UP Jalaun News: उत्तर प्रदेश के जालौन के डकोर निवासी भानुप्रताप और उनकी पत्नी भूरी ने परिवार नियोजन के उद्देश्य से साल 2023 में सरकारी अस्पताल में नसबंदी कराई थी. उस समय डॉक्टरों ने ऑपरेशन को पूरी तरह से सफल बताया था, लेकिन करीब डेढ़ साल बाद भूरी ने एक बेटे को जन्म दिया था. पेशे से राजमिस्त्री भानुप्रताप का कहना है कि आर्थिक तंगी की वजह से उन्होंने दो बच्चों के बाद नसबंदी का फैसला लिया था, लेकिन इस विफलता ने उनके सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है.
तो वहीं, दंपति पिछले कई महीनों से अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं. उन्होंने अपनी शिकायत में कहा कि ‘हम दो, हमारे दो’ के सरकारी अभियान का पालन करने के बावजूद विभाग की लापरवाही की सजा उन्हें भुगतनी पड़ रही है. शुक्रवार को पीड़ित परिवार ने जिलाधिकारी को मांगपत्र सौंपकर बच्चे के भविष्य और परवरिश के लिए सरकारी सहायता की मांग की है.
प्रशासन की कार्रवाई और मुआवजे का प्रावधान
इस मामले पर मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) डॉ. वीरेंद्र सिंह ने संज्ञान लेते हुए डकोर क्षेत्र के संबंधित स्वास्थ्य केंद्र से फाइल तलब की है. उन्होंने साफ-साफ शब्दों में कहा कि पूरे प्रकरण की गहन जांच कराई जा रही है ताकि यह पता चल सके कि लापरवाही किस स्तर पर हुई है. जांच रिपोर्ट के मुताबिक पर ही यह तय किया जाएगा कि परिवार को शासन के नियमों के तहत कितना मुआवजा दिया जा सकता है.
फिलहाल, प्रशासन की तरफ से आश्वासन दिया गया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार उचित कार्रवाई भी की जाएगी. यह मामला सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता और परिवार नियोजन कार्यक्रमों के क्रियान्वयन पर गंभीर सवालिया निशान लगाता है.