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ओडिशा: जनाक्रोश के आगे झुकी सरकार, विधायकों-मंत्रियों के वेतन वृद्धि का बिल लिया वापस

जनता की तीव्र नाराजगी और विरोध के दबाव में ओडिशा सरकार ने विधायकों, मंत्रियों, मुख्यमंत्री, स्पीकर व डिप्टी स्पीकर के वेतन-भत्तों व पेंशन में प्रस्तावित बढ़ोतरी वाले चार विधेयकों को वापस ले लिया है. इन विधेयकों के पारित होने के बाद विधायकों के मासिक वेतन-भत्ते को बढ़ाने का प्रावधान था.

Written By: Shivangi Shukla
Last Updated: April 1, 2026 10:51:38 IST

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Odisha News: जनता की तीव्र नाराजगी और विरोध के दबाव में ओडिशा सरकार ने विधायकों, मंत्रियों, मुख्यमंत्री, स्पीकर व डिप्टी स्पीकर के वेतन-भत्तों व पेंशन में प्रस्तावित बढ़ोतरी वाले चार विधेयकों को वापस ले लिया है. 

ये विधेयक विधानसभा से पारित हो चुके थे, मगर राज्यपाल की मंजूरी का इंतजार कर रहे थे. इन विधेयकों के पारित होने के बाद विधायकों के मासिक वेतन-भत्ते को 1.11 लाख रुपये से बढ़ाकर 3.45 लाख रुपये करने का प्रावधान था.

वापस लिए गए विधेयक

सरकार ने निम्नलिखित चार विधेयकों को औपचारिक रूप से लौटा दिया है:

  • ओडिशा विधानसभा सदस्य वेतन, भत्ता एवं पेंशन (संशोधन) विधेयक, 2025
  • ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष वेतन एवं भत्ता (संशोधन) विधेयक, 2025
  • ओडिशा विधानसभा उपाध्यक्ष वेतन एवं भत्ता (संशोधन) विधेयक, 2025
  • ओडिशा मंत्रियों के वेतन एवं भत्ते (संशोधन) विधेयक, 2025

बता दें कि ये सभी विधेयक 9 दिसंबर 2025 को शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन सर्वसम्मति से पास हुए थे. अब इन्हें वापस लेने के बाद विधायकों के वेतन-भत्ता व पेंशन में कोई बदलाव फिलहाल लागू नहीं होगा.

प्रस्तावित बढ़ोतरी का विवरण

विधेयकों में विधायकों के मासिक वेतन-भत्ते को 1.11 लाख रुपये से बढ़ाकर 3.45 लाख रुपये करने का प्रावधान था, जो देश के सबसे ऊंचे वेतनमानों में शुमार होता. इसके तहत, मुख्यमंत्री का पैकेज 98 हजार से 3.74 लाख रुपये, स्पीकर व डिप्टी स्पीकर के भत्तों में भारी वृद्धि प्रस्तावित थी. साथ ही पूर्व विधायकों की पेंशन 30 हजार से 80 हजार रुपये मासिक करने के साथ अतिरिक्त कार्यकाल पर बढ़ोतरी, वाहन व आतिथ्य भत्तों में संशोधन भी शामिल था.

विरोध की शुरुआत व राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

सीपीआई(एम) के एकमात्र विधायक लक्ष्मण मुंडा ने सबसे पहले इस पर आपत्ति जताई थी. बाद में बीजेडी अध्यक्ष नवीन पटनायक ने बढ़ी सैलरी लेने से इनकार कर दिया, जिससे ये मुद्दा गरमा गया. इसके बाद सभी दलों के विधायकों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विधेयक पर पुनर्विचार करने की मांग की. भाजपा विधायक पद्मलोचन पंडा ने बताया कि सभी मंत्रियों-विधायकों की सहमति से बिल वापस लिया गया, क्योंकि मौजूदा समय में यह अनुपयुक्त है; टैक्स का पैसा जनहित में खर्च होना चाहिए. भविष्य में इस विधेयक पर विचार संभव है.

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Odisha News: जनता की तीव्र नाराजगी और विरोध के दबाव में ओडिशा सरकार ने विधायकों, मंत्रियों, मुख्यमंत्री, स्पीकर व डिप्टी स्पीकर के वेतन-भत्तों व पेंशन में प्रस्तावित बढ़ोतरी वाले चार विधेयकों को वापस ले लिया है. 

ये विधेयक विधानसभा से पारित हो चुके थे, मगर राज्यपाल की मंजूरी का इंतजार कर रहे थे. इन विधेयकों के पारित होने के बाद विधायकों के मासिक वेतन-भत्ते को 1.11 लाख रुपये से बढ़ाकर 3.45 लाख रुपये करने का प्रावधान था.

वापस लिए गए विधेयक

सरकार ने निम्नलिखित चार विधेयकों को औपचारिक रूप से लौटा दिया है:

  • ओडिशा विधानसभा सदस्य वेतन, भत्ता एवं पेंशन (संशोधन) विधेयक, 2025
  • ओडिशा विधानसभा अध्यक्ष वेतन एवं भत्ता (संशोधन) विधेयक, 2025
  • ओडिशा विधानसभा उपाध्यक्ष वेतन एवं भत्ता (संशोधन) विधेयक, 2025
  • ओडिशा मंत्रियों के वेतन एवं भत्ते (संशोधन) विधेयक, 2025

बता दें कि ये सभी विधेयक 9 दिसंबर 2025 को शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन सर्वसम्मति से पास हुए थे. अब इन्हें वापस लेने के बाद विधायकों के वेतन-भत्ता व पेंशन में कोई बदलाव फिलहाल लागू नहीं होगा.

प्रस्तावित बढ़ोतरी का विवरण

विधेयकों में विधायकों के मासिक वेतन-भत्ते को 1.11 लाख रुपये से बढ़ाकर 3.45 लाख रुपये करने का प्रावधान था, जो देश के सबसे ऊंचे वेतनमानों में शुमार होता. इसके तहत, मुख्यमंत्री का पैकेज 98 हजार से 3.74 लाख रुपये, स्पीकर व डिप्टी स्पीकर के भत्तों में भारी वृद्धि प्रस्तावित थी. साथ ही पूर्व विधायकों की पेंशन 30 हजार से 80 हजार रुपये मासिक करने के साथ अतिरिक्त कार्यकाल पर बढ़ोतरी, वाहन व आतिथ्य भत्तों में संशोधन भी शामिल था.

विरोध की शुरुआत व राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

सीपीआई(एम) के एकमात्र विधायक लक्ष्मण मुंडा ने सबसे पहले इस पर आपत्ति जताई थी. बाद में बीजेडी अध्यक्ष नवीन पटनायक ने बढ़ी सैलरी लेने से इनकार कर दिया, जिससे ये मुद्दा गरमा गया. इसके बाद सभी दलों के विधायकों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विधेयक पर पुनर्विचार करने की मांग की. भाजपा विधायक पद्मलोचन पंडा ने बताया कि सभी मंत्रियों-विधायकों की सहमति से बिल वापस लिया गया, क्योंकि मौजूदा समय में यह अनुपयुक्त है; टैक्स का पैसा जनहित में खर्च होना चाहिए. भविष्य में इस विधेयक पर विचार संभव है.

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