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यूपी के सरकारी कर्मियों में मचा हाहाकार! इस एक वजह से रोकी गई 68 हजार से ज्यादा कर्मचारियों की सैलरी

UP State Employee: उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश के बावजूद लगभग सभी विभागों और ग्रेट के 68 हजार से ज्यादा राज्य कर्मचारियों का वेतन रोक दिया गया है. जिसकी वजह बताई जा रही है कि इन कर्मचारियों ने 31 जनवरी, 2026 की डेडलाइन के बावजूद अपनी चल और अचल संपत्ति का ब्यौरा मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड नहीं किया.

Written By: Sohail Rahman
Last Updated: February 3, 2026 17:48:27 IST

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CM Yogi Adityanath: उत्तर प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार पर अपनी जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी लागू करते हुए 68,000 से ज्यादा राज्य कर्मचारियों की सैलरी रोक दी है, जिन्होंने 31 जनवरी की डेडलाइन तक मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल और अचल संपत्ति का ब्यौरा जमा नहीं किया था. इस पूरे मामले पर अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि जनवरी की सैलरी रोक दी गई है और जब तक जरूरी संपत्ति की घोषणा अपलोड नहीं हो जाती, तब तक यह रोकी रहेगी.

इसके अलावा, उत्तर प्रदेश सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि अगर नियमों का पालन नहीं किया गया तो अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है.

सभी ग्रुप के कर्मचारियों ने नहीं किया डेडलाइन का पालन

मुख्य सचिव एस पी गोयल द्वारा जारी किए गए साफ निर्देशों के बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने डेडलाइन का पालन नहीं किया. नतीजतन अधिकारियों ने संकेत दिया कि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि प्रभावित कर्मचारियों को फरवरी में भी सैलरी मिलेगी. सरकार द्वारा जारी किए गए डेटा से पता चलता है कि यह चूक सभी सर्विस कैटेगरी में हुई है. ग्रुप C के 34,926 कर्मचारियों, ग्रुप D के 22,624 कर्मचारियों, ग्रुप B के 7,204 अधिकारियों और ग्रुप A के 2,628 अधिकारियों ने तय समय सीमा के भीतर अपनी संपत्ति का ब्यौरा जमा नहीं किया.

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आगे क्या कार्रवाई होगी?

लोक निर्माण, राजस्व, शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज कल्याण जैसे प्रमुख विभाग उन विभागों में प्रमुख हैं जिनके कर्मचारियों ने नियमों का पालन नहीं किया, जो इस मुद्दे की गंभीरता को दिखाता है. योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने यह साफ कर दिया है कि मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति का ब्यौरा जमा करना जरूरी है और जब तक यह शर्त पूरी नहीं हो जाती, तब तक सैलरी जारी नहीं की जाएगी, जो सख्त कार्रवाई और प्रशासनिक अनुशासन के अपने संदेश को मजबूत करता है.

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