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राजस्थान: कर्ज और वित्तीय दायित्वों को लेकर जारी हालिया रिपोर्ट और आंकड़ों में राजस्थान की स्थिति चर्चा का विषय बना हुआ है. हिंदी भाषी राज्यों में राजस्थान कर्ज लेने के मामले में सबसे आगे खड़ा है. देश के 17 प्रमुख राज्यों की तुलना करें तो प्रति व्यक्ति कर्ज के आधार पर राजस्थान 9वें स्थान पर आ गया है.
पिछले 5 साल में राजस्थान में बैंकों का प्रति व्यक्ति कर्ज 66 फीसदी बढ़ा है, जबकि जमा में सिर्फ 38.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. रिजर्व बैंक के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही तक प्रदेश में प्रति व्यक्ति कर्ज 78,023 रुपए है और जमा 86,383 रुपए रही है. इस तरह प्रति व्यक्ति जमा और ऋण के बीच 8,360 रुपए का अंतर है.
5 सालों में प्रदेश का ऋण-जमा अनुपात 75 फीसदी से बढ़कर 90 फीसदी हो गया है. पिछले साल सरकार ने जो बजट लाया था, उसके बाद से अब तक कर्ज का आंकड़ा आगे बढ़कर 6 लाख 40 हजार करोड़ हो गया है. यानी कर्ज लेने के मामले में राजस्थान टॉप-10 में आ चुका है.
प्रति व्यक्ति कर्ज के मामले में राजस्थान देश के प्रमुख 17 राज्यों में 9वें स्थान पर है. देश में प्रति व्यक्ति जमा 1,65,933 रुपए, कर्ज 1,32,863 रुपए और ऋण-जमा अनुपात 80% है. इसी के साथ हिंदी भाषी राज्यों में प्रति व्यक्ति कर्ज के मामले में राजस्थान सबसे आगे है.
रेवेन्यू कलेक्शन का 14 फीसदी ब्याज
वीत्तिय एक्सपर्ट का मानना है कि राजस्थान पर वर्तमान में 6,40,000 करोड़ रुपए का कर्जा है. ग्रोस रेवेन्यू कलेक्शन का करीब 14 फीसदी ब्याज में जाता है. यदि हम यह ऋण प्रदेश की जनसंख्या के आधार पर देखें तो प्रत्येक व्यक्ति पर 80 हजार रुपए का कर्ज है.
बजट एक्सपर्ट का कहना है कि, राजस्थान में 2021-22 के सत्र में प्रति व्यक्ति औसत कर्ज करीब 45 हजार रुपए हुआ करता था, जो अब और ज्यादा बढ़कर 88 हजार रुपए तक पहुंच चुका है और उनका कहना यह भी है कि आने वाले बजट में यह बढ़कर 90 हजार रुपए के पार भी पहुंच जाएगा