Swami Avimukteshwaranand Controversy: प्रयागराज में मौनी अमावस्या पर स्नान अनुष्ठान को लेकर ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और माघ मेला प्रशासन के बीच टकराव हो गया है. मेला प्रशासन ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पालकी में बैठकर अनुष्ठान के लिए जाने से रोक दिया. जिसके बाद शंकराचार्य के समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प हो गई. इससे नाराज होकर शंकराचार्य ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया, जो अभी भी जारी है.
शंकराचार्य इस बात पर अड़े हैं कि प्रशासन माफी मांगे. उनका कहना है कि बिना माफी मांगे वे अपने आश्रम में प्रवेश नहीं करेंगे.
मेला प्रशासन ने उठाया कड़ा कदम (The fair administration has taken a strict step)
इस बीच, मेला प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है. दरअसल, मेला प्रशासन ने सोमवार (19 जनवरी, 2026) को उन्हें एक नोटिस जारी कर 24 घंटे के अंदर यह साबित करने को कहा कि वे सच में शंकराचार्य हैं. मेला प्रशासन ने अपने इस नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक मामले का जिक्र किया है. माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को भेजे गए नोटिस में पूछा है कि उन्होंने अपने नाम के आगे ‘शंकराचार्य’ की उपाधि का इस्तेमाल क्यों किया है?
मेला प्रशासन ने क्या कहा? (What did the fair administration say?)
मेला प्राधिकरण के इस नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक मामले का जिक्र किया गया है. मेला प्रशासन का कहना है कि चूंकि इस मामले में अभी तक कोई आदेश पारित नहीं हुआ है, इसलिए किसी भी धार्मिक नेता को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य नियुक्त नहीं किया जा सकता. इसके बावजूद, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मेला क्षेत्र में अपने कैंप के बोर्ड पर अपने नाम के आगे ‘शंकराचार्य’ लिखवाया है.
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को कब शंकराचार्य किया गया था नियुक्त? (When was Swami Avimukteshwaranand appointed as Shankaracharya?)
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को उनके गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की मृत्यु के बाद शंकराचार्य नियुक्त किया गया था. शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का 11 सितंबर, 2022 को 99 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था. उन्होंने मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर के झोटेश्वर में परमहंसी गंगा आश्रम में अंतिम सांस ली थी. उनके अंतिम संस्कार से पहले ही उनके उत्तराधिकारियों के नामों की घोषणा कर दी गई थी.
स्वामी स्वरूपानंद की वसीयत के आधार पर उनके प्राइवेट सेक्रेटरी और शिष्य सुबोधानंद महाराज ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ और स्वामी सदानंद को द्वारका शारदा पीठ का प्रमुख नियुक्त किया. यह घोषणा शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के पार्थिव शरीर के सामने की गई. सनातन परंपरा में इन मठों के प्रमुखों को शंकराचार्य कहा जाता है.
संन्यासी अखाड़े ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य मानने से किया इन्कार (The Sanyasi akhara has refused to recognize Swami Avimukteshwaranand as Shankaracharya)
तब से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य बनाए जाने को लेकर विवाद चल रहा है. उस समय, संन्यासी अखाड़े ने उन्हें शंकराचार्य मानने से इनकार कर दिया था. निरंजनी अखाड़े के सचिव और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने दावा किया कि अविमुक्तेश्वरानंद की नियुक्ति नियमों के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि शंकराचार्य की नियुक्ति के लिए एक खास प्रक्रिया होती है, जिसका पालन नहीं किया गया.
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कब-कब विवादों में घिरे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद? (When has Swami Avimukteshwaranand been embroiled in controversies?)
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का विवादों से पुराना नाता रहा है. वो बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के धुर विरोधी रहे है. आइए उनके कुछ पुराने विवादों के बारे में जानते हैं. उन्होंने वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनाने के दौरान दर्जनों पुराने मंदिरों को तोड़े जाने का विरोध किया. इसके अलावा, उन्होंने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में न्योता मिलने पर भी नहीं शामिल हुए और उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के अधूरे होने की आलोचना की. अविमुक्तेश्वरानंद ने केदारनाथ मंदिर से 228 किलो सोना गायब होने का आरोप लगाया और इसे गोल्ड स्कैम कहा. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि अगर योगी CM बने रहे तो स्टेंपेड जैसी घटनाएं दोबारा होंगी. उनका ये राजनीतिक बयान काफी विवादों में रहा.