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Kashi Plus Banaras News: इस ऐप ने आसान की मरीजों की लाइफ, BHU के डॉक्टरों की अनोखी पहल की हो रही तारीफ

Kashi Plus Banaras News: काशी प्लस (Kashi+) एप्लिकेशन को बनाने में उन्हें चार साल लगे. यह एप्लिकेशन मरीजों को उनके सभी सवालों के जवाब ढूंढने में मदद करता है. जानें पूरी बात.

Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: January 11, 2026 12:37:52 IST

Kashi Plus Banaras News: बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (IMS-BHU) के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के डॉक्टरों ने मरीजों की सुविधा के लिए एक अनोखा प्लेटफॉर्म बनाया है. काशी प्लस (Kashi+) एप्लिकेशन को बनाने में उन्हें चार साल लगे. यह एप्लिकेशन मरीजों को उनके सभी सवालों के जवाब ढूंढने में मदद करता है, जिसमें हॉस्पिटल के डॉक्टरों, आउटपेशेंट डिपार्टमेंट (OPD) के समय, टेस्ट शेड्यूल, हॉस्पिटल काउंटरों की जानकारी और टेस्ट रिपोर्ट मिलने के समय जैसी बातें शामिल हैं.

यह ऐप 10 लाख रुपये की लागत से बनाया गया है और यह मरीजों को कई फायदे मुफ्त में देता है. यह ऐप न सिर्फ IMS-BHU बल्कि वाराणसी जिले के सभी बड़े सरकारी अस्पतालों के बारे में भी जानकारी देता है. इसके सफल लॉन्च के बाद इसे लखनऊ के सभी बड़े सरकारी अस्पतालों में भी उपलब्ध कराने की योजना है.

मरीजों के लिए काम आसान

IMS-BHU के डॉ. कमलेश चौहान ने बताया कि MBBS की पढ़ाई के दौरान उन्हें मरीजों को होने वाली समस्याओं के बारे में पता चला. उन्होंने बताया, “रोजाना करीब 8,000 से 10,000 लोग हॉस्पिटल आते हैं, जो तीन से चार राज्यों से होते हैं. मरीज हॉस्पिटल आते थे लेकिन उन्हें पता नहीं होता था कि डॉक्टर उपलब्ध है या नहीं. दूर से आने वाले मरीजों को अक्सर इन चीजों के बारे में जानकारी नहीं होती. उनके पास आयुष्मान कार्ड होते हैं और वे कई योजनाओं के तहत कवर होते हैं लेकिन उन्हें जानकारी नहीं होती. अक्सर, हॉस्पिटल इन सेवाओं का प्रचार भी नहीं करते ताकि लोग इनका फायदा उठा सकें.”

Rohit vs Virat ODI Record 2

बीएचयू के छात्रों ने बनाया एप

उन्होंने आगे कहा, “इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए मैंने एक एप्लिकेशन बनाने के बारे में सोचा. IIT-BHU के छात्रों की मदद से हमने यह काशी प्लस एप्लिकेशन बनाया है. यह मुख्य रूप से सर सुंदरलाल हॉस्पिटल के साथ-साथ ट्रॉमा सेंटर, कबीर चौरा हॉस्पिटल, रामनगर हॉस्पिटल और लाल बहादुर शास्त्री हॉस्पिटल में मरीजों की जरूरतों को पूरा कर रहा है.” डॉ. चौहान ने दावा किया कि टाटा मेमोरियल कैंसर इंस्टीट्यूट की ब्रांच भी इस ऐप में शामिल है और अब तक करीब 10,000 लोगों ने इसे डाउनलोड किया है.

उन्होंने कहा, “हमने COVID-19 महामारी के दौरान इसका पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया था. अब हम इसे दूसरे अस्पतालों तक फैलाना चाहते हैं ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग इसकी सेवाओं का फायदा उठा सकें. यह ऐप सबसे नज़दीकी सरकारी हॉस्पिटल के बारे में जानकारी देगा और लोगों को यह तय करने में मदद करेगा कि उन्हें किस हॉस्पिटल में जाना है.” मरीज़ों की समस्या सुनने के बाद ऐप उन्हें गाइड करता है कि उन्हें किस डिपार्टमेंट में जाना है. किस समय जाना है, कौन से टेस्ट करवाने हैं और रिज़ल्ट कब मिलेंगे.

मरीजों को मिलेगी पूरी जानकारी

डॉ. चौहान ने कहा, “मरीज़ को शुरू से आखिर तक सारी जानकारी दी जाती है. अगर मरीज को एडमिट करना है, तो यह भी बताया जाता है.” उन्होंने बताया कि तीन साल पहले एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया था, लेकिन एप्लीकेशन एक साल बाद लागू किया गया.
इस ऐप को करीब 20 लोगों की टीम मैनेज कर रही है. इस बीच काशी+ ऐप की को-फ़ाउंडर डॉ. शिवानी डोगरा ने कहा, “हमारा भविष्य का प्लान इसमें लखनऊ के तीन बड़े अस्पतालों को जोड़ना है. इसे SGPGI, KGMU और राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भी इंस्टॉल किया जाएगा. रोज़ाना करीब 200 से 300 मरीज़ ऐप पर आ रहे हैं.”

