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UP Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अगले साल होने हैं. चुनाव के दौरान बीजेपी से लेकर सपा तक राजनीतिक पार्टियों में हलचल भी तेज है. वहीं इस दौरान समाजवादी पार्टी भी 2024 के लोकसभा चुनाव जैसा फायदा विधानसभा चुनाव में पाने के लिए दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यकों पर ज्यादा ध्यान दे रही है. इसी क्रम में समाजवादी पार्टी ने कई नेताओं को सपा में शामिल किया.
लेकिन सबसे दिलचस्प बात तब सामने आई जब समाजवादी पार्टी ने लखनऊ ऑफिस में अन्य नेताओं के साथ रामपुर से लंबे समय से बसपा नेता रहे सुरेंद्र सागर को भी शामिल किया और यहीं नहीं उनको पार्टी में खास ओहदा भी दिया. वह मायावती सरकार में राज्य मंत्री भी रह चुके है. ऐसे में यह सवाल तो जरूर उठता है कि सुरेंद्र सागर और आजम खान में 36 का आंकड़ा होने के बावाजूद, वह अखिलेश के इतने खास कैसे बन गए.
समाजवादी पार्टी में सुरेंद्र नागर की एंट्री से खफा आजम खान
समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद अखिलेश यादव ने सुरेंद्र सागर का कद भी बढ़ा दिया है. नागर को 2 मार्च को SP का स्टेट सेक्रेटरी बनाया गया था. खबर है कि इससे समाजवादी पार्टी में नाराज़गी है. रामपुर में BSP में रहते हुए सुरेंद्र सागर और सपा के सीनियर नेता आजम खान के बीच 36 का आंकड़ा था, वह दोनों एक दूसरे के कट्टर विरोधी माने जाते थे. खबर है कि आजम खान की मंज़ूरी के बिना ही सुरेंद्र सागर को SP का स्टेट सेक्रेटरी बनाया गया। कहा जा रहा है कि इससे वह नाराज हैं.
सपा में शामिल होते ही सुरेंद्र सागर के बदले बोल
हालांकि, SP में शामिल होने पर सुरेंद्र सागर के बोल बदल चुके है और उन्होंने बार-बार आजम खान का सपोर्ट किया. उन्होंने कहा कि वह कानूनी तरीकों से जल्द से जल्द जेल से उनकी रिहाई की कोशिश करेंगे. समाजवादी पार्टी को आजम खान की ज़रूरत है। जेल से उनकी रिहाई से समाजवादी पार्टी मजबूत होगी.
मायावती ने जताया एतराज
सुरेंद्र सागर को SP में अहम पद दिए जाने से आजम खान नाराज हैं, लेकिन SP प्रेसिडेंट अखिलेश यादव जाटव और दूसरे दलित समुदायों को लुभाने के लिए कोई समझौता करने को तैयार नहीं दिख रहे हैं. SP ने 15 मार्च को कांशीराम की जयंती पर पूरे उत्तर प्रदेश में एक बड़ा जनसंपर्क अभियान शुरू करने का फ़ैसला किया है. पार्टी नेता मुलायम सिंह यादव और कांशीराम के बीच लंबे समय से चले आ रहे रिश्तों पर रोशनी डालेंगे. हालांकि बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने इस पर एतराज जताया है, लेकिन अखिलेश यादव पूरी तरह से चुनावी मोड में दिख रहे हैं.