Meerut News: मेरठ में एक महिला ने बंद नाला साफ कराने के लिए चली ऐसी चाल कि पूरा प्रशासन दंग रह गया! सोशल मीडिया पर वायरल इस 'फेक रेस्क्यू' की पीछे की सच्चाई आपको हैरान कर देगी.
प्रशासन को झूठ बोलकर साफ करवाया नाला
Uttar Pradesh News: हिंदी में एक कहावत है ‘जब सीधी उंगली से घी न निकले तो उंगली टेढ़ी करनी पड़ती है’, उत्तरप्रदेश के मेरठ में यह कहावत चरितार्थ होता हुआ लाखों लोगों ने देखा. दरअसल इन दिनों एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां एक महिला ने जाम पड़े नाले की सफाई करवाने के लिए ‘फेक इमरजेंसी’ का नाटक किया. सोमवार 2 फरवरी की रिपोर्ट्स के अनुसार, महिला ने अधिकारियों को सूचना दी कि एक बच्चा पड़ोस के एक खुले और कचरे से भरे नाले में गिर गया है. इस खबर के मिलते ही पुलिस और नगर निगम की टीमें तुरंत मौके पर पहुंची और आनन-फानन में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया. अधिकारियों ने करीब तीन घंटे तक नाले की गहराई में जाकर तलाशी ली और उस दौरान भारी मात्रा में जमा कीचड़ और कूड़ा भी बाहर निकाला गया. हालांकि, बाद में यह पता चला कि कोई भी बच्चा नाले में नहीं गिरा था. यह पूरी कवायद एक हताश नागरिक की कोशिश थी जो एक ढील ढाल प्रशासन से तंग आ चुका था. ताकि प्रशासन उस नाले को साफ करे, जिसकी शिकायत लंबे समय से सुनी नहीं जा रही थी. (Viral Video)
इस घटना पर इंटरनेट पर लोगों की राय बंटी हुई नजर आ रही है. जहां कुछ लोग महिला के इस कदम को ‘स्मार्ट’ बता रहे हैं और इसे जनता की बेबसी का हाल मान रहे हैं, वहीं कई लोग इसे खतरनाक भी कह रहे हैं. सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा कि जब बुनियादी नागरिक सुविधाओं के लिए भी लोगों को इमरजेंसी का नाटक करना पड़े, तो यह प्रशासन के लिए शर्मनाक है. वहीं, कुछ विशेषज्ञों और नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यह ‘भेड़िया आया’ वाली स्थिति पैदा कर सकता है. अगर भविष्य में सच में कोई हादसा होता है, तो हो सकता है कि अधिकारी इसे भी एक नाटक समझकर गंभीरता से न लें. लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन के पास संसाधन मौजूद थे, तो उन्होंने पहले ही शिकायत पर कार्रवाई क्यों नहीं की?
मजेदार बात तो यह है कि इस नाले की पहले की और बाद वाली तस्वीर खूब वायरल हो रही है. सफाई के बाद नाला भी देखने में सुन्दर लग रहा है. जो एक संतुष्टि वाली फीलिंग इंटरनेट यूजर को दे रहा है. ये भी एक वजह है कि यह तस्वीर और यह इंसिडेंट सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है.
यह पूरी घटना हमारे शहरों के खराब बुनियादी ढांचे और सिस्टम की खामियों को उजागर करती है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स की एक रिपोर्ट बताती है कि मेरठ जैसे टियर-2 शहरों में 60 से 80 प्रतिशत नाले फंड की कमी और खराब निगरानी के कारण बंद पड़े रहते हैं। यह मामला सीधे तौर पर यह दिखाता है कि जब सरकारी तंत्र आम शिकायतों पर कान नहीं धरता, तो जनता को अपनी बात मनवाने के लिए ऐसे चरम और विवादित रास्ते अपनाने पड़ते हैं। फिलहाल यह वीडियो एक बड़ी बहस का केंद्र बना हुआ है.
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