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2027 के चुनाव में सपा-कांग्रेस का होगा गठबंधन? 2017 में अखिलेश-राहुल की जोड़ी क्यों हुई फेल, फिर क्यों टूटी जय-वीरू की जोड़ी

Akhilesh Yadav-Rahul Gandhi: उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन हो सकती है. इसके पहले सपा-कांग्रेस ने 2017 का विधानसभा चुनाव साथ लड़ा, लेकिन करारी हार मिली. फिर उसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं किया.

Written By: Sohail Rahman
Last Updated: March 11, 2026 16:59:46 IST

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UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है. हालांकि, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव इस बार पीडीए फॉर्मूले के तहत चुनाव लड़ने का प्लान बना रहे हैं. साल 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे को देखकर लग रहा है कि 2027 का विधानसभा चुनाव भी सपा और कांग्रेस साथ मिलकर ही रहेगी. सपा और कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव एक साथ लड़ा था और सपा 37 सीटों के साथ उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और कांग्रेस को भी 6 सीटें मिली थी.

इन नतीजों को देखते हुए लग रहा है कि 2027 का विधानसभा चुनाव भी समाजवादी पार्टी और कांग्रेस एकसाथ चुनाव लड़ सकती है. हालांकि, इसको लेकर कोई आधिकारिक एलान अभी नहीं हुआ है.

सपा-कांग्रेस के बीच बातचीत जारी

जानकारी सामने आ रही है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन बनाए रखने के लिए बातचीत जारी है. समाजवादी और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने यह पहचानना शुरू कर दिया है कि वे किन सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते हैं, साथ में गठबंधन की संभावित ‘नियम और शर्तों’ पर विचार कर रहे हैं.

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2017 के चुनाव में राहुल-अखिलेश को मिली असफलता

2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में यूपी की जनता ने अखिलेश यादव और राहुल गांधी की जोड़ी को सिरे से नकार दिया और बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए का प्रचंड जीत मिली. इस चुनाव में कांग्रेस ने 114 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन सिर्फ 7 सीटों पर ही जीत मिली. इसके अलावा, समाजवादी पार्टी 311 सीटों पर चुनाव लड़ी, लेकिन सिर्फ 47 सीटों पर ही जीत मिली. इन नतीजों को देखकर साफ कहा जा सकता है कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव की जोड़़ी को उत्तर प्रदेश की जनता ने सिरे से नकार दिया था.

अखिलेश यादव ने क्यों तोड़ी जय-वीरू की जोड़ी?

साल 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी और कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद अखिलेश यादव ने 2022 के विधानसभा चुनाव में अकेले चुनाव लड़ने का निर्णय लिया. इसके अलावा, 2017 के गठबंधन में ये बात साबित हुई कि कांग्रेस का वोट सपा की तरफ ट्रांसफर नहीं हुआ. जिसकी वजह से ग्रामीण इलाकों में सपा को कोई मदद नहीं मिली.

इसके अलावा, 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा बनाम बीजेपी का नैरेटिव चल रहा था. जिसकी वजह से अखिलेश यादव का मानना था कि अगर सपा किसी भी पार्टी से गठबंधन करती है तो इससे सपा बनाम बीजेपी वाला नैरेटिव पूरी तरह से फेल हो जाता. 2017 के मुकाबले 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने क्षेत्रीय दलों पर फोकस किया. 

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Last Updated: March 11, 2026 16:59:46 IST

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UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है. हालांकि, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव इस बार पीडीए फॉर्मूले के तहत चुनाव लड़ने का प्लान बना रहे हैं. साल 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे को देखकर लग रहा है कि 2027 का विधानसभा चुनाव भी सपा और कांग्रेस साथ मिलकर ही रहेगी. सपा और कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव एक साथ लड़ा था और सपा 37 सीटों के साथ उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और कांग्रेस को भी 6 सीटें मिली थी.

इन नतीजों को देखते हुए लग रहा है कि 2027 का विधानसभा चुनाव भी समाजवादी पार्टी और कांग्रेस एकसाथ चुनाव लड़ सकती है. हालांकि, इसको लेकर कोई आधिकारिक एलान अभी नहीं हुआ है.

सपा-कांग्रेस के बीच बातचीत जारी

जानकारी सामने आ रही है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन बनाए रखने के लिए बातचीत जारी है. समाजवादी और कांग्रेस दोनों पार्टियों ने यह पहचानना शुरू कर दिया है कि वे किन सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते हैं, साथ में गठबंधन की संभावित ‘नियम और शर्तों’ पर विचार कर रहे हैं.

गुर्जर वोटरों को अपने पाले में कर पश्चिमी यूपी फतह करना चाह रही सपा, अब किसका खेल बिगाड़ेंगे अखिलेश यादव?

2017 के चुनाव में राहुल-अखिलेश को मिली असफलता

2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में यूपी की जनता ने अखिलेश यादव और राहुल गांधी की जोड़ी को सिरे से नकार दिया और बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए का प्रचंड जीत मिली. इस चुनाव में कांग्रेस ने 114 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन सिर्फ 7 सीटों पर ही जीत मिली. इसके अलावा, समाजवादी पार्टी 311 सीटों पर चुनाव लड़ी, लेकिन सिर्फ 47 सीटों पर ही जीत मिली. इन नतीजों को देखकर साफ कहा जा सकता है कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव की जोड़़ी को उत्तर प्रदेश की जनता ने सिरे से नकार दिया था.

अखिलेश यादव ने क्यों तोड़ी जय-वीरू की जोड़ी?

साल 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी और कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद अखिलेश यादव ने 2022 के विधानसभा चुनाव में अकेले चुनाव लड़ने का निर्णय लिया. इसके अलावा, 2017 के गठबंधन में ये बात साबित हुई कि कांग्रेस का वोट सपा की तरफ ट्रांसफर नहीं हुआ. जिसकी वजह से ग्रामीण इलाकों में सपा को कोई मदद नहीं मिली.

इसके अलावा, 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा बनाम बीजेपी का नैरेटिव चल रहा था. जिसकी वजह से अखिलेश यादव का मानना था कि अगर सपा किसी भी पार्टी से गठबंधन करती है तो इससे सपा बनाम बीजेपी वाला नैरेटिव पूरी तरह से फेल हो जाता. 2017 के मुकाबले 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने क्षेत्रीय दलों पर फोकस किया. 

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