Madhya Pradesh: प्यार और इंसानियत का कोई धर्म नहीं होता. यह सच मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के एक मुस्लिम परिवार ने बहुत ही खूबसूरती से साबित किया है. इन दिनों, मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले का एक शादी का कार्ड पूरे शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है. इस कार्ड में नंदिनी और अंश की शादी की घोषणा की गई है, लेकिन मेजबान के तौर पर ‘अब्दुल्लाह हक खान’ का नाम लिखा है. जिसने भी यह शादी का कार्ड देखा है, वह हैरान रह गया है. असल में, यह कदम एक पिता की भावनाओं को दर्शाता है, जिसने न सिर्फ़ एक अनाथ हिंदू बेटी को गोद लिया, बल्कि उसे अपने धर्म और रीति-रिवाजों के अनुसार जीवन जीने की पूरी आजादी भी दी.
एक दुर्घटना ने नंदिनी के घर को कर दिया था तबाह
यह कहानी 2010 की है, जब एक सड़क दुर्घटना और एक बीमारी ने छोटी नंदिनी से उसके माता-पिता का साया छीन लिया. नंदिनी की बड़ी बहन, प्रीति, पहले से ही अब्दुल्ला खान के परिवार में शादीशुदा थी. अब्दुल्ला हक खान ने अपनी छोटी साली, नंदिनी को अपनी सगी बेटी की तरह पालने का फैसला किया. उन्होंने न केवल उसे उच्च शिक्षा प्रदान की, बल्कि उस पर अपना धर्म बदलने के लिए कभी कोई दबाव भी नहीं डाला.

बेटी के फैसले को दिया साथ
अपनी पढ़ाई के दौरान ही नंदिनी की मुलाकात ग्वालियर के रहने वाले अंश परमार से हुई. जब इस जोड़े ने अपनी जिदगी एक साथ बिताने का फैसला किया, तो अब्दुल्ला खान ने एक पिता की तरह आगे बढ़कर उन्हें अपना समर्थन दिया. शादी 4 अप्रैल को राजगढ़ में ओल्ड कलेक्ट्रेट रोड पर स्थित उनके घर पर होनी तय है. इस समारोह की एक खास बात यह है कि निकाह के बजाय, यह जोड़ा हिंदू पुजारियों द्वारा मंत्रोच्चार के बीच पवित्र अग्नि के चारों ओर पारंपरिक सात फेरे लेगा.