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Success Story: कठिन हालात में भी डटी रहीं सुमैया, दो बच्चों की मां बनीं RPF जवान, दिव्यांग पिता को उठाकर जश्न

Viral Video: बीड के दिदरुद गांव की रहने वाली सुमैया ने दो साल की कड़ी मेहनत के बाद रेलवे पुलिस में शामिल होकर एक प्रेरणादायक मिसाल कायम की है. दो बच्चों की मां होने के बावजूद, उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में अपने सपने को साकार किया.

Written By: Vipul Tiwary
Last Updated: April 12, 2026 11:26:34 IST

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Viral Video: दो बच्चों की मां, जो मुश्किल पारिवारिक हालात का सामना कर रही थी, लेकिन सरकारी कर्मचारी बनने का उसका पक्का इरादा था. दिंद्रुड की रहने वाली सुमैया आखिरकार दो साल की कड़ी मेहनत के बाद महाराष्ट्र पुलिस फ़ोर्स में शामिल हो गई.

नियुक्ति के बाद जश्न

जब वह मुंबई रेलवे पुलिस फोर्स में शामिल हो रही थी, तो अपनी नियुक्ति के बाद उसने जिस तरह की खुशी जाहिर की अपने दिव्यांग पिता (शरीफभाई) को अपने कंधों पर उठाकर जश्न मनाना वह सचमुच देखने लायक नजारा था.

कठीन प्रयास का फल

सुमैय्या की सफलता के पीछे उनकी अथक मेहनत, अनुशासन और परिवार का सहयोग था. सीमित संसाधनों के बावजूद, उन्होंने अपने लक्ष्यों से कभी समझौता नहीं किया. अपनी पढ़ाई और शारीरिक प्रशिक्षण के साथ-साथ रोजमर्रा की घरेलू जिम्मेदारियों को निभाना उनके लिए आसान नहीं था, फिर भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी.

परिवार में खुशी का माहौल

उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार में खुशी का माहौल पैदा किया है, बल्कि पूरे गांव में गर्व की भावना भी जगाई है. आज, सुमैय्या उन सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बन गई हैं, जो कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए भी अपने सपनों को पूरा करने की इच्छा रखती हैं.

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Written By: Vipul Tiwary
Last Updated: April 12, 2026 11:26:34 IST

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Viral Video: दो बच्चों की मां, जो मुश्किल पारिवारिक हालात का सामना कर रही थी, लेकिन सरकारी कर्मचारी बनने का उसका पक्का इरादा था. दिंद्रुड की रहने वाली सुमैया आखिरकार दो साल की कड़ी मेहनत के बाद महाराष्ट्र पुलिस फ़ोर्स में शामिल हो गई.

नियुक्ति के बाद जश्न

जब वह मुंबई रेलवे पुलिस फोर्स में शामिल हो रही थी, तो अपनी नियुक्ति के बाद उसने जिस तरह की खुशी जाहिर की अपने दिव्यांग पिता (शरीफभाई) को अपने कंधों पर उठाकर जश्न मनाना वह सचमुच देखने लायक नजारा था.

कठीन प्रयास का फल

सुमैय्या की सफलता के पीछे उनकी अथक मेहनत, अनुशासन और परिवार का सहयोग था. सीमित संसाधनों के बावजूद, उन्होंने अपने लक्ष्यों से कभी समझौता नहीं किया. अपनी पढ़ाई और शारीरिक प्रशिक्षण के साथ-साथ रोजमर्रा की घरेलू जिम्मेदारियों को निभाना उनके लिए आसान नहीं था, फिर भी उन्होंने कभी हार नहीं मानी.

परिवार में खुशी का माहौल

उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार में खुशी का माहौल पैदा किया है, बल्कि पूरे गांव में गर्व की भावना भी जगाई है. आज, सुमैय्या उन सभी महिलाओं के लिए एक प्रेरणा बन गई हैं, जो कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए भी अपने सपनों को पूरा करने की इच्छा रखती हैं.

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