जयपुर के एक निवासी द्वारा अपने बेटे के साथ पड़ोसी के बच्चे के साथ फुटबॉल खेलने के कारण सामाजिक बहिष्कार की कहानी ने इस बात पर एक व्यापक बहस छेड़ दी है.
दूसरे बच्चों ने किया बहिष्कृत
यहां एक संस्थापक का दावा है कि नौकर के बच्चे के साथ खेलने के कारण उनके बेटे को दूसरे बच्चों ने बहिष्कृत कर दिया है. व्यक्ति ने बताया कि हमारे मोहल्ले के बच्चों ने मेरे बेटे का बहिष्कार कर दिया है.
इसका वजह यह है कि हम (जी हां, हम दोनों) एक नेपाली बच्चे के साथ रोजाना फुटबॉल खेलने लगे थे, जिसके पिता पड़ोस के एक घर में नौकर का काम करते हैं,” खेतरपाल ने एक पोस्ट में कहा.
My son has been boycotted by kids in our lane. The reason – we (yes, both of us) started playing football everyday with a Nepali kid whose father is a servant in one of the neighbouring houses.
For context, in my lane – almost everyone (barring yours truly) has a business, net…
— Gaurav Kheterpal (@gauravkheterpal) January 17, 2026
यह मामला तब नजर में आने लगा जब गौरव खेतरपाल ने X सोशल मीडिया पर बताया कि उनकी गली में साथ खेलने वाले बच्चों ने उनके बेटे के साथ खेलना बंद कर दिया है.
साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इसका कारण कोई आपसी झगड़ा या प्रतिद्वंद्विता नहीं है, बल्कि यह था कि पिता और पुत्र दोनों पड़ोस में घरेलू काम करने वाले एक नेपाली लड़के के साथ रोजाना खेलने लगे थे.
अपने पोस्ट में खेतरपाल ने भौतिक समृद्धि और नैतिक मूल्यों के बीच तीखा विरोधाभास दिखाया है. उन्होंने यह बताया कि गली में रहने वाले ज्यादा फैमिली वाले लोग बहुत ही सुखी और संपन्न है, जिनके पास लग्जरी कारे भी हैं, घरेलू नौकर रखे हैं और भारी समाजिक फंक्शन का आयोजन करते हैं.
फिर भी, सफलता और आधुनिकता के इस दिखावे के बावजूद, बच्चों को “नौकर के बच्चे” के साथ खेलने देना एक अदृश्य सामाजिक रेखा को पार करने जैसा माना जाता है. यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया है.
My son has been boycotted by kids in our lane. The reason – we (yes, both of us) started playing football everyday with a Nepali kid whose father is a servant in one of the neighbouring houses.
For context, in my lane – almost everyone (barring yours truly) has a business, net…
— Gaurav Kheterpal (@gauravkheterpal) January 17, 2026