Mathura Holika Dahan 2026: उत्तर प्रदेश के मथुरा से लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में होली का जश्न शुरू हो गया है. लोग दफ्तरों और अपनी कॉलोनियों में अपनों के साथ होली का जश्न मना रहे हैं. इसी क्रम में मथुरा के फालेन गांव में होलिका दहन किया गया. जहां एक व्यक्ति ने प्रह्लाद का रोल अदा किया. जो कि होलिका की धधकती आग के बीच से चलता हुआ दिखाई दे रहा है. इस दौरान लोग ‘संजू पंडा जो चिता के बीच से चले’ कहते हुए नजर आ रहे हैं.
जानकारी के अनुसार, इसकी तैयारी बसंत पंचमी से शुरू हो जाती है. जो होलिका दहन तक चलती है. उस समय घर और परिवार से लगाव खत्म हो जाता है, और खाना नहीं खाया जाता.
क्या है फालेन गांव की परंपरा?
फालेन गांव एक परंपरा के लिए जाना जाता है. जिसमें एक लोकल पंडा जो एक ब्राह्मण लड़का है, होलिका की धधकती आग से बिना किसी चोट के निकल आता है, भक्त इसे भक्त प्रह्लाद की कृपा मानते हैं. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस आग में प्रह्लाद को कुछ नहीं होता है. जानकारी के अनुसार, इस गांव की परंपरा के मुताबिक चुना हुआ लड़का माघ पूर्णिमा से सख्त ब्रह्मचर्य का पालन करता है, लगातार प्रह्लाद मंदिर में रहता है, जमीन पर सोता है और रोजाना पूजा-पाठ करते हुए फल और दूध पर गुजारा करता है.
#WATCH | Mathura, UP: Following a very long tradition, a person portraying Prahlad walks through the Holika pyre at Phalen village.
Sanju Panda, who walked into the pyre, says, “…The preparation for this starts from Basant Panchami to Holika Dahan… At that time, attachment… pic.twitter.com/nzBKyciEG5
— ANI (@ANI) March 3, 2026
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कैसे की जाती है तैयारी?
इसके बाद, होलिका दहन की रात वह पास के प्रह्लाद कुंड में नहाता है और सिर्फ एक कपड़ा पहनकर ऊंची चिता की ओर बढ़ता है. इसको लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थानीय लोगों ने कहा कि जब वह बिना डरे आग की लपटों से गुज़रता है तो उसकी बहन उसे रास्ता दिखाने के लिए पानी छिड़कती है. दूसरी तरफ, उनके गुरु उनका स्वागत करते हैं और उन्हें मंदिर ले जाते हैं, जबकि देश-विदेश से आए हजारों भक्त और लोग चुपचाप देखते रहते हैं या ‘भक्त प्रहलाद की जय’ के नारे लगाते हैं.