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पंजाब और आंध्र प्रदेश के छात्र क्यों हैं विदेश जाने में सबसे आगे, जानें क्या है इसके पीछे की असली वजह?

पंजाब और आंध्र प्रदेश (Punjab and Andhra Pradesh) जैसे राज्यों को छोड़कर युवा तेजी से विदेश (Foreign Countries) की तरफ आगे बढ़ रहे हैं. इसके पीछे कई वजह हो सकती हैं.

Written By: Darshna Deep
Last Updated: January 27, 2026 13:22:20 IST

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Why Andhra Pradesh and Punjab Lead India’s Study-Abroad Dream: यह तो ज्यादातर लोगों को पता है कि पंजाब और आंध्र प्रदेश के युवा बेहतरीन पढ़ाई के लिए तेजी से विदेश जा रहे हैं.  इतना ही नहीं, पढ़ाई के अलावा इसके पीछे गहरे सामाजिक, आर्थिक जैसे कई अन्य परेशानियां भी है जहां लोग विदेश जाने की फिराक में हैं. तो वहीं, दूसरी तरफ जहां इन राज्यों ने एक ‘प्रवासन संस्कृति’ (Migration Culture) विकसित कर ली है, वहीं अन्य राज्य कई बाधाओं की वजह से अभी भी पीछे चल रहे हैं. 

1. प्रवासन का इतिहास और ‘नेटवर्क प्रभाव’

पंजाब:  पंजाब का विदेश कनाडा, यूके जाने का इतिहास कई सालों से सबसे ज्यादा पुराना है.  जब परिवार का एक सदस्य बाहर जाकर बस जाता है, तो वह पूरे कुनबे के लिए रास्ता खोल देता है. जिससे दूसरी भाषा में “Chain Migration” भी कहते हैं.

आंध्र प्रदेश: तो वहीं, इस राज्य के छात्र मुख्य रूप से अमेरिका (USA) जैसे देशों को तेजी से अपना निशाना बनाते हैं. इसके अलावा ‘तेलुगु डायस्पोरा’ दुनिया के सबसे मजबूत समुदायों में से एक है, जो नए छात्रों को रहने, नौकरी और मार्गदर्शन में सबसे ज्यादा मदद करता है. 

बात करें अन्य राज्यों के बारे में तो उत्तर प्रदेश या फिर बिहार जैसे राज्यों में अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की कमी सबसे ज्यादा देखने को मिलती है, जिसकी वजह से वहां के छात्रों को विदेश जाने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. 

2. आर्थिक ढांचा और वित्तीय सहायता

पंजाब जैसे राज्य में किसानों के पास जमीन के पहले से ही कई बड़े हिस्से होते हैं और साथ ही विदेश भेजने के लिए जमीन बेचना या फिर उस पर कर्ज लेना वहां एक सामान्य निवेश माना जाता है. बात करें आंध्र प्रदेश के बारे में तो, तेलंगाना की सरकारें ‘अंबेडकर ओवरसीज विद्या निधि’ जैसी योजनाएं चला रही हैं, जिसमें पिछड़े वर्ग के छात्रों को विदेश जाने के लिए 10 से 20 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता (Financial Assistance) पूरी तरह से दी जाती है. 

लेकिन, कई राज्यों में प्रति व्यक्ति आय बेहद ही कम है और वहां की सरकारें विदेश शिक्षा के बजाय प्राथमिक शिक्षा या फिर स्थानीय रोजगार पर ज्यादा ध्यान देने में जुटी हुई है. 

3. शिक्षा का झुकाव और स्थानीय बाजार की कमी

तो वहीं, आंध्र प्रदेश जैसे राज्य में इंजीनियरिंग (STEM) का सबसे ज्यादा क्रेज देखने को मिलता है. जब स्थानीय स्तर पर आईटी सेक्टर में उच्च वेतन वाली नौकरियों की कमी महसूस होती है, तो छात्र सीधे सिलिकॉन वैली का तेजी तरफ से रुख करने लगते हैं. इसके अलावा पंजाब के बारे में बात करें तो, पंजाब में  “कनाडा जाना” एक स्टेटस सिंबल और बेहतर जीवन स्तर पाने का अब बेहद ही आम जरिया बन चुका है. 

अन्य राज्य जैसे तमिलनाडु या फिर महाराष्ट्र जैसे राज्यों में स्थानीय स्तर पर ही मजबूत औद्योगिक और आईटी हब (चेन्नई, पुणे, मुंबई) मौजूद हैं, जिससे वहां के छात्र घर के पास रहकर काम करना सबसे ज्यादा पसंद करते हैं. 

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