<

‘आंधीपुर’ का वह दिग्गज जो रिक्शे से गया सीएम पद की शपथ लेने, इस्तीफे का अंदाज भी था निराला

Ram Naresh Yadav Unique chief Minister Oath Story: राम नरेश यादव वर्ष 1977 से 1979 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे. इसके बाद 2011-2016 के बीच मध्य प्रदेश के राज्यपाल पद पर रहे. वह अपनी सादगी के लिए प्रसिद्ध थे.

Ram Naresh Yadav Unique chief Minister Oath Story: आज के दौर में नेता चर्चा में रहने और प्रसिद्धि पाने के लिए हर तरह के प्रपंच करते हैं. अंदर से भले ही ईमानदार और शरीफ ना हों, लेकिन लबादा कई बार नकली जरूर ओढ़ लेते हैं. इस सबके इतर एक दौर वह भी था जब महात्मा गांधी ने लोगों को सत्य, अहिंसा और सादगी का मंत्र दिया था. इस मंत्र का जाप दशकों तक भारतीय राजनेताओं ने किया. महात्मा गांधी के आदर्श आज भी जिंदा हैं, लेकिन उनकी तरह सादगी से जीने वाले नेता आटे में नमक के बराबर रह गए हैं. हम ‘पॉलिटिकल किस्सा’ के इस अंक में जिक्र करेंगे कांग्रेस के दिग्गज नेता और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री राम नरेश यादव का, जिन्होंने भारतीय राजनीति में सादगी की मिसाल पेश की. वर्ष 1977 में वह मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने रिक्शा से गए थे. करीब 2 साल बाद उन्होंने इस्तीफा दिया तो भी मिसाल पेश की. दरअसल, राम नरेश यादव 27 फरवरी, 1979 को इस्तीफा देने के लिए भी लखनऊ मेल से उतरकर रिक्शे से राजभवन गए थे.

पिता के संस्कारों से सीखा सेवाभाव

1 जुलाई, 1928 को आंधीपुर गांव (आजमगढ़) में जन्में रामनरेश यादव का बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक था. वह बचपन से ही महात्मा गांधी में आस्था रखने वाले सामान्य इंसान थे. महात्मा गांधी में उनकी अगाध श्रद्धा थी. दरअसल, इनके परिवार में पढ़ाई-लिखाई का चलन था. इनके पिता गया प्रसाद तो महात्मा गांधी के साथ-साथ स्वतंत्रता आंदोलन के अहम किरदार पंडित जवाहरलाल नेहरू और डॉ. राममनोहर लोहिया के अनुयायी भी थे. घर में इसका प्रभाव भी पड़ा. उनका भी झुकाव देश की समस्याओं की ओर गया. बताया जाता है कि इनके पिता भी बेहद सहृदय इंसान थे. उन्होंने हमेशा लोगों की मदद की. परिवार में अपने पिता को ऐसा करता देखकर राम नरेश यादव के मन में भी यह जज्बा जगा. बचपन से ही उनका मन समाज सेवा की ओर था. शायद यही वजह है कि उन्होंने राजनीति को समाज सेवा के लिए चुना.

इमरजेंसी के विरोध में उतरे, खाईं लाठियां

राम नरेश यादव ने कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही डॉ. राममनोहर लोहिया को पढ़ना, जानना और उनके विचारों से जुड़ना शुरू कर दिया. वाराणसी हिंदू विश्वविद्यालय से बीए, एमए और एलएलबी करने के दौरान उन्होंने समाज में बढ़ती गैर बराबरी और असमानता को गहरे स्तर तक महसूस किया.  पढ़ाई के दौरान ही रामनरेश यादव का रुझान राजनीति में बढ़ता गया. उन्हें समाजवादी विचारधारा ने बहुत प्रभावित किया.

