Unique village of Rajasthan: भारत देश अपनी परंपराओं और मान्यताओं को काफी बारीकी से मानता है. इसी तरह राजस्थान के कोने-कोने में मान्यताओं की भरमार है. किसी गांव में दूध और छाछ को न बेचने की मान्यता है, तो किसी गांव में दरवाजे न लगाने की. ठीक इसी तरह राजस्थान के ब्यावर जिले के देवमाली गांव के लोग करोड़पति हैं लेकिन इसके बावजूद भी वहां पक्के घर नहीं है. ऐसा नहीं है कि वे पक्के घर नहीं बना सकते बल्कि इसके पीछे उनकी मान्यता है. कहा जाता है कि सदियों से यहां पर भगवान देवनारायण के आशीर्वाद के कारण मिट्टी पत्थर के कच्चे आशियाने ही बनाए जाते हैं. साथ ही इन घरों में कभी ताला नहीं लगाया जाता. इस गांव के सभी लोग शुद्ध शाकाहारी है.
घर ही नहीं मिट्टी से ही बने हैं मंदिर
देवमाली गांव में सभी गुर्जर समाज के लोग रहते हैं. यहां पर हर चीज कच्ची है यानी मिट्टी से बनी हुई है. यहां पर घर ही नहीं मंदिर भी मिट्टी और पत्थरों से बनी हैं. घरों के साथ ही मंदिरों तक की छत पक्की नहीं की जाती. इस गांव के सभी लोग आर्थिक रूप से समृद्ध हैं. इसके बावजूद वे कच्चे घरों में रहते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि इस गांव में कुछ लोगों ने पक्के घर बनाने की कोशिश की. इसके बाद उन्हें किसी न किसी आपदा और अनहोनी से गुजरना पड़ा.
50 सालों से नहीं हुई चोरी
मान्यता है कि जब भगवान देवनारायण यहां पर आए थे, तो ग्रामीणों ने उनकी काफी सेवा की थी. उनकी सेवा से खुश होकर उन्होंने पक्का घर न बनाने का आशीर्वाद दिया. इससे गांव में सुख-समृद्धि के साथ ही शांति बनी रहे. इस गांव की ये मान्यता भी है कि यहां के लोग घरों में ताला नहीं लगाते और इसके बावजूद वहां पर 50 सालों में कभी भी चोरी नहीं हुई है. इस गांव में शराब, मांस और मछली आदि का सेवन भी वर्जित है. जानकारी के अनुसार, देवमाली गांव को ‘बेस्ट टूरिस्ट विलेज’ के रूप में मान्यता दी गई है.