UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में होना है, लेकिन सभी पार्टियों ने अपनी-अपनी तैयारी शुरू कर दी है. इस बीच, समाजवादी पार्टी ने बड़ा दांव खेला है. सपा के इस कदम को चुनाव की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है. दरअसल, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अखिलेश यादव ने फूलन देवी की बहन रुक्मिणी देवी को महिला विंग का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है. जिससे सपा को आगामी विधानसभा चुनाव में बड़ा फायदा मिल सकता है. प्रदेश की राजनीति में निषाद समाज अब सामाजिक-राजनीतिक ताकत के रूप में उभर रहा है.
प्रदेश में निषाद, कश्यप, केवट, माल्हा, बिन्द, मांझी जातियों की आबादी करीब 4 प्रतिशत के आसपास है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उत्तर प्रदेश की करीब 80 विधानसभा सीटों पर निषाद मतदाताओं की संख्या एक लाख के आसपास है, जबकि 165 सीटों पर चुनाव नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है.
कौन हैं रुक्मिणी देवी?
रुक्मिणी देवी निषाद पूर्व सांसद फूलन देवी की बहन है. इसके साथ-साथ वो उत्तर प्रदेश के जालौन की वरिष्ठ समाजसेवी भी हैं. रुक्मिणी देवी उत्तर प्रदेश के जालौन की रहने वाली है. क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ और व्यापक जनसंपर्क की वजह से सपा ने बड़ी जिम्मेदारी दी है. अब बताया जा रहा है कि रुक्मिणी देवी के सपा में शामिल होने निषाद वोट समाजवादी पार्टी को मिल सकता है.
कितनी सीटों पर निषाद वोटरों का असर?
पूर्वांचल में निषाद समाज की जड़ें मजबूत हैं. गोरखपुर, वाराणसी, आजमगढ़, बलिया, मऊ, जौनपुर, सुल्तानपुर, फतेहपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर, भदोही और प्रयागराज जैसे जिलों में इस समुदाय की अच्छी-खासी मौजूदगी है.
फूलन देवी ने क्यों की थी 20 लोगों की हत्या?
अब आप सोच रहे होंगे कि फूलन देवी की चर्चा हम क्यों कर रहे हैं तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फूलन देवी की बहन रुक्मिणी देवी को सपा ने बड़ी जिम्मेदारी दी है. इसलिए हम फूलन देवी की चर्चा कर रहे हैं. फूलन देवी ने सिकंदरा के बेहमई गांव में 14 फरवरी 1981 को सामूहिक नरसंहार की घटना को अंजाम दिया था. इस घटना में 20 लोगों की मौत हो गई थी. वहीं 6 लोग गंभीर रूप से घायल भी हो गए थे.