Fake Arms License Scam: भिंड जिले के कलेक्ट्रेट में संचालित आर्म्स विभाग में क्लर्क के तौर पर कार्यरत मधुबाला मौर्य और चपरासी रामसेवक कोरकू फर्जी आर्म्स लाइसेंस का गिरोह चला रहे थे. जिसका खुलासा करते हुए पुलिस ने इस मामले में अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है.
मध्य प्रदेश के भिंड में कलेक्ट्रेट में क्लर्क और चपरासी मिलकर चला रहे थे फर्जी आर्म्स लाइंसेस का गैंग
Fake Arms Licence Case: भिंड जिले में नकली हथियारों के लाइंसेस के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. नकली हथियारों के लाइसेंस बनाने वाले एक गिरोह के तार उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और जम्मू तक फैले होने की बात सामने आ रही है. पुलिस ने इस मामले में अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
इस पूरे गिरोह की सरगना कलेक्ट्रेट के आर्म्स शाखा में पदस्थ क्लर्क मधुबाला मौर्य और चपरासी रामसेवक कोरकू ही थे. जानकारी के अनुसार, ये दोनों ही पूरा रैकेट चला रहे थे. पुलिस लगातार इस मामले की जांच कर रही है. और इस मामले के परत-दर-परत खुलते जा रहे हैं.
कलेक्ट्रेट के भीतर काम करने वाले अन्य कर्मचारियों की भूमिका की भी फिलहाल जांच चल रही है. पुलिस अधीक्षक डॉ. असित यादव के निर्देशों के बाद जांच शुरू हुई है.उनके ही आदेश पर अटेर के SDOP रविंद्र बास्कले के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई थी. इस टीम ने नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड (NATGRID) पोर्टल का इस्तेमाल करके संदिग्ध हथियारों के लाइसेंसों की जांच शुरू की. जांच के दौरान कई लाइसेंस संदिग्ध पाए गए, क्योंकि उनके संबंध में कहीं भी कोई ऑनलाइन रिकॉर्ड नहीं मिला. इसी प्रक्रिया के माध्यम से पूरे रैकेट का पर्दाफाश हुआ.
इस गिरोह ने इन नकली लाइसेंसों को बनाने के लिए बेहद चालाकी भरे तरीके अपनाए. आरोपी पैन कार्ड, आधार कार्ड और तस्वीरों से छेड़छाड़ करके ऑनलाइन हथियारों के लाइसेंस बनाते थे. इन लाइसेंसों पर क्यूआर कोड और भिंड के ज़िलाधिकारी का नाम भी उभरा हुआ होता था, जिससे वे पूरी तरह से असली लगते थे. यह गिरोह 3 लाख रुपये में ऑल इंडिया वैधता के नाम पर लाइसेंस और हथियार उपलब्ध करा रहा था. अब तक की पुलिस जांच में ये बात सामने आई है कि इस गिरोह का नेटवर्क सिर्फ मध्य प्रदेश तक ही सीमित नहीं था; यह उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और जम्मू-कश्मीर सहित कई अन्य राज्यों तक फैला हुआ था.
इन जाली दस्तावेज़ों को बनाने के लिए आरोपी अलग-अलग राज्यों के पतों का इस्तेमाल करते थे. अब तक गिरफ़्तार किए गए आरोपियों में सतीश त्रिपाठी, सतीश चंद्र (मऊ), राधाचरण नायक (जालौन), सुमेर यादव (उमरी), पुष्पेंद्र राजावत (जैतपुरा), अबरार खान (भिंड), रोहित चंदले, प्रवीण भामरे, राहुल पाटिल (महाराष्ट्र), सुनील शर्मा और उनके बेटे प्रांशु शर्मा (लहार), अजीत कुशवाहा, आर्म्स ब्रांच की इंचार्ज मधुबाला और चपरासी रामसेवक कोरकू, आदि शामिल हैं.
इस मामले का खुलासा होने के बाद कलेक्ट्रेट की आर्म्स शाखा को डबल ताले में सील कर दिया गया है. इसके अलावा, ब्रांच की इंचार्ज मधुबाला को निलंबित कर दिया गया है. पुलिस ने इस गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्धों की एक सूची तैयार की है. अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना है. पुलिस इस पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही है.
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