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Shahjahanpur Controversy: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में हिंदू धर्म के अपमान से जुड़ा एक मामला सामने आया है. एक मुस्लिम युवक ने सोशल मीडिया पर रील बनाई जिसमें, उसने हिंदू देवी-देवताओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां की और ऑनलाइन पोस्ट करके उसने हिंदू समुदाय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई.
इस घटना के जवाब में, स्थानीय निवासियों ने तुरंत आरोपी युवकों को पकड़ लिया, उन्हें एक मंदिर ले गए और सजा के तौर पर उनसे उठक-बैठक करवाई. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रही है. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें की पूरा मामला क्या है.
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, यह घटना जिले के निगोही पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले चौधेरा गांव के एक मंदिर में हुई. इसी जगह पर मुस्लिम युवकों ने देवी-देवता के बारे में अपमानजनक टिप्पणियां करते हुए वह रील बनाई थी. पता चला है कि आरोपी साहिल इसी गांव का रहने वाला है. वह अपने एक दोस्त के साथ गांव के मंदिर गया था; देवी-देवता की मूर्ति के सामने खड़े होकर उसने अपमानजनक शब्द कहे और अश्लील इशारे किए. उन्होंने इन हरकतों को अपने मोबाइल फोन पर एक रील के रूप में रिकॉर्ड किया और बाद में इसे फेसबुक पर शेयर कर दिया.
हालात तब और बिगड़ गए जब एक आपत्तिजनक रील कथित तौर पर भगवान हनुमान से संबंधित सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. आरोप है कि गांव के मुस्लिम युवकों ने AI तकनीक का इस्तेमाल करके यह वीडियो बनाया था, जिसमें उन्होंने अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया था. इस वीडियो के सामने आने से विभिन्न हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया.
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बजरंगबली की मूर्ति के सामने दी गई सजा
हिंदू संगठनों के आक्रोशित कार्यकर्ता बड़ी संख्या में गांव पहुंचे और आरोपी युवकों को पकड़ लिया और युवकों से उनके कान पकड़वाकर उठक-बैठक करवाया. इसके अलावा, माफी मांगने के तौर पर, युवकों को बजरंगबली (भगवान हनुमान) की मूर्ति के पैर छूने और जय श्री राम का नारा लगाने का आदेश दिया गया. जब यह पूरी घटना घटित हो रही थी, तब मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई थी, और पूरी घटनाक्रम का एक वीडियो रिकॉर्डिंग बाद में सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया गया.
हिंदू संगठनों ने अंततः युवकों को इस सख्त चेतावनी के साथ रिहा कर दिया कि वे भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न करें. इसके बावजूद, यह घटना इस क्षेत्र में चर्चा का एक प्रमुख विषय बनी हुई है. रिपोर्टों के अनुसार, धार्मिक सद्भाव को बिगाड़ने वाली डिजिटल सामग्री ही इस पूरे विवाद का मुख्य कारण थी.