राजकुमारी करम कौर कपूरथला (Princess Karam Kaur Kapurthala)की एक प्रभावशाली व्यक्तित्व (Iconic Perosnality) थीं, जिन्होंने 1930 के दशक में वैश्विक फैशन (Global Fashion) को गहराई से प्रभावित कर पूरी दुनिया में इतिहास रच दिया था.
राजकुमारी करम कौर कपूरथला, विश्व की सबसे सुंदर महिला
Princess Karam of Kapurthala: आप में से बहुत कम लोगों ने राजकुमारी करम कौर के बारे में सुना होगा. उन्हें खास तौर से राजकुमारी करम के नाम से भी जाना जाता था. पंजाब के कपूरथला के महाराजा जगजीत सिंह की पुत्रवधू थीं. साल 1930 के दशक में उन्होंने न सिर्फ भारतीय रियासतों (Indian Princely States) का चेहरा थीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय फैशन जगत की एक ‘स्टाइल आइकन’ के नाम से विश्वभर में प्रसिद्ध हो गईं. इतना ही नहीं, उन्हें अपनी पीढ़ी की सबसे सुंदर महिलाओं में गिना जाता था.
राजकुमारी करम का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव पेरिस की दिग्गज डिजाइनर एल्सा शियापरेली (Elsa Schiaparelli) पर पड़ा था. जब साल 1930 के दशक के मध्य में, राजकुमारी पेरिस गईं, तो उनके पहनने के तरीके खासतौर से उनकी साड़ियों ने शियापरेली का ध्यान उनकी तरफ तेजी से खींचा. ऐसा कहा जाता है कि डिजाइनर एल्सा शियापरेली राजकुमारी करम से इतनी प्रेरित हुईं कि उन्होंने 1935 के अपने ग्रीष्मकालीन संग्रह (Summer Collection) में ‘साड़ी-गाउन’ और साड़ियों से प्रेरित शाम के पहनावे के लिए उनसे खास तौर से मुलाकात की. इतना ही नहीं, यह पहली बार था जब किसी पश्चिमी डिजाइनर ने भारतीय पारंपरिक परिधान को इस स्तर पर वैश्विक हाई-फैशन का हिस्सा बनते हुए देखा था.
राजकुमारी करम की सुंदरता सिर्फ शारीरिक नहीं थी, बल्कि उन्हें विश्व की सबसे सुंदर महिलाओं की सूची में शामिल किया गया. ‘वोग’ और ‘हार्पर्स बाजार’ जैसी पत्रिकाओं ने उनकी सुंदरता के लिए उनकी जमकर तारीफ की. तो वहीं, दूसरी तरफ 1930 के दशक में, उन्हें पांचवी सबसे ज्यादा खूबसूरत महिलाओं में से एक के रूप में सम्मान दिया गया. राजकुमारी करम मोतियों की बहुत बड़ी शौकीन थीं, वह ज्यादातर मोतियों के हार के साथ-साथ शिफॉन की साड़ियां पहनना पसंद करती थीं. उनका यह पहनावा दुनियाभर में उनकी पहचान बन चुका था.
उनकी इस अनोखा कला को लेकर देशभर की महिलाओं ने उनसे प्रेरणा लिया. राजकुमारी करम ने कपूरथला की सीमाओं से बाहर निकलकर वैश्विक पटल पर भारतीय संस्कृति का जमकर प्रतिनिधित्व किया. इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी साबित किया कि भारतीय साड़ी सिर्फ एक पारंपरिक पोशाक नहीं, बल्कि एक अनोखी कला है जो पेरिस के फैशन हाउसों को भी प्रेरित कर सकती है. और आज के दौर में महिलाएं साड़ी का ही सबसे ज्यादा चुनाव करना पसंद करती हैं.
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