UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा-दलित-माइनॉरिटी) फ़ॉर्मूले को 2024 के लोकसभा चुनाव में ज़बरदस्त कामयाबी मिली. SP के ग्रैंड अलायंस ने 43 सीटें जीतकर BJP की लगातार जीत को रोक दिया. NDA सिर्फ़ 36 पर सिमट गया, जबकि SP ने अकेले 37 सीटें जीतीं. अखिलेश के सामने अब यही चुनौती है.
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में SP के PDA फ़ॉर्मूले में मायावती सबसे बड़ी रुकावट हैं. BSP दलित वोट बैंक को बचाने में लगी हैं. इस बीच, अखिलेश ने 15 मार्च को कांशीराम की जयंती को PDA दिवस के तौर पर मनाने का एलान करके दलितों को लुभाने की एक और कोशिश की है. जिसपर मायावती ने तीखा जवाब दिया है. सवाल यह है कि 2027 में UP में सत्ता के लिए दलित वोट बैंक इतना ज़रूरी क्यों है? क्या अखिलेश की नई स्ट्रैटेजी BSP के कोर वोट बैंक में सेंध लगाएगी? या मायावती 2027 तक अपना 21% दलित वोट बैंक बचा पाएंगी?
कांशीराम राम जंयती को PDA डे के तौर पर मनाने का एलान
अखिलेश ने आगे लिखा कि आज पूरा PDA समुदाय इस फैसले से बहुत खुश और प्रसन्न है कि माननीय कांशीराम जैसे कई महान PDA नेताओं के मिशन को सही मायने में आगे बढ़ाने का संकल्प फिर से जाग रहा है.
अखिलेश के एलान पर मायावती का पलटवार
जैसाकि सर्वविदित है कि समाजवादी पार्टी (सपा) का चाल, चरित्र और चेहरा हमेशा से ही दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं बी.एस.पी.-विरोधी तथा ’बहुजन समाज’ में जन्में महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के आदर-सम्मान का नहीं बल्कि जग-ज़ाहिर तौर पर इनके अनादर, अपमान व तिरस्कार का ही रहा है, इस बारे…
— Mayawati (@Mayawati) February 26, 2026