Live TV
Search
Home > राज्य > मध्य प्रदेश > मध्य प्रदेश का बुलडोजर काल! जब सड़कों पर निकाली जाती थी गैंगस्टरों की परेड; डर से छोड़ देते थे जुर्म की दुनिया

मध्य प्रदेश का बुलडोजर काल! जब सड़कों पर निकाली जाती थी गैंगस्टरों की परेड; डर से छोड़ देते थे जुर्म की दुनिया

Sundar Lal Patwa: मध्य प्रदेश में जब सुंदर लाल पटवा मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने सड़कों से अवैध अतिक्रमण हटाने का फैसला किया. इसके लिए उन्होंने बाबूलाल गौर को बड़ी जिम्मेदारी दी. जिन्हें बुलडोजर लाल के नाम से भी जाना जाता है.

Written By: Sohail Rahman
Last Updated: April 11, 2026 16:41:07 IST

Mobile Ads 1x1

MP Bulldozer Lal: उत्तर प्रदेश में इन दिनों भले ही बुलडोजर का राज हो लेकिन क्या आपको पता है कि किसे बुलडोजर लाल के नाम से जाना जाता था. अगर आपको नहीं पता तो चलिए आपको बताते हैं. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री सुंदर लाल पटवा के बारे में बात करते हैं. जिनकी राजनीति धोखे से शुरू हुई. अब आप सोच रहे होंगे वो कैसे तो चलिए आपको बताते हैं. दरअसल, जब उन्हें जनसंघ की तरफ से चुनाव लड़ने का आदेश आया तो उन्होंने चुनाव लड़ने से साफ इन्कार कर दिया.

रामचन्द्र बसेर के साथ सुंदर लाल पटवा का भी चुपके से नामांकन करवा दिया गया. नामांकन की जांच में दोनों का आवेदन सही पाया गया. फिर जनसंघ के आदेश पर रामचन्द्र बसेर ने चुपके से अपना नामांकन वापस ले लिया. इसके बाद फिर सुंदर लाल पटवा खफा हुए. तब उन्हें कहा गया कि अगर आपने चुनाव नहीं लड़ा तो कांग्रेस बिना लड़े ही जीत जाएगी. इसके बाद वो चुनाव लड़ने को राजी हुए और जीते भी हासिल की.

1990 के चुनाव में बीजेपी को मिली जीत

मार्च, 1990 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 320 में से 220 सीटें मिली. 5 मार्च, 1990 को भोपाल के लाल परेड में सुंदरलाल पटवा ने पद और गोपनीयती की शपथ ली और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. सुंदर लाल पटवा के कार्यकाल के दौरान मध्य प्रदेश के सभी बड़े शहरों में सड़कों पर जबरदस्त अतिक्रमण था. जिससे लोगों को आवागमन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था. जिसके बाद पटवा ने ऐसी सभी इमारतों को गिराने का आदेश दिया.

बाबूलाल गौर बने प्रभारी अधिकारी

इस अभियान के लिए बाबूलाल गौर को प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया. जल्द ही उन्हें बुलडोजर लाल के नाम से जाना जाने लगा. हालांकि इसी अभियान के दौरान एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी. इंदौर के एक इलाके को बॉम्बे बाजार के नाम से जाना जाता है. उन दिनों इस इलाके में कई अवैध गतिविधियां चलती थीं. इस संकरी गलियों वाले इलाके पर बाला बेग नामक एक गैंगस्टर का पूरी तरह से कब्जा था. इस इलाके में बेग का आतंक इतना था कि पुलिस कभी भी 40-50 जवानों के नीचे छापा मारने की हिम्मत नहीं करती थी. जब नगर निगम ने बॉम्बे बाजार में अतिक्रमण हटाने का काम शुरू किया गया तो पुलिस भी उनके साथ मौजूद थी. लेकिन बाला बेग के उकसाने पर इलाके में दंगा भड़क उठा.

गुंडों का निकाला गया परेड

हिंसा भड़कने के बाद एसपी अनिल धस्माना अपनी पूरी टीम के साथ मौके पर पहुंचीं. एक संकरी गली में छत से एक भारी पत्थर का टुकड़ा फेंका गया, जिसका निशाना खास तौर पर धस्माना थे. पत्थर अपने निशाने से चूक गया, लेकिन धस्माना के ठीक बगल में खड़े उनके गनमैन छेदीलाल को जा लगी. जिसकी वजह से उनकी मौके पर ही मौत हो गई. इस घटना के बाद बाला बेग जैसे गैंगस्टर को न सिर्फ गिरफ्तार किया गया बल्कि हथकड़ियां पहनाकर पूरे इलाके में उसका जूलूस निकाला गया. यही हाल भोपाल में मुख्तार मलिक के साथ भी किया गया.

इन घटनाओं को याद करते हुए पटवा अक्सर कहा करते थे कि मैंने कोई बहुत बड़ा अभियान नहीं चलाया था. मैंने तो बस 10 मुख्य गैंगस्टरों के खिलाफ़ कार्रवाई की थी. बाकी लोगों ने खुद ही सुधरने का फैसला कर लिया.आज भी मध्य प्रदेश की पुलिस अक्सर गैंगस्टरों को सड़कों पर घुमाती है, ताकि लोगों के मन से उनका डर खत्म किया जा सके.

