हरियाणा न्यूज: हरियाणा के पलवल से बेहद दुखद खबर सुनने को मिल रही है. यहां के छायंसा गांव में 15 दिनों में पांच बच्चों समेत कम से कम 12 लोगों की जान चली गई. मृतकों में 5 स्कूली बच्चे भी शामिल हैं. इस घटना के बाद से ही गांव में मातम पसरा हुआ है. लगातार बीमार होने से ग्रामीणों में डर का माहौल भी है. गंदा पानी पीने से फैली बीमारी ने सभी की चिंता बड़ा दी है. हेल्थ डिपार्टमेंट की टीम ने भी मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है. ग्रामीणों ने बताया कि शुरूआत में लोग जब बीमार हुए तो उन्हें उल्टी, दस्त, बुखार की शिकायत बताई गई.
हेल्थ अधिकारियों ने कहा कि जनवरी के आखिर और फरवरी के बीच हुई मौतें लिवर से जुड़ी गंभीर दिक्कतों से जुड़ी थीं. शुरुआती जांच में वायरल हेपेटाइटिस और पानी में गंदगी की संभावना की ओर इशारा किया गया था. 31 जनवरी को छायंसा गांव में सबसे पहले पीलिया से जुड़ी मौतों की खबर आई थी. छायंसा गांव में 5,700 लोग और 865 घर हैं. एक दिन बाद रैपिड रिस्पॉन्स टीम तैनात की गई. इसके बाद मेडिकल कैंप, घर-घर सर्वे और गांववालों की स्क्रीनिंग की गई.
यह है मौतों की वजह
सात मौतें 27 जनवरी से 11 फरवरी के बीच हुईं. चार मौतें एक्यूट हेपेटाइटिस या लिवर फेलियर की वजह से हुईं. मरने वालों की उम्र नौ से 65 साल के बीच थी. बाद में हुई दूसरी मौतों की जांच की जा रही है. ज्यादातर मरीजों ने हालत बिगड़ने से पहले बुखार, पेट दर्द, उल्टी और पीलिया की शिकायत की थी. ये मौतें पिछले महीने मध्य प्रदेश के इंदौर में जहरीले पानी से 16 लोगों की मौत के कुछ हफ़्ते बाद हुई हैं, जिससे पूरे देश में गंदे पीने के पानी को लेकर चिंता बढ़ गई है.
स्क्रीनिंग और टेस्टिंग जारी
पलवल के चीफ़ मेडिकल ऑफ़िसर सतिंदर वशिष्ठ ने कहा कि बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग और टेस्टिंग चल रही है. उन्होंने कहा कि अब तक मरने वालों के करीबी लोगों समेत लगभग 1,500 लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है. लगभग 800 आउटपेशेंट कंसल्टेशन किए गए हैं और हेपेटाइटिस A, B, C, और E के लिए ब्लड सैंपल टेस्ट किए गए हैं. 210 लोगों के ब्लड एनालिसिस में हेपेटाइटिस B के दो और हेपेटाइटिस C के नौ पॉज़िटिव केस मिले. सभी सैंपल हेपेटाइटिस A और E के लिए नेगेटिव पाए गए. स्क्रब टाइफस के रिज़ल्ट का इंतज़ार है. तीन मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनकी हालत स्थिर बताई गई है.
सैंपल हो गए फेल
अब तक इकट्ठा किए गए 107 घरेलू पानी के सैंपल में से 23 क्वालिटी चेक में फेल हो गए. इससे पता चलता है कि उनमें बैक्टीरियल कंटैमिनेशन और क्लोरीनेशन ठीक से नहीं था. टेस्टिंग के दूसरे राउंड में स्टोरेज टैंक में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए. सुधार के कदम उठाए जाने से पहले दर्जनों सैंपल में क्लोरीन नहीं पाया गया. लोग पानी की सप्लाई, अंडरग्राउंड स्टोरेज टैंक और टैंकरों पर निर्भर हैं. रिवर्स ऑस्मोसिस-ट्रीटेड पानी आस-पास के इलाकों से लाया गया है. अंडरग्राउंड टैंकों को रेगुलर रीफिल करने और खराब डिसइंफेक्शन से पानी से होने वाले इन्फेक्शन का डर बढ़ गया है.
हेल्पलाइन नंबर जारी
अधिकारियों ने कहा कि लेप्टोस्पायरोसिस टेस्ट नेगेटिव आए और जानवरों के डॉक्टरों की जांच में जानवरों से जुड़े इन्फेक्शन की बात से इनकार किया गया. बचाव के तौर पर पानी साफ करने के लिए करीब 15,000 हैलोजन टैबलेट बांटी गई और एक हेल्पलाइन (01275-240022) शुरू की गई है. एक दूसरे हेल्थ अधिकारी ने कहा कि जांच जारी है. हम मौतों का सही कारण पता लगाने के लिए मेडिकल, एनवायरनमेंटल और बिहेवियरल फैक्टर की जांच कर रहे हैं. अधिकारी ने कहा कि स्थिति स्थिर होने तक निगरानी और मेडिकल कैंप जारी रहेंगे.