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भूस्खलन-भूकंप से नहीं जाएगी किसी की जान, IIT के छात्रों ने किया कमाल; पहले ही मिलेगा खतरे का सिग्नल

Earthquake Signal: भूकंप और भूस्खलन से बेतहाशा नुकसान होता है. लेकिन अब इसके नुकसान से बचने के लिए आईआईटी के छात्रों ने एक ऐसा डिवाइस बनाया है. जिससे आपदा से पहले ही आपको चेतावनी मिल जाएगी.

Written By: Sohail Rahman
Last Updated: April 2, 2026 13:27:12 IST

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Himachal News: पहाड़ी राज्यों में अब भूस्खलन और भूकंप के कारण बेकसूर लोगों की जान नहीं जाएगी. आईआईटी मंडी के ट्रेनी इंजीनियरों ने एक ऐसा डिवाइस बनाया है जो इन दोनों आपदाओं के बारे में समय पर चेतावनी दे सकता है. अगर घुमावदार सड़कों पर चलते हुए गाड़ियों के सामने भूस्खलन होता है, तो काफी दूर से ही एक लाल बत्ती चमकने लगेगी और एक हूटर बजने लगेगा.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि खतरा आने से पहले ही आपको उसके बारे में अलर्ट मिल जाएगा. भूस्खलन वाली जगह से 100 से 200 मीटर पहले ही आपको चेतावनी का सिग्नल मिल जाएगा.

इस सिस्टम का क्या नाम रखा है?

खतरा आने से पहले ही आपको उसके बारे में अलर्ट मिल जाएगा. भूस्खलन वाली जगह से 100 से 200 मीटर पहले ही आपको चेतावनी का सिग्नल मिल जाएगा. इन ट्रेनी इंजीनियरों ने इस लाल-बत्ती सिस्टम का नाम ‘Landslide Red Light and Hooter Alert System’ रखा है. ₹16,500 की लागत से बनाया गया यह डिवाइस हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों की सड़कों पर बहुत असरदार साबित हो सकता है.

आईआईटी इंजीनियरों ने इस डिवाइस को मंडी-बजौरा हाईवे (कटौला के रास्ते) पर स्थित गढ़पा पहाड़ी के पास लगाया है, यह इलाका भूस्खलन के लिहाज़ से संवेदनशील है. इस डिवाइस के नतीजे काफी सफल रहे हैं. आईआईटी प्रशासन ने अब इस आविष्कार का पेटेंट करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

प्रोफेसर वरुण दत्त ने क्या कहा?

आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर वरुण दत्त ने बताया कि इस सिस्टम को भूस्खलन की आशंका वाले इलाकों में लगाने के लिए डिज़ाइन किया गया है. इसमें पांच सेंसर नोड्स का एक नेटवर्क लगा है. इस डिवाइस में हलचल का पता लगाने के लिए एक एक्सेलेरोमीटर, गीली मिट्टी का वज़न मापने के लिए एक फ़ोर्स सेंसर और नमी का स्तर जांचने के लिए एक मॉइस्चर सेंसर लगा है.

हर सेंसर नोड मिट्टी की हलचल, नमी की मात्रा और मिट्टी पर पड़ने वाले दबाव से जुड़ा डेटा रिकॉर्ड करता है. जमीन में जरा सी भी हलचल के बाद एक्सेलेरोमीटर लाल बत्ती को चालू कर देता है और हूटर अपने आप बजने लगता है.

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Written By: Sohail Rahman
Last Updated: April 2, 2026 13:27:12 IST

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Himachal News: पहाड़ी राज्यों में अब भूस्खलन और भूकंप के कारण बेकसूर लोगों की जान नहीं जाएगी. आईआईटी मंडी के ट्रेनी इंजीनियरों ने एक ऐसा डिवाइस बनाया है जो इन दोनों आपदाओं के बारे में समय पर चेतावनी दे सकता है. अगर घुमावदार सड़कों पर चलते हुए गाड़ियों के सामने भूस्खलन होता है, तो काफी दूर से ही एक लाल बत्ती चमकने लगेगी और एक हूटर बजने लगेगा.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि खतरा आने से पहले ही आपको उसके बारे में अलर्ट मिल जाएगा. भूस्खलन वाली जगह से 100 से 200 मीटर पहले ही आपको चेतावनी का सिग्नल मिल जाएगा.

इस सिस्टम का क्या नाम रखा है?

खतरा आने से पहले ही आपको उसके बारे में अलर्ट मिल जाएगा. भूस्खलन वाली जगह से 100 से 200 मीटर पहले ही आपको चेतावनी का सिग्नल मिल जाएगा. इन ट्रेनी इंजीनियरों ने इस लाल-बत्ती सिस्टम का नाम ‘Landslide Red Light and Hooter Alert System’ रखा है. ₹16,500 की लागत से बनाया गया यह डिवाइस हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों की सड़कों पर बहुत असरदार साबित हो सकता है.

आईआईटी इंजीनियरों ने इस डिवाइस को मंडी-बजौरा हाईवे (कटौला के रास्ते) पर स्थित गढ़पा पहाड़ी के पास लगाया है, यह इलाका भूस्खलन के लिहाज़ से संवेदनशील है. इस डिवाइस के नतीजे काफी सफल रहे हैं. आईआईटी प्रशासन ने अब इस आविष्कार का पेटेंट करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

प्रोफेसर वरुण दत्त ने क्या कहा?

आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ कंप्यूटिंग एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर वरुण दत्त ने बताया कि इस सिस्टम को भूस्खलन की आशंका वाले इलाकों में लगाने के लिए डिज़ाइन किया गया है. इसमें पांच सेंसर नोड्स का एक नेटवर्क लगा है. इस डिवाइस में हलचल का पता लगाने के लिए एक एक्सेलेरोमीटर, गीली मिट्टी का वज़न मापने के लिए एक फ़ोर्स सेंसर और नमी का स्तर जांचने के लिए एक मॉइस्चर सेंसर लगा है.

हर सेंसर नोड मिट्टी की हलचल, नमी की मात्रा और मिट्टी पर पड़ने वाले दबाव से जुड़ा डेटा रिकॉर्ड करता है. जमीन में जरा सी भी हलचल के बाद एक्सेलेरोमीटर लाल बत्ती को चालू कर देता है और हूटर अपने आप बजने लगता है.

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