MORE NEWS

Home > राज्य > मध्य प्रदेश > मध्य प्रदेश का बुलडोजर काल! जब सड़कों पर निकाली जाती थी गैंगस्टरों की परेड; डर से छोड़ देते थे जुर्म की दुनिया

Written By: Sohail Rahman
Last Updated: April 11, 2026 16:41:07 IST

Mobile Ads 1x1

MP Bulldozer Lal: उत्तर प्रदेश में इन दिनों भले ही बुलडोजर का राज हो लेकिन क्या आपको पता है कि किसे बुलडोजर लाल के नाम से जाना जाता था. अगर आपको नहीं पता तो चलिए आपको बताते हैं. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री सुंदर लाल पटवा के बारे में बात करते हैं. जिनकी राजनीति धोखे से शुरू हुई. अब आप सोच रहे होंगे वो कैसे तो चलिए आपको बताते हैं. दरअसल, जब उन्हें जनसंघ की तरफ से चुनाव लड़ने का आदेश आया तो उन्होंने चुनाव लड़ने से साफ इन्कार कर दिया.

रामचन्द्र बसेर के साथ सुंदर लाल पटवा का भी चुपके से नामांकन करवा दिया गया. नामांकन की जांच में दोनों का आवेदन सही पाया गया. फिर जनसंघ के आदेश पर रामचन्द्र बसेर ने चुपके से अपना नामांकन वापस ले लिया. इसके बाद फिर सुंदर लाल पटवा खफा हुए. तब उन्हें कहा गया कि अगर आपने चुनाव नहीं लड़ा तो कांग्रेस बिना लड़े ही जीत जाएगी. इसके बाद वो चुनाव लड़ने को राजी हुए और जीते भी हासिल की.

1990 के चुनाव में बीजेपी को मिली जीत

मार्च, 1990 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 320 में से 220 सीटें मिली. 5 मार्च, 1990 को भोपाल के लाल परेड में सुंदरलाल पटवा ने पद और गोपनीयती की शपथ ली और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने. सुंदर लाल पटवा के कार्यकाल के दौरान मध्य प्रदेश के सभी बड़े शहरों में सड़कों पर जबरदस्त अतिक्रमण था. जिससे लोगों को आवागमन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था. जिसके बाद पटवा ने ऐसी सभी इमारतों को गिराने का आदेश दिया.

बाबूलाल गौर बने प्रभारी अधिकारी

इस अभियान के लिए बाबूलाल गौर को प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया. जल्द ही उन्हें बुलडोजर लाल के नाम से जाना जाने लगा. हालांकि इसी अभियान के दौरान एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी. इंदौर के एक इलाके को बॉम्बे बाजार के नाम से जाना जाता है. उन दिनों इस इलाके में कई अवैध गतिविधियां चलती थीं. इस संकरी गलियों वाले इलाके पर बाला बेग नामक एक गैंगस्टर का पूरी तरह से कब्जा था. इस इलाके में बेग का आतंक इतना था कि पुलिस कभी भी 40-50 जवानों के नीचे छापा मारने की हिम्मत नहीं करती थी. जब नगर निगम ने बॉम्बे बाजार में अतिक्रमण हटाने का काम शुरू किया गया तो पुलिस भी उनके साथ मौजूद थी. लेकिन बाला बेग के उकसाने पर इलाके में दंगा भड़क उठा.

गुंडों का निकाला गया परेड

हिंसा भड़कने के बाद एसपी अनिल धस्माना अपनी पूरी टीम के साथ मौके पर पहुंचीं. एक संकरी गली में छत से एक भारी पत्थर का टुकड़ा फेंका गया, जिसका निशाना खास तौर पर धस्माना थे. पत्थर अपने निशाने से चूक गया, लेकिन धस्माना के ठीक बगल में खड़े उनके गनमैन छेदीलाल को जा लगी. जिसकी वजह से उनकी मौके पर ही मौत हो गई. इस घटना के बाद बाला बेग जैसे गैंगस्टर को न सिर्फ गिरफ्तार किया गया बल्कि हथकड़ियां पहनाकर पूरे इलाके में उसका जूलूस निकाला गया. यही हाल भोपाल में मुख्तार मलिक के साथ भी किया गया.

इन घटनाओं को याद करते हुए पटवा अक्सर कहा करते थे कि मैंने कोई बहुत बड़ा अभियान नहीं चलाया था. मैंने तो बस 10 मुख्य गैंगस्टरों के खिलाफ़ कार्रवाई की थी. बाकी लोगों ने खुद ही सुधरने का फैसला कर लिया.आज भी मध्य प्रदेश की पुलिस अक्सर गैंगस्टरों को सड़कों पर घुमाती है, ताकि लोगों के मन से उनका डर खत्म किया जा सके.

MORE NEWS