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Written By: Pushpendra Trivedi
Last Updated: January 11, 2026 12:37:52 IST

Kashi Plus Banaras News: बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (IMS-BHU) के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के डॉक्टरों ने मरीजों की सुविधा के लिए एक अनोखा प्लेटफॉर्म बनाया है. काशी प्लस (Kashi+) एप्लिकेशन को बनाने में उन्हें चार साल लगे. यह एप्लिकेशन मरीजों को उनके सभी सवालों के जवाब ढूंढने में मदद करता है, जिसमें हॉस्पिटल के डॉक्टरों, आउटपेशेंट डिपार्टमेंट (OPD) के समय, टेस्ट शेड्यूल, हॉस्पिटल काउंटरों की जानकारी और टेस्ट रिपोर्ट मिलने के समय जैसी बातें शामिल हैं.

यह ऐप 10 लाख रुपये की लागत से बनाया गया है और यह मरीजों को कई फायदे मुफ्त में देता है. यह ऐप न सिर्फ IMS-BHU बल्कि वाराणसी जिले के सभी बड़े सरकारी अस्पतालों के बारे में भी जानकारी देता है. इसके सफल लॉन्च के बाद इसे लखनऊ के सभी बड़े सरकारी अस्पतालों में भी उपलब्ध कराने की योजना है.

मरीजों के लिए काम आसान

IMS-BHU के डॉ. कमलेश चौहान ने बताया कि MBBS की पढ़ाई के दौरान उन्हें मरीजों को होने वाली समस्याओं के बारे में पता चला. उन्होंने बताया, “रोजाना करीब 8,000 से 10,000 लोग हॉस्पिटल आते हैं, जो तीन से चार राज्यों से होते हैं. मरीज हॉस्पिटल आते थे लेकिन उन्हें पता नहीं होता था कि डॉक्टर उपलब्ध है या नहीं. दूर से आने वाले मरीजों को अक्सर इन चीजों के बारे में जानकारी नहीं होती. उनके पास आयुष्मान कार्ड होते हैं और वे कई योजनाओं के तहत कवर होते हैं लेकिन उन्हें जानकारी नहीं होती. अक्सर, हॉस्पिटल इन सेवाओं का प्रचार भी नहीं करते ताकि लोग इनका फायदा उठा सकें.”

Rohit vs Virat ODI Record 2

बीएचयू के छात्रों ने बनाया एप

उन्होंने आगे कहा, “इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए मैंने एक एप्लिकेशन बनाने के बारे में सोचा. IIT-BHU के छात्रों की मदद से हमने यह काशी प्लस एप्लिकेशन बनाया है. यह मुख्य रूप से सर सुंदरलाल हॉस्पिटल के साथ-साथ ट्रॉमा सेंटर, कबीर चौरा हॉस्पिटल, रामनगर हॉस्पिटल और लाल बहादुर शास्त्री हॉस्पिटल में मरीजों की जरूरतों को पूरा कर रहा है.” डॉ. चौहान ने दावा किया कि टाटा मेमोरियल कैंसर इंस्टीट्यूट की ब्रांच भी इस ऐप में शामिल है और अब तक करीब 10,000 लोगों ने इसे डाउनलोड किया है.

उन्होंने कहा, “हमने COVID-19 महामारी के दौरान इसका पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया था. अब हम इसे दूसरे अस्पतालों तक फैलाना चाहते हैं ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग इसकी सेवाओं का फायदा उठा सकें. यह ऐप सबसे नज़दीकी सरकारी हॉस्पिटल के बारे में जानकारी देगा और लोगों को यह तय करने में मदद करेगा कि उन्हें किस हॉस्पिटल में जाना है.” मरीज़ों की समस्या सुनने के बाद ऐप उन्हें गाइड करता है कि उन्हें किस डिपार्टमेंट में जाना है. किस समय जाना है, कौन से टेस्ट करवाने हैं और रिज़ल्ट कब मिलेंगे.

मरीजों को मिलेगी पूरी जानकारी

डॉ. चौहान ने कहा, “मरीज़ को शुरू से आखिर तक सारी जानकारी दी जाती है. अगर मरीज को एडमिट करना है, तो यह भी बताया जाता है.” उन्होंने बताया कि तीन साल पहले एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया था, लेकिन एप्लीकेशन एक साल बाद लागू किया गया.
इस ऐप को करीब 20 लोगों की टीम मैनेज कर रही है. इस बीच काशी+ ऐप की को-फ़ाउंडर डॉ. शिवानी डोगरा ने कहा, “हमारा भविष्य का प्लान इसमें लखनऊ के तीन बड़े अस्पतालों को जोड़ना है. इसे SGPGI, KGMU और राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भी इंस्टॉल किया जाएगा. रोज़ाना करीब 200 से 300 मरीज़ ऐप पर आ रहे हैं.”

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