India Unique Village: भारत में कई ऐसे जगह है जो अपने संस्कृतियों और कई बेहतरीन चीजों के लिए जाने जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा गांव है जो ‘जुड़वा बच्चों के गांव’ के नाम से मशहूर है? और आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यह गांव सचमुच अपने नाम के अनुरूप ही है.
700 की आबादी में 35 से ज्यादा ट्विन्स
उत्तर प्रदेश के मोहम्मदपुर उमरी गांव में, जो इलाहाबाद में बमरौली एयर फोर्स स्टेशन के पास स्थित है, जुड़वा बच्चों से जुड़ी पहचान की गलतियों के कई किस्से मशहूर हैं. लगभग 700 की आबादी वाले इस गांव में, जुड़वा बच्चों के 35 से भी ज्यादा जोड़े हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2006 की एक रिपोर्ट और यूएस नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के 2013 के एक अध्ययन के अनुसार, दुनिया भर में हर 1,000 जन्मों पर जुड़वा बच्चों के 9 से 12 जोड़े पैदा होते हैं. हालांकि, उमरी में जुड़वा बच्चों की औसत दर 1,000 पर 60 है.
वैज्ञानिकों ने लिए सैंपल
उमरी के आस-पास जुड़वां बच्चों के जन्म की इस घटना का कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं है. वहां कि 22 साल की एक महिला कहती हैं, वैज्ञानिक आए और उन्होंने हमारी लार और खून के सैंपल लिए, साथ ही मिट्टी और पानी के नमूने भी लिए. वो आगे बताती हैं की वैज्ञानिकों ने जानवरों के भी नमूने लिए, क्योंकि यहां गायें भी अक्सर जुड़वां बछड़ों को जन्म देती हैं. लेकिन वैज्ञानिक फिर कभी वापस नहीं आए.
आस-पास के कई गांवों के लोगों का मानना है कि उमरी में भूत-प्रेतों का साया मौजूद है. बहुत से लोगों को पक्का यकीन है कि पास के हवाई अड्डे से निकलने वाले रेडिएशन की वजह से गर्भ में पल रहे भ्रूण दो हिस्सों में बंट जाते हैं. हालंकि, उमरी के रहने वाले इन दावों को बिल्कुल नहीं मानते हैं.
भूत-प्रेत या रेडिएशन
हैदराबाद में स्थित सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के वैज्ञानिकों की एक टीम, जिसने 15 साल पहले उमरी का दौरा किया था, अज्ञात कारणों से अपना अध्ययन पूरा नहीं कर पाई. सीसीएमबी में ग्रुप लीडर जी.आर. चंदक, जिन्होंने 2002 में इस टीम का नेतृत्व किया था, ने बताया, “हमने उमरी से सैंपल इकट्ठा किए थे. हमने इंडियन सोसाइटी फॉर सोशल रिसर्च की मदद से एक सामाजिक सर्वेक्षण भी किया था. हमारा मकसद जुड़वां बच्चों के जन्म की घटना के पीछे के आनुवंशिक आधार का अध्ययन करना था. हालाँकि, चंदक के अनुसार, कई “समस्याओं” के कारण यह अध्ययन कभी पूरा नहीं हो पाया. वे बताते हैं, “गांव में बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी थी, और वहां के निवासी इस बात से नाराज थे कि उनकी जीवन स्थितियों को बेहतर बनाने के लिए कोई भी आगे नहीं आ रहा था.