UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर हर तरफ चर्चाएं तेज हो गई है. यूपी को सबसे ज्यादा प्रभावशाली राजनीतिक राज्य माना जाता है. यहां होने वाले विधानसभा चुनाव का असर सिर्फ राज्य ही नहीं राजनीति पर ही नहीं, बल्कि देश की राजनीति पर भी असर डालता है. ऐसे में अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए क्या-क्या नियम होते हैं, उम्मीदवारों की योग्यता क्या होनी चाहिए, उम्र कितनी होनी चाहिए और चुनाव आयोग ने हाल के सालों में क्या बदलाव किए है.
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भारतीय चुनाव प्रणाली को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए भारत निर्वाचन आयोग समय-समय पर कई नियम और सुधार लागू करता रहता है. इन नियमों का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को साफ-सुथरी हो और योग्य उम्मीदवार की चुनाव में उतरें.
यूपी विधानसभा चुनाव हो या फिर लोकसभा चुनाव उम्मीदवार को लड़ने के लिए न्यूनतम 25 वर्ष होना जरूरी है.यह नियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 173 के तहत किया गया है.
चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार का भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है. अगर किसी व्यक्ति के पास किसी अन्य देश की नागोरिकता है या उसने की नागरिकता छोड़ी दी है, तो वह चुनाव लड़ने के योग्य नहीं माना जाएगा.
उम्मीदवार का नाम किसी भी विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज होना चाहिए. सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात यह है कि उम्मीदवार जिस सीट से चुनाव लड़ रहे है, उसी क्षेत्र का वोटर होना जरूरी नहीं है.
चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार को नामांकन पत्र भरकर चुनाव अधिकारी के पास जमा करना होता है. साथ ही इसके साथ पहचान पत्र, मतदाता पहचान पत्र, संपत्ति और आपराधिक मामलों की जानकारी, शपथ पत्र. नामांकन पत्र जमा होने के बाद उसकी जांच की जाती है, जिसे स्क्रूटिनी कहा जाता है.
यूपी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार को सिक्योरिटी डिपॉटिज जमा करना होता है.
जनरल उम्मीदवार- ₹10,000
अनुसूचित जाति/जनजाति उम्मीदवार- ₹5,000
चुनाव आयोग ने उम्मीदवारों के लिए एक सीमा तच की है. यूपी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार अधिकतम 40 लाख रूपये खर्च कर सकता है और इस पूरे खर्च का हिसाब उसे चुनाव आयोग को देना पड़ता है.
चुनाव आयोग ने पिछले कुछ सालों में चुनाव प्रक्रिया को और ज़्यादा ट्रांसपेरेंट बनाने के लिए कई बदलाव किए हैं। इनमें शामिल हैं:
उम्मीदवारों को अपने क्रिमिनल रिकॉर्ड सबके सामने बताने की जरूरत
चुनाव के खर्चों की डिजिटल मॉनिटरिंग
वोटिंग प्रक्रिया में EVM और VVPAT का इस्तेमाल
सोशल मीडिया और ऑनलाइन कैंपेनिंग की कड़ी मॉनिटरिंग
इन बदलावों का मकसद चुनावों को और ज़्यादा ट्रांसपेरेंट और फेयर बनाना है.