UP News: वक्त था साल 2020 का जब चित्रकूट में सभी को एक घटना ने हैरान कर दिया था. एक दंपति की यहां पर ऐसी खौफनाक हरकत के बारे में पता चला कि सभी का माथा ठनक गया था. ये दंपत्ति मासूम छोटे बच्चों के अश्लील वीडियो और फोटो को शूट करके उसे डार्क वेब के माध्यम से विदेशों में बेचकर रुपए कमाते थे.
अब तकरीबन 5 साल बाद इन दोनों पति-पत्नी दोनों को बांदा कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है. सबसे चौकानी वाली बात यह थी कि यह कोई अनपढ़ इंसान ने नहीं किया बल्कि पढ़ा-लिखा सरकारी नौकरी करने वाला इंजीनियर था. आइए जानते हैं शुरू से सबकुछ.
मिली मौत की सजा
रामभवन की पोस्टिंग चित्रकूट में थी और वह सिंचाई विभाग में जेई के पद पर था. उसकी पत्नी दुर्गावती हाउस वाइफ थी. पॉक्सो कोर्ट के माननीय न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा ने कहा- दोनों पति-पत्नी को मरते दम तक फंदे पर लटकाए रखा जाए. कोर्ट ने दोनों आरोपियों को इस साल 18 फरवरी को दोषी करार दिया. वहीं, सीबीआई ने रामभवन को 18 नवंबर, 2020 को मामले में अरेस्ट किया था. दुर्गावती द्वारा गवाहों पर समझौता कराने का प्रेशर भी डाला गया.
यह है मामला
जेई रामभवन अपनी पत्नी दुर्गावती के साथ एक गंदे काम को अंजाम दे रहा था. वे दोनों गरीब घरों के बच्चों को लालच देता और उन्हें अपने जाल में फंसाते थे. फिर पति-पत्नी मिलकर नाबालिगों से कुकर्म करते थे. आरोपी अपने इस गंदे काम के लिए 16 साल तक बच्चों को जाल में फंसाते थे. रामभवन की पत्नी बच्चों के साथ संबंध बनाती थी, जबकि रामभवन उनसे कुकर्म करता था. दोनों आरोपी लैपटॉप के कैमरे के जरिए बच्चों के अश्लील वीडियो बनाते और फोटो खींच लेते थे. उनकी इस गंदी चाल का किसी को कानों कान खबर तक नहीं थी.
जब इसकी शिकायत पुलिस को मिली तो 31 अक्टूबर, 2020 को CBI ने आरोपित रामभवन के खिलाफ केस दर्ज किया गया. उस पर यह आरोप लगा कि वह बच्चों के अश्लील वीडियो/फोटो बनाकर डार्क वेब के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय पेडोफाइल नेटवर्क तक पहुंचाता था. दोनों को गिरफ्तार कर जांच हुई और फिर केस चला. इस मामले में 33 नाबालिगों दरिंदगी का शिकार हुए.
ये सामान हुआ था बरामद
आपको जानकर हैरानी होगी कि इंजीनियर की उम्र 40 साल से भी कम थी. उस पर यूपी के चित्रकूट के अलावा बांदा और अन्य जगहों पर भी बच्चों से यौन शोषण के आरोप लगे. जब सीबीआई ने आरोपियों के घर पर तलाशी ली तो उन्हें 8 लाख कैश, मोबाइल,लैपटॉप, वेब कैमरा, पेन ड्राइव, मैमोरी कार्ड, खिलौनों सहित कई इलेक्ट्रॉनिक स्टोरेज डिवाइस बरामद हुए. आरोपी के ईमेल को खंगाला गया और जांच से पता चला है कि वह यौन सामग्री शेयर करने के लिए कथित तौर पर कई लोगों के संपर्क में था. इस मामले में CBI ने दोनों को अरेस्ट करने के बाद 88वें दिन बाद बांदा कोर्ट में 700 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी. इस चार्जशीट में मेडिकल रिपोर्ट और बच्चों के बयानों को आधार बनाया गया था. कई लोगों के बयान दर्ज किए गए, जिसमें 4 से 42 साल तक के लोग शामिल थे. सभी का मेडिकल टेस्ट और डिजिटल सबूत को आपस में जोड़ा गया था.
अबतक ये हुआ
पॉक्सो कोर्ट के अधिवक्ता कमल सिंह के अनुसार, सीबीआई को इंटरपोल की ओर से जानकारी मिली थी कि एक शख्स 3 विभिन्न नंबरों से 7 से लेकर 18 साल के बच्चों के पोर्न वीडियो बनाकर इंटरनेट पर अपलोड करता है. पुलिस को एक पेन ड्राइव भी मिली, जिसमें बच्चों के वीडियो और फोटो थीं. जब सीबीआई ने उस नंबर को ट्रेस किया गया, तो पता चला कि यह काम जेई रामभवन अपनी पत्नी के साथ कर रहा था.
पुलिस के साथ मिलकर दोनों को अरेस्ट किया गया. मामला बच्चों से जुड़ा था इसलिए सीबीआई ने पॉक्सो कोर्ट में ट्रायल कराया. इस केस में फरवरी 2021 में चार्जशीट लगाई गई. CBI ने पॉक्सो कोर्ट में 74 गवाह पेश किए गए. आज पॉक्सो कोर्ट के जज प्रदीप कुमार मिश्रा ने दंपत्ति को मौक की सजा सुनाई है. साथ में यह भी कहा कि डीएम को एक लेटर लिखा जाए, जिसमें पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख रुपए देने की बात कही है.