Haryana Uchana Kalan News: आपने अक्सर सुना होगा कि अक्सर लोगों को बेटा पसंद होता है. अगर उसको बार-बार बेटियां हो जाती है तो बेटों के इंतजार में कई बच्चों को जन्म दे देती हैं. हरियाणा के जिंद से कुछ दिनों पहले 10 बेटियों के बाद बेटे का जन्म हुआ था. अब एक ऐसा ही मामला हरियाणा के उचाना कलां से सामने आया है. जहां 9 बेटियों के बाद बेटे का जन्म होने के बाद पूरा परिवार खुश हो गया. पूरे हॉस्पिटल में मिठाइयां बांटी गईं.
उचाना कलां के रहने वाले सुरेंद्र के परिवार में शादी के 24 साल और 9 बेटियों के बाद बेटे का जन्म हुआ है. जैसे ही बेटे के जन्म की खबर सिविल अस्पताल पहुंची, परिवार और रिश्तेदार खुशी से झूम उठे. अस्पताल परिसर में मिठाइयां बांटी गईं और जश्न मनाया गया.
सुरेंद्र की पत्नी रितु ने 9 बेटियों के बाद बेटे को दिया जन्म (Surendra’s wife, Ritu, gave birth to a son after having nine daughters)
सुरेंद्र की पत्नी रितु ने 9 बेटियों के बाद दसवें बच्चे के रूप में बेटे को जन्म दिया. परिवार वालों ने बताया कि सब भगवान से प्रार्थना कर रहे थे कि इस बार बेटा हो, ताकि बेटियों को भाई मिल सके. इसके अलावा, परिवार के दूसरे भाई की भी तीन बेटियां हैं, इसलिए अब कुल 12 बहनों को भाई मिला है. इनमें से दो लड़कियों की शादी पिछले नवंबर में हुई थी. सबसे छोटी बेटी 3 साल की है और सबसे बड़ी 21 साल की है. बेटियों के नाम कल्पना, आरती, भारती, खुशी, मानसू, रजनी, राजीव, काफी और माफी हैं.
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— India News Haryana (@indianews_hr) January 20, 2026
परिवार ने बेटे का नाम रखा दिलखुश (The family named their son Dilkhush)
परिवार और रिश्तेदार इसे भगवान की कृपा बता रहे हैं. बुआ ने एलान किया कि बेटे का नाम ‘दिलखुश’ रखा जाएगा, और कहा कि भगवान ने सबका दिल खुश कर दिया है. सिविल अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, 38 साल की रितु की डिलीवरी नॉर्मल हुई और मां और बेटा दोनों स्वस्थ हैं. डॉक्टरों ने बताया कि महिला को खास निगरानी में रखा गया था क्योंकि उनकी पहले ही नौ डिलीवरी हो चुकी थीं.
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बेटे की चाहत में एक महिला दसवीं बार बनी मां (A woman becomes a mother for the tenth time, hoping for a son)
हालांकि, यह खुशी का माहौल एक सवाल भी छोड़ जाता है कि क्या आज भी समाज में बेटी का जन्म स्वीकार्य नहीं है? एक तरफ सरकार “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे अभियान चला रही है, वहीं दूसरी तरफ एक महिला को बेटे की चाह में 10 बार मां बनना पड़ा. महिला की सभी दस डिलीवरी नॉर्मल थीं. यह खबर साफ दिखाती है कि आज के जमाने में भी बेटे और बेटी में भेदभाव करने वाली सोच पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.