान साहब ने बिना किसी देरी के उस परिवार को ढूंढ निकाला और उनके 100 ग्राम सोने के गहने पूरी सुरक्षा के साथ उन्हें वापस लौटा दिए. तो वहीं, गहने वापस पाकर परिवार की आंखों में खुशी के आंसू थे और उन्होंने खान साहब का धन्यवाद भी किया. आज के दौर में जहां लोग छोटी-छोटी चीजों के लिए बेईमानी पर उतारू हो जाते हैं, वहीं खान साहब की इस ईमानदारी ने यह साबित कर दिया कि आज भी इस दुनिया में ईमानदार लोगों की कमी नहीं है.
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कबाड़ी ने 6 माह बाद लौटाए 15 लाख के गहने
हरियाणा के फरीदाबाद से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने इंसानियत और ईमानदारी पर हमारे भरोसे को और मजबूत कर दिया है.
एक कबाड़ व्यापारी ‘खान साहब’ ने ईमानदारी का परिचय देते हुए एक परिवार के खोए हुए 100 ग्राम सोने के गहने वापस लौटा दिए. pic.twitter.com/kMwQxBqDgX
— Dr Monika Singh (@Dr_MonikaSingh_) February 19, 2026
लोगों ने की खान साहब की जमकर सरहाना
इस घटना की चर्चा अब पूरे फरीदाबाद में हो रही है और लोग खान साहब के इस कार्य की जमकर तारीफ कर रहे हैं. तो वहीं, पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने भी उनकी इस ईमानदारी को समाज के लिए एक प्रेरणा बताया है. दरअसल, यह कहानी हमें सिखाती है कि ईमानदारी का मोल किसी भी सोने या चांदी से कहीं बढ़कर होता है. खान साहब ने न सिर्फ परिवार को उनके गहने लौटाए, बल्कि समाज को ईमानदारी का एक उनोखा पाठ भी पढ़ाया है.