क्या था पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, यह घटना शनिवार दोपहर कोटा के कुन्हाड़ी पुलिस स्टेशन इलाके में हुई. एक भैंस और उसके बछड़े की मिल्कियत को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया. विवाद इतना बढ़ गया कि बात पुलिस स्टेशन तक पहुंच गई. दोनों पक्ष इस बात पर अड़े थे कि भैंस उनकी है और किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं थे. पुलिस के लिए यह तय करना मुश्किल हो गया कि कौन सच बोल रहा है. स्थिति को देखते हुए, स्टेशन हाउस ऑफिसर कौशल्या गालव ने भैंस और उसके बछड़े को एक गाड़ी में लोड करवाकर पुलिस स्टेशन मंगवाया. पुलिस स्टेशन के बाहर करीब 4 घंटे तक हंगामा चलता रहा, और पुलिस दुविधा में रही.
पुलिस ने दोनो पक्षों से पूछी भैंस की उम्र
विवाद को सुलझाने के लिए, पुलिस ने दोनों पक्षों से भैंस की उम्र पूछी. यहीं पर मामले में एक अहम मोड़ आया. पहले पक्ष, बलिता रोड के रहने वाले इंद्रजीत केवट ने दावा किया कि भैंस उसकी है और वह 7 साल की है. दूसरे पक्ष, रामलाल मेघवाल ने भी भैंस पर अपना हक जताया और उसकी उम्र साढ़े चार साल बताई.
कैसे पता चला सच?
सच का पता लगाने के लिए, पुलिस ने पशु डॉक्टरों की एक टीम को बुलाया. डॉक्टरों ने भैंस का फिजिकल एग्जामिनेशन (मेडिकल टेस्ट) किया. मेडिकल रिपोर्ट में भैंस की उम्र 4 से 5 साल के बीच पाई गई. इस रिपोर्ट से रामलाल मेघवाल का दावा सच साबित हुआ, जबकि इंद्रजीत का दावा झूठा निकला. इसके बाद, पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं और भैंस और उसके बछड़े को रामलाल मेघवाल को सौंप दिया. स्टेशन हाउस ऑफिसर ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ रहा था, इसलिए निष्पक्ष जांच के लिए मेडिकल जांच का सहारा लिया गया. मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर, भैंस को उसके असली मालिक को सौंप दिया गया है.