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Ayodhya Manuscript Discovery: अयोध्या में अनोखी प्राचीन धरोहर! 200 साल पुरानी पांडुलिपी में मिली रामायण

Ancient Devanagari script in Ayodhya: अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय के निदेशक संजीव कुमार सिंह ने कहा कि नागरी लिपि धीरे-धीरे विकसित होकर देवनागरी बनी... आज, अक्षर अलग तरह से बनते हैं, जबकि पुरानी लिपि में, उनके आधार खुले होते थे और स्वर चिह्न उनसे जुड़े होते थे. इस आधार पर, मैं कह सकता हूं कि यह पांडुलिपि संभवतः 150 से 200 साल पुरानी है.

Written By: Shristi S
Last Updated: 2026-04-04 19:36:22

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Devanagari Manuscript Ramayana: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में देवनागरी लिपी में लिखी एक दुर्लभ पांडुलिपी मिली है. बताया जा रहा है कि यह पांडुलिपी लगभग 200 साल पुरानी हो सकती है.  इसे जल्द ही संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय को सौंप दिया जाएगा. इसमें रामायण लिखी गई है. जिस वजह से यह और भी ज्यादा खास बन जाती है.
 
अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय के निदेशक संजीव कुमार सिंह ने बताया कि यह पांडुलिपि 150 से 200 साल पुरानी हो सकती है. उन्होंने समझाया कि यह लिपि, जो नागरी से विकसित होकर देवनागरी बनी अपने अक्षरों की बनावट के मामले में आधुनिक लेखन से अलग है; विशेष रूप से, पुराने अक्षरों के आधार खुले होते हैं, और स्वर चिह्न उनसे जुड़े होते हैं.
 

नागरी लिपि धीरे-धीरे विकसित होकर देवनागरी बनी- संजीव कुमार

ANI से बात करते हुए अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय के निदेशक संजीव कुमार सिंह ने कहा कि नागरी लिपि धीरे-धीरे विकसित होकर देवनागरी बनी… आज, अक्षर अलग तरह से बनते हैं, जबकि पुरानी लिपि में, उनके आधार खुले होते थे और स्वर चिह्न उनसे जुड़े होते थे. इस आधार पर, मैं कह सकता हूं कि यह पांडुलिपि संभवतः 150 से 200 साल पुरानी है.




क्या होती है देवनागरी लिपी?

देवनागरी एक प्राचीन, वैज्ञानिक और बाएं से दाएं लिखी जाने वाली भारतीय लिपि है, जिसका उपयोग हिंदी, मराठी, संस्कृत और नेपाली सहित 120 से अधिक भाषाओं के लिए किया जाता है. यह ब्राह्मी लिपि से विकसित हुई है और इसमें 14 स्वर तथा 33 व्यंजन (कुल 47 मुख्य वर्ण) शामिल हैं. इसकी सबसे विशिष्ट विशेषता वर्णों के ऊपर खींची गई क्षैतिज रेखा है, जिसे ‘शिरोरेखा’ कहा जाता है.

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Written By: Shristi S
Last Updated: 2026-04-04 19:36:22

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Devanagari Manuscript Ramayana: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में देवनागरी लिपी में लिखी एक दुर्लभ पांडुलिपी मिली है. बताया जा रहा है कि यह पांडुलिपी लगभग 200 साल पुरानी हो सकती है.  इसे जल्द ही संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय को सौंप दिया जाएगा. इसमें रामायण लिखी गई है. जिस वजह से यह और भी ज्यादा खास बन जाती है.
 
अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय के निदेशक संजीव कुमार सिंह ने बताया कि यह पांडुलिपि 150 से 200 साल पुरानी हो सकती है. उन्होंने समझाया कि यह लिपि, जो नागरी से विकसित होकर देवनागरी बनी अपने अक्षरों की बनावट के मामले में आधुनिक लेखन से अलग है; विशेष रूप से, पुराने अक्षरों के आधार खुले होते हैं, और स्वर चिह्न उनसे जुड़े होते हैं.
 

नागरी लिपि धीरे-धीरे विकसित होकर देवनागरी बनी- संजीव कुमार

ANI से बात करते हुए अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय के निदेशक संजीव कुमार सिंह ने कहा कि नागरी लिपि धीरे-धीरे विकसित होकर देवनागरी बनी… आज, अक्षर अलग तरह से बनते हैं, जबकि पुरानी लिपि में, उनके आधार खुले होते थे और स्वर चिह्न उनसे जुड़े होते थे. इस आधार पर, मैं कह सकता हूं कि यह पांडुलिपि संभवतः 150 से 200 साल पुरानी है.




क्या होती है देवनागरी लिपी?

देवनागरी एक प्राचीन, वैज्ञानिक और बाएं से दाएं लिखी जाने वाली भारतीय लिपि है, जिसका उपयोग हिंदी, मराठी, संस्कृत और नेपाली सहित 120 से अधिक भाषाओं के लिए किया जाता है. यह ब्राह्मी लिपि से विकसित हुई है और इसमें 14 स्वर तथा 33 व्यंजन (कुल 47 मुख्य वर्ण) शामिल हैं. इसकी सबसे विशिष्ट विशेषता वर्णों के ऊपर खींची गई क्षैतिज रेखा है, जिसे ‘शिरोरेखा’ कहा जाता है.

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