Khatu Shyamji Municipality Election: राजस्थान के खाटू श्यामजी नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला पारिवारिक रिश्ते और कानूनी पेच में उलझ गया. कांग्रेस की पार्षद लक्ष्मी देवी मतदान के दिन नहीं पहुंचीं तो उनके पति ने अपहरण की शिकायत दर्ज कराई. खास बात यह थी कि बीजेपी उम्मीदवार प्रेम देवी और कांग्रेस पार्षद लक्ष्मी देवी देवरानी-जिठानी हैं. चुनाव स्थगित होने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा.
देवरानी-जिठानी के मुकाबले में किसका चला दांव?
Khatu Shyamji Municipality Election: राजस्थान के प्रसिद्ध तीर्थस्थल खाटू श्यामजी में नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव सिर्फ बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक मुकाबला नहीं रहा. यहां देवरानी-जिठानी आमने-सामने थीं, कांग्रेस की एक पार्षद मतदान के दिन नहीं पहुंचीं, उनके पति ने अपहरण की शिकायत दर्ज करा दी और चुनाव टालने की मांग उठी. मामला राजस्थान हाईकोर्ट तक पहुंचा और आखिरकार अदालत के निर्देश पर 19 वोटों से परिणाम तय हुआ. कांग्रेस की विनिता पूनिया ने बीजेपी की प्रेम देवी को महज एक वोट से हरा दिया.
खाटू श्यामजी नगर पालिका में कुल 20 पार्षद हैं. इनमें बीजेपी और कांग्रेस के पास 8-8 पार्षद थे. इसके अलावा तीन निर्दलीय पार्षद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी यानी आरएलपी का एक पार्षद था. अध्यक्ष पद हासिल करने के लिए 11 वोटों की जरूरत थी. कांग्रेस ने आरएलपी के एकमात्र पार्षद का समर्थन हासिल कर अपनी संख्या 9 तक पहुंचा ली थी. वहीं बीजेपी ने प्रेम देवी को उम्मीदवार बनाया, जबकि कांग्रेस की ओर से विनिता पूनिया मैदान में थीं.
21 सितंबर को अध्यक्ष पद के लिए मतदान होना था. लेकिन वार्ड नंबर 10 की कांग्रेस पार्षद लक्ष्मी देवी मतदान करने नहीं पहुंचीं. इसके बाद उनके पति हरलाल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि लक्ष्मी देवी लापता हैं और उनका अपहरण किया गया है. इस घटनाक्रम के बाद बीजेपी और लक्ष्मी देवी के परिवार की ओर से उन्हें तलाशने और मतदान के लिए वापस लाने की मांग की गई. बीजेपी ने चुनाव स्थगित करने की मांग भी उठाई.
मामले में सबसे दिलचस्प पहलू यह था कि कांग्रेस पार्षद लक्ष्मी देवी और बीजेपी की उम्मीदवार प्रेम देवी आपस में देवरानी-जिठानी हैं. यानी चुनाव में एक तरफ राजनीतिक दलों की रणनीति थी तो दूसरी तरफ परिवार का रिश्ता भी सीधे मुकाबले में था. बीजेपी को उम्मीद थी कि लक्ष्मी देवी अगर मतदान करती हैं तो पारिवारिक संबंधों का असर चुनाव पर पड़ सकता है और वह अपनी जिठानी प्रेम देवी के समर्थन में वोट कर सकती हैं. हालांकि, लक्ष्मी देवी लंबे समय से कांग्रेस और अपने परिवार के साथ जुड़ी रही हैं. रिपोर्टों के मुताबिक, मतदान से पहले वह अपने मायके चली गई थीं.
लक्ष्मी देवी के मतदान के लिए नहीं पहुंचने और उनके पति की ओर से अपहरण की शिकायत दर्ज कराने के बाद मामला बढ़ गया. बीजेपी और उम्मीदवार के परिवार की मांगों के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने अध्यक्ष पद का चुनाव 21 सितंबर से स्थगित कर 25 सितंबर को कराने का फैसला किया. इसके बाद कांग्रेस उम्मीदवार विनिता पूनिया ने निर्वाचन आयोग के इस फैसले को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी.
विनिता पूनिया की ओर से वकील बहादुर सिंह ने अदालत में दलील दी कि नगर पालिका अध्यक्ष के चुनाव के लिए सभी पार्षदों का मतदान करना जरूरी नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि लक्ष्मी देवी के पति ने अपहरण की शिकायत जरूर दर्ज कराई है, लेकिन केवल शिकायत दर्ज होने से अपहरण की घटना साबित नहीं हो जाती. इसकी जांच जरूरी है. याचिका में मांग की गई कि जिन पार्षदों ने वास्तव में मतदान किया है, उनके वोट के आधार पर ही अध्यक्ष पद का फैसला किया जाए.
राजस्थान हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि अध्यक्ष पद का फैसला डाले गए 19 वोटों के आधार पर किया जाए. इसके बाद शनिवार को खाटू श्यामजी नगर पालिका में वोटों की गिनती हुई. कुल 19 पार्षदों ने मतदान किया था और इन्हीं मतों के आधार पर चुनाव का परिणाम घोषित किया गया.
मतगणना में कांग्रेस उम्मीदवार विनिता पूनिया को 10 वोट मिले, जबकि बीजेपी उम्मीदवार प्रेम देवी के खाते में 9 वोट आए. इस तरह विनिता पूनिया ने एक वोट के अंतर से चुनाव जीत लिया. 19 वोटों में 10 वोट हासिल करने के बाद विनिता पूनिया को खाटू श्यामजी नगर पालिका का अध्यक्ष घोषित किया गया. खाटू श्यामजी का यह चुनाव कई वजहों से चर्चा में रहा. शुरुआत बीजेपी और कांग्रेस की बराबर संख्या वाले सदन से हुई. इसके बाद एक कांग्रेस पार्षद के मतदान से दूर रहने, उनके पति की अपहरण संबंधी शिकायत, चुनाव स्थगित होने और फिर हाईकोर्ट के हस्तक्षेप ने घटनाक्रम को नया मोड़ दिया. अंत में 19 वोटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस की विनिता पूनिया को 10 और बीजेपी की प्रेम देवी को 9 वोट मिले. इस तरह देवरानी-जिठानी के बीच चर्चा में आए इस मुकाबले का फैसला सिर्फ एक वोट से हुआ.
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