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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से आहत जस्टिस पंकज भाटिया, जमानत याचिकाओं की सुनवाई से हटने का अनुरोध

Allahabad High Court: न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने अपने जमानत आदेश के मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से आहत होकर जमानत याचिकाएं न सौंपने का अनुरोध किया है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ के न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने शुक्रवार को जमानत देने के उनके तरीके की सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कड़ी आलोचना किए जाने के बाद जमानत न्यायाधीशों की सूची में शामिल होने से इनकार कर दिया है. उन्होंने कहा हे कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से की गई टिप्पणियों से उनमहें काफी निराशा हुआ है.
न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने कहा कि हालांकि यह सर्वविदित है कि ‘कोई भी न्यायाधीश यह दावा नहीं कर सकता कि उसके आदेश को कभी रद्द या उसमें हस्तक्षेप नहीं किया गया है’, फिर भी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का मुझ पर बहुत ही निराशाजनक प्रभाव पड़ा है.

दहेज के कारण अपनी पत्नी की हत्या का मामला

यह आदेश राकेश तिवारी द्वारा दायर जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान आया. जब मामला न्यायमूर्ति पंकज भाटिया के सामने रखा गया, तो उन्होंने 9 फरवरी को चेतराम वर्मा के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणी का संज्ञान लिया. उस मामले में, न्यायमूर्ति भाटिया ने पिछले साल 10 अक्टूबर को दहेज के कारण अपनी पत्नी की हत्या के आरोपी एक व्यक्ति को जमानत करा दी थी.
शिकायतकर्ता ने जमानत आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसने न्यायमूर्ति पंकज भाटिया के फैसले को कड़ी टिप्पणी के साथ रद्द कर दिया गया.

विवादित मामले में चौंकाने वाले आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने कहना है कि, 10 अक्टूबर, 2025 का विवादित मामले में आदेश अब तक के सबसे चौंकाने वाले और निराशाजनक आदेशों में से एक है. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि हाई कोर्ट ने केवल इस बात पर विचार किया था कि आरोपी 27 जुलाई, 2025 से जेल में है और उसका कोई पहले का आपराधिक इतिहास नहीं है, और उसके बाद उसे जमानत दे दी गई थी.

हाई कोर्ट के फैसला रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, दहेज और हत्या जैसे गंभीर मामलों के अपराध में आरोपी के पक्ष में जमानत देने के लिए हाई कोर्ट ने अपने विवेक का प्रयोग करते समय किन बातों का ध्यान रखा? हाई कोर्ट के फैसले को रद्द करने के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका पर आदेश पारित करने के तरीके की जांच के लिए एक कॉपी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को भेजी थी.
इससे नाराज होकर, न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने जमानत याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया और हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया कि उन्हें जमानत संबंधी मामलों को नहीं सौंपने का अनुरोध किया है.

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