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UP Election 2027: दलित वोट बैंक को लेकर अखिलेश खेलेंगे ये मास्टरस्ट्रोक, क्या मिलेगी सफलता या मायावाती देगी पटकनी?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027: यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में SP के PDA फ़ॉर्मूले में मायावती सबसे बड़ी रुकावट हैं. BSP दलित वोट बैंक को बचाने में लगी हैं.

Written By: Shristi S
Last Updated: 2026-03-03 20:51:46

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UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा-दलित-माइनॉरिटी) फ़ॉर्मूले को 2024 के लोकसभा चुनाव में ज़बरदस्त कामयाबी मिली. SP के ग्रैंड अलायंस ने 43 सीटें जीतकर BJP की लगातार जीत को रोक दिया. NDA सिर्फ़ 36 पर सिमट गया, जबकि SP ने अकेले 37 सीटें जीतीं. अखिलेश के सामने अब यही चुनौती है.

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में SP के PDA फ़ॉर्मूले में मायावती सबसे बड़ी रुकावट हैं. BSP दलित वोट बैंक को बचाने में लगी हैं. इस बीच, अखिलेश ने 15 मार्च को कांशीराम की जयंती को PDA दिवस के तौर पर मनाने का एलान करके दलितों को लुभाने की एक और कोशिश की है. जिसपर मायावती ने तीखा जवाब दिया है. सवाल यह है कि 2027 में UP में सत्ता के लिए दलित वोट बैंक इतना ज़रूरी क्यों है? क्या अखिलेश की नई स्ट्रैटेजी BSP के कोर वोट बैंक में सेंध लगाएगी? या मायावती 2027 तक अपना 21% दलित वोट बैंक बचा पाएंगी? 

कांशीराम राम जंयती को PDA डे के तौर पर मनाने का एलान

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के ज़रिए PDA डे मनाने का ऐलान किया. 26 फरवरी को अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए 15 मार्च को कांशीराम की जयंती को PDA डे के तौर पर मनाने का एलान किया. उन्होंने लिखा कि PDA डे एक नई शुरुआत है, जो PDA कम्युनिटी के उन सभी महान लोगों को समर्पित है जिन्होंने कभी किसी बड़े नेता का साथ नहीं दिया, ताकि समाज का हर दबा-कुचला, परेशान और बेइज्जत सदस्य सम्मान, तरक्की और बराबरी हासिल कर सके.

अखिलेश ने आगे लिखा कि आज पूरा PDA समुदाय इस फैसले से बहुत खुश और प्रसन्न है कि माननीय कांशीराम जैसे कई महान PDA नेताओं के मिशन को सही मायने में आगे बढ़ाने का संकल्प फिर से जाग रहा है.

अखिलेश के एलान पर मायावती का पलटवार

मायावती ने इस पर तीखा जवाब दिया. उन्होंने SP पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया और इस कदम को वोट हथियाने की चाल बताया. उन्होंने गेस्ट हाउस कांड से लेकर दलित आइकॉन के नाम बदलने तक पुराने ज़ख्मों को भी कुरेद दिया, और SP पर जातिवाद, धोखा और बहुजन विरोधी भावनाओं का आरोप लगाया.

9 अक्टूबर, 2025 को लखनऊ में BSP की बड़ी रैली के बाद से SP बेचैन है. उसे लग रहा है कि दलित BSP की तरफ लौट रहे हैं. इसका मुकाबला करने के लिए वह कांशीराम की जयंती को PDA दिवस के तौर पर मनाने की मांग कर रही है. ऐसा करके उसे दलितों के बीच अपना असर बढ़ाने की उम्मीद है. हालांकि, अखिलेश के पोस्ट के बाद मायावती ने जिस तरह सोशल मीडिया के जरिए पलटवार किया, उससे साफ पता चलता है कि BSP अब अपने कोर वोट बैंक को लेकर सचेत है. वह 2024 के लोकसभा चुनाव वाली गलती नहीं दोहराना चाहती.

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Last Updated: 2026-03-03 20:51:46

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UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा-दलित-माइनॉरिटी) फ़ॉर्मूले को 2024 के लोकसभा चुनाव में ज़बरदस्त कामयाबी मिली. SP के ग्रैंड अलायंस ने 43 सीटें जीतकर BJP की लगातार जीत को रोक दिया. NDA सिर्फ़ 36 पर सिमट गया, जबकि SP ने अकेले 37 सीटें जीतीं. अखिलेश के सामने अब यही चुनौती है.

यूपी विधानसभा चुनाव 2027 में SP के PDA फ़ॉर्मूले में मायावती सबसे बड़ी रुकावट हैं. BSP दलित वोट बैंक को बचाने में लगी हैं. इस बीच, अखिलेश ने 15 मार्च को कांशीराम की जयंती को PDA दिवस के तौर पर मनाने का एलान करके दलितों को लुभाने की एक और कोशिश की है. जिसपर मायावती ने तीखा जवाब दिया है. सवाल यह है कि 2027 में UP में सत्ता के लिए दलित वोट बैंक इतना ज़रूरी क्यों है? क्या अखिलेश की नई स्ट्रैटेजी BSP के कोर वोट बैंक में सेंध लगाएगी? या मायावती 2027 तक अपना 21% दलित वोट बैंक बचा पाएंगी? 

कांशीराम राम जंयती को PDA डे के तौर पर मनाने का एलान

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के ज़रिए PDA डे मनाने का ऐलान किया. 26 फरवरी को अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए 15 मार्च को कांशीराम की जयंती को PDA डे के तौर पर मनाने का एलान किया. उन्होंने लिखा कि PDA डे एक नई शुरुआत है, जो PDA कम्युनिटी के उन सभी महान लोगों को समर्पित है जिन्होंने कभी किसी बड़े नेता का साथ नहीं दिया, ताकि समाज का हर दबा-कुचला, परेशान और बेइज्जत सदस्य सम्मान, तरक्की और बराबरी हासिल कर सके.

अखिलेश ने आगे लिखा कि आज पूरा PDA समुदाय इस फैसले से बहुत खुश और प्रसन्न है कि माननीय कांशीराम जैसे कई महान PDA नेताओं के मिशन को सही मायने में आगे बढ़ाने का संकल्प फिर से जाग रहा है.

अखिलेश के एलान पर मायावती का पलटवार

मायावती ने इस पर तीखा जवाब दिया. उन्होंने SP पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया और इस कदम को वोट हथियाने की चाल बताया. उन्होंने गेस्ट हाउस कांड से लेकर दलित आइकॉन के नाम बदलने तक पुराने ज़ख्मों को भी कुरेद दिया, और SP पर जातिवाद, धोखा और बहुजन विरोधी भावनाओं का आरोप लगाया.

9 अक्टूबर, 2025 को लखनऊ में BSP की बड़ी रैली के बाद से SP बेचैन है. उसे लग रहा है कि दलित BSP की तरफ लौट रहे हैं. इसका मुकाबला करने के लिए वह कांशीराम की जयंती को PDA दिवस के तौर पर मनाने की मांग कर रही है. ऐसा करके उसे दलितों के बीच अपना असर बढ़ाने की उम्मीद है. हालांकि, अखिलेश के पोस्ट के बाद मायावती ने जिस तरह सोशल मीडिया के जरिए पलटवार किया, उससे साफ पता चलता है कि BSP अब अपने कोर वोट बैंक को लेकर सचेत है. वह 2024 के लोकसभा चुनाव वाली गलती नहीं दोहराना चाहती.

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