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Ayodhya: सीलबंद अस्पताल फिर से कैसे हुआ चालू? बिना डॉक्टर के नर्स ने कर दी डिलीवरी, मां-बच्चे दोनों…

कोतवाली नगर के परमेश्वरी देवी अस्पताल में लापरवाही से मां-बच्चे की मौत. बिना डॉक्टर के हुई डिलीवरी, पहले भी सील हो चुका है अस्पताल. प्रशासन की जांच शुरू. पढ़ें पूरी खबर.

Written By: Shivani Singh
Last Updated: 2026-04-02 18:54:07

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Uttar pradesh News: कोतवाली नगर क्षेत्र के बल्लाहाता इलाके में स्थित परमेश्वरी देवी मेमोरियल अस्पताल में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब प्रसव के दौरान मां और नवजात शिशु, दोनों की मृत्यु हो गई. इस घटना के बाद मचे भारी हंगामे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग तुरंत हरकत में आया और CMO कार्यालय की एक टीम ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया. इस जांच में अस्पताल के भीतर घोर लापरवाही और गंभीर कमियों का खुलासा हुआ है. 

परिजनों ने अस्पताल पर लगाया गंभीर आरोप

परिवार वालों का आरोप है कि डिलीवरी के समय न तो डॉ. अंजलि श्रीवास्तव और न ही कोई अन्य डॉक्टर मौजूद था. उनका दावा है कि डिलीवरी एक महिला कर्मचारी ने करवाई थी. बताया जा रहा है कि इस प्रक्रिया के दौरान घोर लापरवाही बरती गई, ज्जिस्की वजह से मां और नवजात दोनों की मौत हो गई. इसके बाद, गुस्साए परिवार वालों ने अस्पताल, रिकाबगंज पुलिस चौकी और पोस्टमार्टम हाउस में जमकर हंगामा किया. पुलिस मौके पर पहुंची, लोगों को समझा-बुझाकर शांत किया और उन्हें आश्वासन दिया कि उचित कार्रवाई की जाएगी. स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) अश्विनी पांडे ने बताया कि मामले की जांच चल रही है और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. शव का पोस्टमार्टम कर दिया गया है.

शादी को अभी एक साल ही हुआ था

सुरेश यादव ने बताया कि उनकी शादी 18 अप्रैल 2025 को इनायत नगर इलाके के मुकीमपुर की रहने वाली सोनी यादव से हुई थी. शादी के बाद से उनका परिवार खुशी-खुशी साथ रह रहा था. उनकी पत्नी ने एक बेटे को जन्म दिया था. पत्नी के गर्भवती होने के बाद परिवार में खुशियां दोगुनी हो गई थीं. हालांकि, अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण उनके घर की खुशियाँ बिखर गईं. उनका परिवार टूट गया है. उन्होंने आरोपी प्रशासक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.

एक साल पहले भी अस्पताल सील किया गया था

अनियमितताओं का पता चलने पर, तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. सुशील कुमार बनियान ने 16 मई 2025 को अस्पताल को सील कर दिया था. उस समय, नसबंदी प्रक्रियाओं के दौरान लापरवाही से जुड़ा एक मामला सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई थी. जब मामला शांत हो गया तो अस्पताल का कामकाज गुपचुप तरीके से फिर से शुरू कर दिया गया. इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग के कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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Last Updated: 2026-04-02 18:54:07

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Uttar pradesh News: कोतवाली नगर क्षेत्र के बल्लाहाता इलाके में स्थित परमेश्वरी देवी मेमोरियल अस्पताल में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब प्रसव के दौरान मां और नवजात शिशु, दोनों की मृत्यु हो गई. इस घटना के बाद मचे भारी हंगामे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग तुरंत हरकत में आया और CMO कार्यालय की एक टीम ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया. इस जांच में अस्पताल के भीतर घोर लापरवाही और गंभीर कमियों का खुलासा हुआ है. 

परिजनों ने अस्पताल पर लगाया गंभीर आरोप

परिवार वालों का आरोप है कि डिलीवरी के समय न तो डॉ. अंजलि श्रीवास्तव और न ही कोई अन्य डॉक्टर मौजूद था. उनका दावा है कि डिलीवरी एक महिला कर्मचारी ने करवाई थी. बताया जा रहा है कि इस प्रक्रिया के दौरान घोर लापरवाही बरती गई, ज्जिस्की वजह से मां और नवजात दोनों की मौत हो गई. इसके बाद, गुस्साए परिवार वालों ने अस्पताल, रिकाबगंज पुलिस चौकी और पोस्टमार्टम हाउस में जमकर हंगामा किया. पुलिस मौके पर पहुंची, लोगों को समझा-बुझाकर शांत किया और उन्हें आश्वासन दिया कि उचित कार्रवाई की जाएगी. स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) अश्विनी पांडे ने बताया कि मामले की जांच चल रही है और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. शव का पोस्टमार्टम कर दिया गया है.

शादी को अभी एक साल ही हुआ था

सुरेश यादव ने बताया कि उनकी शादी 18 अप्रैल 2025 को इनायत नगर इलाके के मुकीमपुर की रहने वाली सोनी यादव से हुई थी. शादी के बाद से उनका परिवार खुशी-खुशी साथ रह रहा था. उनकी पत्नी ने एक बेटे को जन्म दिया था. पत्नी के गर्भवती होने के बाद परिवार में खुशियां दोगुनी हो गई थीं. हालांकि, अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण उनके घर की खुशियाँ बिखर गईं. उनका परिवार टूट गया है. उन्होंने आरोपी प्रशासक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.

एक साल पहले भी अस्पताल सील किया गया था

अनियमितताओं का पता चलने पर, तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. सुशील कुमार बनियान ने 16 मई 2025 को अस्पताल को सील कर दिया था. उस समय, नसबंदी प्रक्रियाओं के दौरान लापरवाही से जुड़ा एक मामला सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई थी. जब मामला शांत हो गया तो अस्पताल का कामकाज गुपचुप तरीके से फिर से शुरू कर दिया गया. इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग के कामकाज पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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