करीब 2 साल तक जेल में रहे बंद

जाति तोड़ो, बराबरी के मौके, बढ़े नहर रेट और किसानों की लगान माफी के लिए लड़ने की ठानी. वह समान शिक्षा, आमदनी और खर्च की सीमा बांधने और जमीन जोतने वालों को उनका अधिकार दिलाने के भी पैरोकार थे. इसके लिए कई बार उन्होंने मंचों से अपनी बात और विचार भी रखे थे. बहुत कम लोग जानते होंगे कि उन्होंने ‘अंग्रेजी हटाओ’ आंदोलन के दौरान कई बार गिरफ्तारियां दीं. 1975 में देश में इमरजेंसी लगी तो वह मैदान में  उतर गए. इस दौरान वह जून 1975 से फरवरी 1977 तक आजमगढ़ जेल के अलावा केंद्रीय जेल नैनी प्रयागराज (इलाहाबाद) में भी बंद रहे.

कॉलेज में छात्रों को पढ़ाया भी

शिक्षा की बात करें तो 1953 में उन्होंने वाराणसी हिंदू विश्वविद्यालय से बीए, एमए और एलएलबी की. इसके बाद अपने गृह जिले आजमगढ़ में वकालत की शुरुआत की. वह लोगों को न्याय दिलाने के लिए वकालत के क्षेत्र में सक्रिय हुए. बीए, एमए और एलएलबी की पढ़ाई करने के दौरान वाराणसी हिंदू विश्वविद्यालय में वह छात्र संघ की राजनीति से भी जुड़े रहे. राम नरेश यादव पड़ोसी जिले में जौनपुर के पट्टी के नरेंद्रपुर इंटर कॉलेज में लेक्चरार भी रहे. इस दौरान उन्हें छात्रों से संवाद और उनकी समस्याएं जानने का भी मौका मिला. 

मुलायम सिंह से बड़े नेता थे राम नरेश यादव

इसी दौरान रामनरेश की दिलचस्पी राजनीति में बढ़ी. उम्र में बड़े के साथ ही राम नरेश यादव समाजवादी नेता और यूपी के पूर्व सीएम मुलायम सिंह यादव से बड़े और प्रभावी नेता थे. राम नरेश यादव 1970 के दशक में किसानों के बड़े और प्रभावी नेता के तौर पर उभरे. राजनीति के जानकार भी मानते हैं कि राम नरेश यादव बेशक मुलायम सिंह से बड़े नेता माने जाते थे. यही वजह है कि 1977 में चौधरी चरण सिंह ने लगातार 3 बार से विधायक रहे मुलायम सिंह यादव की बजाय रामनरेश को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया था. उस दौरान रामनरेश यादव आजमगढ़ सीट से सांसद थे. राम नरेश यादव को सादा जीवन जीने के कारण ‘पूर्वांचल का गांधी’ कहा गया. इसके साथ वह उत्तर प्रदेश के पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री (जनता पार्टी से) बने. उनका कार्यकाल 23 जून 1977 से 28 फरवरी 1979 रहा.  

सादगी ऐसी की भारतीय राजनीति में बन गए मिसाल

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय राजनीति के दिग्गज नेता राम नरेश यादव अपनी सादगी के लिए प्रदेश के बाहर भी प्रसिद्ध थे. सार्वजनिक जीवन में हमेशा गांधीवादी टोपी लगाने वाले राम नरेश यादव ने 23 जून, 1977 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. बहुत कम लोग जानते हैं कि वह सामान्य से रिक्शे पर बैठकर राजभवन शपथ लेने पहुंचे थे. वह उसे रिक्शा चालक को भी यह नहीं पता था कि वह यूपी के भावी सीएम को लेकर जा रहा, जो कुछ घंटों बाद मुख्यमंत्री बनेगा. सादगी का सिलसिला जारी रहा. करीब दो साल बाद 27 फरवरी 1979 को उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. उस समय की राजनीति में एक्टिव पत्रकारों के मुताबिक,  मुख्यमंत्री राम नरेश यादव पहले लखनऊ मेल से उतरकर रिक्शे से राजभवन गए और राज्यपाल का इस्तीफा सौंपा. वह जनता पार्टी से यूपी के 10वें मुख्यमंत्री बने थे.

