Bank Fraud News: इन दिनों IDFC First Bank की चर्चा काफी तेज है. मंगलवार को बैंक ने बताया कि IDFC First Bank द्वारा उन ग्राहकों को 590 करोड़ रुपये दिए गए हैं, जिनके साथ चंदीगढ़ की ब्रांच में फ्रॉड हुआ था. दरअसल, शहर के विकास के लिए रखे गए चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (CSCL) पर घोटाले की बात सामने आ रही है. हालांकि, एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने सोमवार देर शाम सेक्टर 32 ब्रांच से दो लोगों को हिरासत में लेने की जानकारी मिली है.
मामला तब उजागर हुआ जब नगर निगम द्वारा फंड ट्रांसफर की प्रक्रिया के दौरान बैंक रसीदों की जांच की जा रही थी. इसके बाद फर्जीवाड़े का पूरा मामला खुलकर सामने आया. चलिए जानते हैं पूरा मामला.
बैंक मैनेजर ने बनाई फर्जी रसीदें
IDFC First Bank के फ्रॉड मामले में बैंक मैनेजर ने फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें (FDRs) जारी कर दीं. दरअसल, यह फंड चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से नगर निगम को ट्रांसफर किया जाना था. इसी सिलसिले में IDFC First Bank में एक खास खाता खोला गया था. लेकिन, बैंक मैनेजर ने फंड जमा करने के बदले में नगर निगम को फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें जारी कर दीं. जिसके बाद निगम द्वारा रसीदों की वेरिफिकेशन प्रक्रिया कराई गई. मामला खुलकर सामने आने लगा और पता चला कि 116.84 करोड़ की ये सभी FD पूरी तरह से फर्जी थीं. बैंक के खाते या रिकॉर्ड में इस तरह की कोई ट्रांजेक्शन या अमाउंट दर्ज नहीं था.
पुलिस ने आरोपियों पर कसा शिकंजा
मामला सामने आने के बाद नगर निगम चंडीगढ़ की शिकायत पर पुलिस ने मामले को तुरंत संज्ञान में लेते हुए FIR दर्ज कर ली है. पुलिस द्वारा धोखाधड़ी की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. बैंक मैनेजर पर कार्रवाई होने के साथ ही साथ अन्य अधिकारियों से भी पूछताछ की जा रही है. बैंक के मुताबिक उन्होंने हरियाणा सरकार के साथ कुल 645 करोड़ रुपये का सेटलमेंट कर लिया है.