Jodidara Marriage: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में दो भाइयों से शादी करके सुनीता नाम की महिला चर्चा में आई थी. बीते साल सुनीता ने दो सगे भाइयों और उसके पति प्रदीप और कपिल नेगी से जोड़ीदार प्रथा के तहत शादी की थी. अब उन्होंने गुड न्यूज़ शेयर की है. दरअसल सुनीता मां बनने वाली हैं लेकिन बच्चे की खबर आते ही हर किसी के मन में एक सवाल है कि बच्चे का पिता कौन कहलाएगा? बच्चे के जरूरी दस्तावेजों जैसे बर्थ सर्टिफिकेट, आधार कार्ड और स्कूल में बच्चे के पिता का नाम की जगह किसका नाम लिखा जाएगा.
क्या है जोड़ीदार प्रथा?
बता दें कि हट्टी जनजाति में पुराने समय की एक प्रथा है, जिसके तहत एक महिला की शादी एक ही परिवार के दो या उससे ज्यादा भाइयों से विवाह की परंपरा है. इस परंपरा को बहुतपति प्रथा या पॉलीएंड्री कहा जाता है. हिमाचल प्रदेश के पूर्व सीएम वाईएस परमार ने इस परंपरा पर एक किताब लिखी थी. उस किताब में उन्होंने इस प्रकार की शादियों के ऐतिहासिक कारणों और तौर-तरीकों के बारे में बताया था. उन्होंने इस विषय पर ही पीएचडी भी की थी. काफी रिसर्च करने के बाद उन्होंने पॉलीएंड्री इन द हिमालयाज नामक किताब लिखी.
बहुतपति प्रथा के तहत क्यों होती थी शादी?
हिमाचल प्रदेश के पूर्व सीएम वाईएस परमार की किताब पॉलीएंड्री इन द हिमालयाज में बताया गया कि पुराने समय में अधिकतर गरीब परिवारों में शादी हुआ करती थी. वे अपनी संपत्ति का बंटवारा नहीं करना चाहते थे, जिसके कारण बहुतपति प्रथा चलती थी. इस प्रथा को अपनाने वालों का मानना था कि किसी परिवार में भाई और बच्चों के बीच बंटवारा होने से उनकी शक्ति कमजोर हो जाती है.
कैसे तय होता है बच्चे का नाम?
हिंदू विवाह अधिनियम 1955 और विशेष विवाह अधिनियम 1954 के तहत इस तरह के विवाह को कानूनी मान्यता नहीं दी गई है. सभी डॉक्यूमेंट्स में बड़े भाई का नाम ही पिता के तौर पर दर्ज कराया जाएगा. इस तरह की शादियों में बच्चे का असल पिता कोई भी हो लेकिन कानूनी रूप से बड़े भाई का नाम ही दर्ज कराया जाता है.