कांग्रेस में हुए शामिल, लगा दाग तो दिया इस्तीफा

यह उनकी सादगी ही थी कि जनता पार्टी की सरकार के दौरान वह यूपी के मुख्यमंत्री बने. इसके बाद उन्होंने एटा के निधौली कलां से चुनाव जीता था, वह भी बड़ी आसानी से. कुछ सालों बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए. वर्ष 2011 से 2016 तक मध्य प्रदेश के राज्यपाल भी रहे. सादगी और ईमानदारी के परिचायक राम नरेश यादव का नाम व्यापम घोटाले में आया तो उन्होंने राज्यपाल का पद छोड़ दिया था. लंबी बीमारी के बाद 22 नवंबर 2016 को उनका लखनऊ में निधन हो गया, लेकिन जाते-जाते उन्होंने सादगी की वह मिसाल पेश की, जिसे लोग आज भी सराहते हैं. 

यह भी पढ़ें: राजीव गांधी को ‘मजबूर’ करने वाला वह नेता, जिसे ‘हत्या-एक्स्ट्रामैरिटल अफेयर’ के आरोप ने किया बर्बाद!

JP YADAV

जेपी यादव डेढ़ दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वह प्रिंट और डिजिटल मीडिया, दोनों में समान रूप से पकड़ रखते हैं. मनोरंजन, साहित्य और राजनीति से संबंधित मुद्दों पर कलम अधिक चलती है. अमर उजाला, दैनिक जागरण, दैनिक हिंदुस्तान, लाइव टाइम्स, ज़ी न्यूज और भारत 24 जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं.कई बाल कहानियां भी विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हैं. सामाजिक मुद्दों पर 'रेडी स्टडी गो' नाटक हाल ही में प्रकाशित हुआ है. टीवी और थिएटर के प्रति गहरी रुचि रखते हुए जेपी यादव ने दूरदर्शन पर प्रसारित धारावाहिक 'गागर में सागर' और 'जज्बा' में सहायक लेखक के तौर पर योगदान दिया है. इसके अलावा, उन्होंने शॉर्ट फिल्म 'चिराग' में अभिनय भी किया है. वर्तमान में indianews.in में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत हैं.

Recent Posts

Anant Singh Viral Video: ‘ई सब हम जानबो नैय करते हैं’, अनंत सिंह का ‘देसी’ अंदाज फिर हुआ वायरल!

Anant Singh Viral Video: 'ई सब हम जानबो नैय करते हैं', पर्यावरण पर अनंत सिंह…

Last Updated: April 2, 2026 22:26:48 IST

बेतिया में चौकीदार का बेटा बना कानून का भक्षक! रात के अंधेरे में देसी कट्टा लिए लोगों को धमकाया, FIR दर्ज

Bihar Crime News: बेतिया के बैरिया थाना क्षेत्र में कट्टा लहराते हुए चौकीदार का बेटा…

Last Updated: April 2, 2026 22:05:03 IST

Odisha में हड़कंप! बैंक के पास दिखा 12 फीट का किंग कोबरा, अफरा-तफरी के बीच इस तरह हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन

Chikiti King Cobra Rescue: चिकिटी एनएसी क्षेत्र में उस वक्त हडकंप मच गया जब लोगों…

Last Updated: April 2, 2026 21:00:34 IST

सिर्फ स्किन के लिए नहीं, मुल्तानी मिट्टी से घर के वास्तु दोष भी करें दूर, जानें आसान और असरदार टिप्स

Multani Mitti Astrology Remedies Home:मुल्तानी मिट्टी सिर्फ त्वचा के लिए नहीं, घर की पॉजिटिविटी बढ़ाने…

Last Updated: April 2, 2026 20:37:25 IST

Vikat Sankashti Chaturthi 2026: अप्रैल में विकट संकष्टी चतुर्थी कब पड़ रही है? नोट करें तारीख, शुभ मुहूर्त

Vaishakh Sankashti Chaturthi 2026: हर साल चार मुख्य बड़ी चतुर्थी आती है,चतुर्थी के दिन विशेष…

Last Updated: April 2, 2026 20:39:32 IST

CSK vs PBKS: 3 अप्रैल को पंजाब-चेन्नई की भिड़ंत, इन 5 खिलाड़ियों पर रहेंगी नजरें, दबाव में गायकवाड़

Players to Watch in CSK vs PBKS Match: चेन्नई सुपर किंग्स अपने घरेलू मैदान चेपॉक…

Last Updated: April 2, 2026 19:52:12 IST